भारी सुरक्षा बल की तैनाती में जेएनयू छात्रसंघ इलेक्शन की गणना 14 घंटे बाद की गई शुरू

Update: 2018-09-15 15:59 GMT

छात्रसंघ चुनावों की मतगणना प्रक्रिया 14 सितंबर को रात 10 बजे शुरू हुई, लेकिन मतगणना कक्ष में कुछ लोगों के जबरन घुसने और सीलबंद मतदान पेटियों तथा मतपत्रों को छीन कर ले जाने की कोशिश होने के बाद मतगणना रोक दी गई

जनज्वार। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के हंगामे के बाद आज सुबह रोकी गई जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) चुनाव की मतगणना लगभग 14 घंटे बाद दोबारा शुरू की गई है।

गौरतलब है कि जेएनयू में चुनाव के बाद से ही भारी गहमागहमी छाई हुई है। अलग—अलग छात्र गुटों के बीच भारी हंगामे की आशंका को देखते हुए मतदान केंद के बाहर हिंसक गति​विधियों को रोकने हेतु सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं। यही नहीं सुरक्षा के मद्देनजर सीआरपीएफ की भी तैनाती की गई है।

गौरतलब है कि आज सुबह जब मतों की गिनती शुरू हुई थी तो भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्रों द्वारा वहां पर भारी हंगामा बरपाया गया था, जिसके बाद मतगणना रोक दी गई। मतगणना रोके जाने पर सारे छात्र संगठन ​एबीवीपी के खिलाफ लामबंद होते नजर आए और विरोध प्रदर्शन करने लगे।

दूसरी तरफ एबीवीपी के मुताबिक उनके कार्यकर्ताओं ने हंगामा इसलिए किया क्योंकि उनके मतगणना एजेंट को साइंस स्कूलों में मतगणना शुरू होने की जानकारी नहीं दी गई थी। चुनाव आयोग का वामपंथी छात्र संगठन की तरफ झुकाव है, जो यहां नजर आ रहा था। इसलिए जानबूझकर हमारे मतगणना एजेंट की गैरमौजूदगी में गणना शुरू कर दी गई। हमारे पास सिवाय हंगामे के कोई चारा नहीं बचा था।

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर अन्य छात्र संगठनों के सदस्यों द्वारा एबीवीपी पर हंगामा कर मतगणना कार्य को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया। कहा जाने लगा कि अपनी हार के डर से उसने जानबूझकर यह किया, मगर एबीवीपी इन सारे आरोपों को खारिज करती नजर आई।

जेएनयू चुनाव समिति ने मीडिया को बताया कि छात्रसंघ चुनावों की मतगणना प्रक्रिया 14 सितंबर को रात 10 बजे शुरू हुई, लेकिन मतगणना कक्ष में कुछ लोगों के जबरन घुसने और सीलबंद मतदान पेटियों तथा मतपत्रों को छीन कर ले जाने की कोशिश होने के बाद मतगणना रोक दी गई। जब उन्होंने मत पेटियों को नहीं ले जाने दिया तो उन्हें और खासकर महिलाओं को धमकाया गया।

वहीं वामपंथी छात्र संगठन ने दावा किया कि आज तड़के अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद वालों ने इंटरनेशनल स्टडीज बिल्डिंग स्कूल के शीशे तोड़ दिए, जिसके बाद ईसी ने मतगणना रोक दी।

इस पर बोलते हुए संयुक्त वाम मोर्चा के प्रत्याशी साईं बालाजी ने कहा कि ये एबीवीपी बनाम जेएनयू की लड़ाई है। विश्वविद्यालय में सभी छात्रसंघों के उम्मीदवार और जेएनयू के आम छात्र एबीवीपी की हिंसात्मक कार्रवाई के विरोध में खड़े हैं।

वहीं जेएनयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष गीता कुमारी ने कहा, एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने सचमुच मतगणना परिसर पर कब्जा कर लिया है और गिनती नहीं होने दे रहे हैं।

गौरतलब है ​कि इस बार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) चुनावों में छात्रों ने पिछले 6 सालों में सर्वाधिक लगभग 68 प्रतिशत मतदान हुआ। इसमें 5,000 से अधिक छात्रों ने मतदान किया।

इस चुनाव में वाम समर्थित ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) 'यूनाइटेड लेफ्ट गठबंधन बनाकर चुनाव मैदान में हैं। इसके एबीवीपी, एनएसयूआई (नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया) और बीएपीएसए (बिरसा अम्बेडकर फुले छात्र संघ) के उम्मीदवार मैदान भी दमखम के साथ मैदान में है। देखना है कि तमाम विवादों के बीच जीत की मुहर कौन से छात्र संगठन के किसके माथे पर लगती है।

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