आयकर विभाग ने जब्त की बसपा सुप्रीमो के भाई की 400 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति

Update: 2019-07-19 06:40 GMT

बसपा उपाध्यक्ष आनंद कुमार की मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं आगे, क्योंकि आयकर विभाग द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय भी है कार्रवाई की तैयारी में...

जनज्वार। आयकर विभाग ने कल गुरुवार 18 जुलाई को बेनामी संपत्ति के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नोएडा में 400 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की है। यह संपत्ति बसपा सुप्रीमो मायावती के भाई आनंद कुमार और उनकी पत्नी विचित्र लता की है। आयकर विभाग ने नोएडा में 28 हजार वर्ग मीटर की जमीन भी सील की है, जिसकी सरकारी कीमत 400 करोड़ रुपये आंकी गई है।

गौरतलब है कि आनंद कुमार के खिलाफ बेनामी संपत्ति की जानकारी मिली थी, जिसके बाद 2017 में आयकर विभाग ने उनसे पूछताछ की थी। आयकर विभाग के मुताबिक आनंद कुमार ने दिल्ली के व्यवसायी एसके जैन के सहयोग से कई हजार करोड़ की बेनामी संपत्ति जुटाई थी। इस मामले में एसके जैन को बोगस कंपनी मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार कर लिया था। आनंद कुमार ने वर्ष 2007 से लेकर साल 2012 तक बेनामी संपत्ति बनाई थी। यह वही दौर था जब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं।

क रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2007 से 2012 के बीच आनंद कुमार की नेटवर्थ 7.5 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,316 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। आनंद कुमार पर आरोप है कि उन्होंने बोगस कंपनियां बनाकर कई हजार करोड़ की बेनामी संपत्ति बनाई। यह भी आरोप है कि उन्होंने नोटबंदी के दौरान इन्हीं फर्जी कंपनियों की सहायता से करोड़ों रुपए बदलवाए थे।

सपा उपाध्यक्ष आनंद कुमार की मुश्किलें आगे और भी बढ़ सकती हैं, क्योंकि आयकर विभाग द्वारा की गई इस कार्रवाई के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कार्रवाई के तैयारी में हैं। इस मामले में ईडी मनी लांड्रिंग मामले में केस दर्ज किया था। अब वह इसमें तेजी लाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में आनंद कुमार पर की गई इस कार्रवाई की आंच बसपा सुप्रीमो मायावती तक भी पहुंच सकती है। जानकारों का कहना है कि आनंद कुमार की कुछ और बेनामी संपत्तियों की जानकारी आयकर विभाग के पास है, जिस पर भविष्य में विभाग कार्रवाई कर सकता है।

मायावती के ख़िलाफ़ प्रवर्तन निदेशालय उनके मुख्यमंत्री रहते हुए कथित स्मारक घोटाले में भी छापेमारी कर चुका है। कुछ दिन पहले ही अखिलेश राज में हुए खनन घोटाले व मायावती के समय में हुई सरकारी चीनी मिलों की बिक्री में खेल को लेकर सीबीआई ने ताबड़तोड़ छापेमारी की थी।

सीबीआई ने बुलंदशहर के डीएम अभय सिंह, राज्य कौशल विकास मिशन के निदेशक विवेक और एक वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी के आवास की तलाशी ली थी और करोड़ों रुपये की नकद व बेनामी संपत्तियों के कागजात जब्त किए थे। इससे पहले भी सीबीआई ने मायावती के प्रमुख सचिव रहे पूर्व आईएएस नेतराम व विनय प्रिय दुबे के घर भी छापेमारी की थी। इससे पहले भी सीबीआई फ़रवरी में नेतराम के घर छापा डाल चुकी है।

हुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पार्टी की मुखिया मायावती के भाई आनंद कुमार पर्दे के पीछे भी राजनीति में बड़े सक्रिय रहे। आनंद कुमार सूबे में मायावती के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय हो जाते थे। एक क्लर्क से लेकर धनकुबेर बनने का इनता सफर बहुत लंबा नहीं है।

नंद कुमार वर्ष 2007 से पहले तक नोएडा अथॉरिटी में क्लर्क करते थे। मायावती के उत्तर प्रदेश की सत्ता में आने के बाद आनंद कुमार की संपत्ति अचानक तेजी से बढ़ी। 2007 तक आनंद कुमार लगातार अपनी नौकरी करते रहे। अपनी इस नौकरी के दौरान मीडिया ही नहीं राजनीतिक सुर्खियों से भी वो बहुत दूर थे।

यकर विभाग का आनंद पर आरोप हैं कि वर्ष 2007 में जब आनंद कुमार नोएडा अथॉरिटी में नौकरी करते थे तो उन्होंने एक कंपनी बनाई थी। ईडी की एक जांच के दौरान सामने आया कि 2014 तक आनंद ने 45 से अधिक कंपनियां खड़ी कर ली थीं। आयकर विभाग की नजरें उन 12 कंपनियों पर भी है, जिनसे आनंद कुमार बतौर निदेशक जुड़े थे।

यकर विभाग को अपनी जांच में पता चला है कि 2007 से 2012 तक जब मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं, तब पांच कंपनियों के फैक्टर टेक्नोलॉजीज, होटल लाइब्रेरी, साची प्रॉपर्टीज, दीया रियल्टर्स और ईशा प्रॉपर्टीज के जरिए अधिकतर पैसा इकट्ठा किया गया।

डी और आयकर विभाग के आरोपों के अनुसार जांच में खुलासा हुआ है कि 2007 के दौरान आनंद कुमार के पास करीब 7.1 करोड़ रुपये की संपत्ति थी। सात साल में 2014 तक आनंद कुमार ने अपनी संपत्ति को बढ़ाकर 1316 करोड़ रुपये कर लिया था। इन सात साल के दौरान पांच साल मायावती की सरकार रही थी।

जांच के दौरान इस संबंध में आनंद का कहना था कि इस दौरान उनकी कंपनियों के मुनाफे में 18000 प्रतिशत का उछाल आया था। आयकर विभाग का दावा है कि उसके पास मायावती के भाई आनंद कुमार की कई बेनामी संपत्तियों की जानकारी है। इन संपत्तियों के खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की जा सकती है।

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