What is PACS। क्या है पैक्स : देश के पहले सहकारिता मंत्री बने अमित शाह, पद संभालने के बाद देश का नक्शा बदलने कर रहे दावा
What is PACS क्या है पैक्स : अब सवाल यह है कि जब कृषि ऋण समितियों को पेट्रो उत्पाद बेचने और स्कूल-अस्पताल चलाने की अनुमति मिल जायेगी तो यह किसानों के लिए पहले की तरह काम कर पायेंगी
What is PACS। क्या है पैक्स : देश के पहले सहकारिता मंत्री बने अमित शाह, पद संभालने के बाद देश का नक्शा बदलने कर रहे दावा
What is PACS क्या है पैक्स : मोदी सरकार 2 में एक नया मंत्रालय गठित किया गया था, जिसका नाम रखा गया सहकारिता मंत्रालय। सात जुलाई 2021 को हुए कैबिनेट विस्तार में इसका हेड यानी मंत्री बनाया गया भाजपा और पीएम मोदी के खास अमित शाह को। गौरतलब है कि ये वही अमित शाह हैं जो लंबे समय तक अहमदाबाद ज़िला केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रमुख रह चुके हैं।
फिलहाल इस मंत्रालय की बात इसलिए क्योंकि केंद्र की मोदी सरकार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (Primary Agriculture Cooperative Society) के माध्यम से भारत के गांवों का नक्शा बदलने का दावा कर रही है। यानी सरकार Primary Agriculture Cooperative Society (PACS) को पेट्रोलियम उत्पादों की डीलरशिप और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानें चलाने के अलावा अस्पताल और स्कूल खोलने तथा कई अन्य क्षेत्रों में काम करने की अनुमति देने जा रही है और इसके लिए प्रस्ताव रख दिया गया है। इसके लिए सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पैक्स के वर्तमान उपनियमों में बदलाव का मसौदा भी जारी कर दिया है।
मोदी सरकार दावा करती है कि उसने कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के विकास और कोऑपरेटिव सेक्टर (cooperative sector) में पारदर्शिता लाने के लिए यह बड़ा कदम उठाया है। इसके बाद देशभर के 63,000 प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसाइटीज (पैक्स) का कम्प्यूटरीकरण कर दिया जायेगा। हर सोसाइटी का कम्प्यूटरीकरण करने में लगभग चार लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। मसौदे के मुताबिक इस खर्च में से 75 फीसदी हिस्सा केंद्र खर्च करेगा, और बाकी 25 फीसदी खर्च राज्य और नाबार्ड उठाएंगे।
सहकारिता मंत्री अमित शाह की मानें तो इससे लगभग 13 करोड़ किसानों को सीधे लाभ पहुंचेगा, क्योंकि इसमें अधिकांश छोटे और सीमांत किसान शामिल हैं। कैबिनेट द्वारा पैक्स के कम्प्यूटरीकरण की अनुमति प्रदान कर दी गयी है। यानी लगभग 2516 करोड़ रुपये के बजट के साथ 63,000 प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसाइटीज यानी पैक्स का कम्प्यूटरीकरण शुरू हो जायेगा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस पैक्स पर हजारों करोड़ रुपये कम्प्यूटरीकरण में ही खर्च किये जायेंगे वह है क्या...
Primary Agriculture Credit Societies (प्राथमिक कृषि ऋण सोसाइटी) एक बुनियादी इकाई और भारत में सबसे छोटी सहकारी ऋण संस्था में से एक है। यह जमीनी स्तर पर ग्राम पंचायत और गांव स्तर पर काम करती आयी है।
गौरतलब है कि किसानों को साहूकारों के चंगुल से मुक्ति दिलाने के लिए पैक्स का गठन किया गया था। इससे किसानों को फायदा होता है, किसानों को सस्ते ब्याज पर कर्ज, खाद, बीज, दवाइयां, उपलब्ध होती हैं। इनका किसानों को फायदा भी हो रहा है। फसल लोन में एक किसान को प्रति एकड़ के हिसाब से अधिकतम 11250 रुपए नकद और तीन हजार 700 रुपए खाद, बीज और दवाइयों के रूप में मिलते हैं। किसानों को सात प्रतिशत सालाना ब्याज की दर से कर्ज भी मिलता है। भुगतान तय सीमा में कर दें तो दो से तीन प्रतिशत ब्याज की छूट मिल जाती है। कुल मिलाकर चार प्रतिशत ब्याज पर किसानों को कर्ज मिल जाता है।
हर प्राथमिक कृषि ऋण समिति को कृषि संयंत्र की खरीदारी के लिए 20 लाख रुपए मिलते हैं। यह लाभ पैक्सों को सहकारिता विभाग के अंतर्गत मुख्यमंत्री हरित कृषि संयंत्र योजना के तहत मिलता है ,पैक्सों द्वारा इसकी खरीदारी के बाद किसान पैक्स से भाड़े पर कृषि कार्य के लिए कृषि संयंत्र ले सकेंगे।
पैक्स इस राशि से 20 लाख तक के कृषि संयंत्र की खरीदारी कर सकते हैं। इसके लिए विभाग द्वारा 12 कृषि संयंत्र चिह्नित किए गए हैं। इसमें 48 एचपी तक के ट्रैक्टर के लिए सात लाख 50 हजार, सेल्फ प्रोपेल्ड राइस ट्रांसप्लांटर के लिए तीन लाख 50 हजार, रोटावेटर के लिए 80 हजार,ऑटोमेटिक पावर विडर के लिए 70 हजार,मल्टी क्रॉप थ्रेसर के लिए 80 हजार, मेज सेलर के लिए 60 हजार, पावर स्प्रेयर के लिए 39 हजार की राशि निर्धारित की गई है। इसके अलावा शेड के लिए तीन लाख 56 हजार की राशि निर्धारित है।
मगर अब सवाल यह है कि जब कृषि ऋण समितियों को पेट्रो उत्पाद बेचने और स्कूल-अस्पताल चलाने की अनुमति मिल जायेगी तो यह किसानों के लिए पहले की तरह काम कर पायेंगी।
अमित शाह ने जो मसौदा जारी किया है उसके मुताबिक समिति का लक्ष्य इसके सदस्यों को लघु एवं मध्यम अवधि में समयबद्ध और पर्याप्त कर्ज उपलब्ध करना है। कर्ज का इस्तेमाल कृषि संबंधी विकास, सेहत संबंधी जरूरतों में किया जा सकता है। पैक्स को समुदाय आधारित सेवाओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और पर्यावरण के साथ टिकाउ विकास गतिविधियों की अनुमति है। इतना ही नहीं मोदी सरकार का दावा है कि गांवों में सुविधायें बढ़ाने के लिए 2025 तक पूरे देश में 63 हजार से बढ़कर 3 लाख पैक्स शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
बकौल सहकारिता मंत्री अमित शाह, पूरी दुनिया की 30 लाख सहकारी समितियों में से 8,55,000 भारत में हैं और लगभग 13 करोड़ लोग सीधे इनसे जुड़े हैं और देश के 91 प्रतिशत गांव ऐसे हैं, जिनमें कोई न कोई सहकारी समिति है। सहकारिता शुरुआत से ही भारतीय संस्कृति का प्राणतत्व रही है और भारत ने पूरी दुनिया को सहकारिता का विचार दिया। मोदी सरकार ने देश की 65 हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के कंप्यूटरीकरण का निर्णय किया है, जिससे पैक्स, जिला सहकारी बैंक, राज्य सहकारी बैंक और नाबार्ड ऑनलाइन हो जाएंगे।'