गाजियाबाद में शिक्षा और वैज्ञानिक चेतना का परचम लहराता 'भगत सिंह अध्ययन केंद्र'

Update: 2019-04-05 10:55 GMT

जनज्वार। गाजियाबाद के अति पिछड़े इलाकों में शुमार लोनी विधानसभा क्षेत्र के प्रशांत विहार इलाके में चलने वाला निशुल्क कोचिंग संस्थान 'शहीद भगत सिंह अध्ययन केंद्र' पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों में वैज्ञानिक चेतना जागृत करने के प्रयास में जुटा है। यहां पढ़ने वाले छात्र भगत सिंह, गांधी, प्रेमचंद से लेकर अरस्तु की शिक्षाओं से परिचित हैं। केंद्र के शिक्षकों का मानना है कि हम बच्चों को स्कूली ज्ञान के साथ—साथ मानवता और इंसानियत की सेवा करने वाले आदर्शों के प्रति भी जागरूक करते हैं।

इस अध्ययन केंद्र से जुड़े सहयोगियों से 4 अप्रैल को जनज्वार टीम की मुलाकात 'जनज्वार चुनावी पड़ताल' यात्रा के दौरान हुई। जनज्वार की ओर से लोनी पहुंचे अजय प्रकाश, सुशील मानव और तरुण शर्मा ने भगत सिंह अध्ययन केंद्र से जुड़े शिक्षकों, छात्रों और सहयोगियों से बातचीत की।

टीम से बातचीत में शिक्षक कुलदीप ने बताया, 'भगत सिंह अध्ययन केंद्र की स्थापना हम 8—10 साथियों ने मिलकर की। यहां केंद्र शुरू करने का मकसद था कि संसाधनों के अभाव में बच्चे अच्छी शिक्षा से वंचित न रह जाएं। लोनी का करीब 12 लाख की आबादी वाले इस ​क्षेत्र में सिर्फ एक इंटर कॉलेज है। आबादी का बहुतायत चूंकि गरीब है, इसलिए वह अपने बच्चों को न घर में ठीक से पढ़ा पाता है न ही महंगे ट्यूटर रखने की क्षमता रखता है। ऐसे में हमने यह जगह चुनी जिससे कि हम अपने मामूली संसाधनों में ही बेहतर क्षमताओं वाले छात्र बना सकें जिनमें तेज भी हो और आदर्श भी।'

अध्ययन केंद्र टीम के सहयोगी बबलू कुमार के अनुसार, 'यहां रहने वाले बड़ी उम्र के लोगों में अपने अधिकारों के प्रति उतनी जागरुकता नहीं है जितना कि कोचिंग संस्थान में आने वाले बच्चों में। आप किसी से बात कर समझ सकते है। हम लोगों का मानना है कि ऐसा नहीं हो सकता है कि आज शिक्षा का दिन है और कल अधिकार जानने का। यह दोनों समानार्थी हैं और एक—दूसरे का पूरक भी। समाज में किसी शिक्षित व्यक्ति का तबतक कोई मतलब नहीं है जबतक वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक और दूसरों के प्रति संवेदनशील न हो।'

भगत सिंह अध्ययन केंद्र के मेंटर माने जाने वाले केपी सिंह के अनुसार, 'हमें समाज ने जो दिया हम उसे औरों में बांटने की कोशिश कर रहे हैं। इतनी बड़ी आबादी के हम 1 प्रतिशत बच्चों को भी नहीं पढ़ा पाते, पर हमें उम्मीद है कि जो बच्चे भगत सिंह अध्ययन केंद्र से निकलेंगे वे अपने जैसे हजारों बच्चों को तैयार करेंगे। उनका भरोसा इंसानियत, बराबरी के अधिकार और वैज्ञानिक चेतना में ज्यादा होगा।'

यह पूछने पर कि अध्ययन केंद्र की टीम भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी और प्रेमचंद जैसे ​​विशाल व्यक्तित्व वाले साहित्यकार के आदर्शों से कैसे प्रेरित हुई, और वे लोग क्यों चाहते हैं कि बच्चे भी उन आदर्शों को जाने और जुड़ें, केपी सिंह कहते हैं, 'आर्थिक गैरबराबरी तो हम सब आज भी झेल रहे हैं, लेकिन बचपन में हमने समााजिक गैरबराबरी बहुत झेली। बोलने के अधिकार पर जैसे पाबंदी ही होती थी। फिर हम लोग भगत सिंह के विचारों के करीब आए। देखा, जाना और पढ़ा कि शहीदों का सपना एक ऐसे भारत के निर्माण था जहां जाति, धर्म और लिंग के आधार पर गैर बराबरी नहीं होगी। पर जब से होश संभाला तो देखा कि सारी गैरबराबरी इसी आधार पर होती है। तो हमने मिलकर सोचा कि जहां भी हो, जैसे भी हो अलख जगानी है, खासकर बच्चों को इतना शिक्षित और जागरूक करना है कि वह सही और गलत का फर्क कर सकें, शोषक और शोषित के अंतर को समझ सकें।'

भगत सिंह अध्ययन केंद्र, लोनी में छात्रों—शिक्षकों से बातचीत

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