भूखे देश में अनाज की सरकारी बर्बादी, सरकारी गोदामों में पिछले 3 वर्षों में बर्बाद हुआ 406 करोड़ रुपये का अनाज

आंकड़ों के अनुसार मई में 26 लाख टन, जून में 1453 लाख टन, जुलाई में 41 लाख टन और अगस्त में 51 लाख टन अनाज भंडारण के दौरान बर्बाद हुआ....

Update: 2021-08-14 06:25 GMT

(ग्लोबल हंगर इंडेक्स में शामिल कुल 107 देशों में से हमारा देश 94वें पायदान पर है)

वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र पाण्डेय का विश्लेषण

जनज्वार। संसद का पूरा सत्र बीत गया, पर सरकार ने किसानों के ऊपर कोई चर्चा नहीं की – अलबत्ता इसी बीच में मीडिया के कैमरों के सामने थैले पर लटके मोदी जी का सरकारी उत्सव और जश्न आजोजित किया गया जिसमें अत्यधिक गरीबों को 5 किलो अनाज देने का नाटक किया गया। इसी दौर में किसान सम्मान निधि में किश्त डालने का लाइव टेलीकास्ट भी किया गया। पर, ना तो संसद में किसानों पर कोई चर्चा की गयी और ना ही विपक्ष के बार-बार अनुरोध के बाद भी कृषि कानूनों पर बहस की गयी। फिर भी किसानों का जीवत देखिये, वे पूरी निष्ठा और लगन से अपना काम कर रहे हैं, अनाज के गोदाम भर रहे हैं और सरकार इन अनाजों को बर्बाद कर रही है।

हाल में ही कृषि पर संसद की स्टैंडिंग कमिटी की एक रिपोर्ट के अनुसार देश के सरकारी गोदामों में पिछले तीन वर्ष के दौरान 406 करोड़ रुपये का अनाज बर्बाद हुआ है और 1.39 करोड़ रुपये का अनाज चोरी हो गया है। राहुल गाँधी ने इस बर्बादी पर कहा है कि अनाज की बर्बादी गरीबों के खाने की सरकारी चोरी है। कुछ समाचार पत्रों के आकलन के अनुसार यदि यह अनाज बर्बाद नहीं होता तो इससे देश की आधी बेघर आबादी का तीन महीने तक पौष्टिक आहार दिया जा सकता था।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में शामिल कुल 107 देशों में से हमारा देश 94वें पायदान पर है, फिर भी सरकारी भंडारों में अन्न बर्बाद हो रहा है। अन्न की बर्बादी के आंकड़े भी अलग-अलग है। जब राम बिलास पासवान कृषि मंत्री थे, तब उन्होंने बताया था कि अनाज का भंडारण वैज्ञानिक तरीके से किया जाता है और इसमें बर्बादी महज 0.002 प्रतिशत है। दूसरी तरफ फ़ूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया, जो अनाज का भंडारण करती है, के अनुसार अनाज की बर्बादी औसतन 0.7 प्रतिशत होती है, जबकि जानकारों के अनुसार यह बर्बादी 1 प्रतिशत से अधिक होती है।

मई-जून 2020 में जब देश के गरीब भूख से तबाह हो रहे थे, पैदल सैकड़ों किलोमीटर चल रहे थे और रास्ते में भूख से दम तोड़ रहे थे, तब सरकारी गोदामों में अनाज की बर्बादी अपने चरम पर थी। मिनिस्ट्री ऑफ़ कंज्यूमर अफेयर्स के अनुसार वर्ष 2020 में मई से अगस्त के बीच सरकारी गोदामों में 1550 लाख टन से भी अधिक अनाज की बर्बादी हुई। आंकड़ों के अनुसार मई में 26 लाख टन, जून में 1453 लाख टन, जुलाई में 41 लाख टन और अगस्त में 51 लाख टन अनाज भंडारण के दौरान बर्बाद हुआ।

फ़ूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया के अनुसार यह बर्बादी सामान्य से 15 प्रतिशत से भी अधिक थी। मिनिस्ट्री ऑफ़ कंज्यूमर अफेयर्स के अनुसार वर्ष 2020 में जनवरी से अप्रैल के बीच 65 लाख टन अनाज बर्बाद हुआ। इसी मंत्रालय ने लोक सभा में बताय था कि वर्ष 2017 से 2020 के बीच अनाज के भंडारण के दौरान 11520 टन अनाज बर्बाद हुआ, जिसकी कीमत 15 कारिड रुपये थी।

वर्ष 2016 के दौरान संसद में बताया गया था कि देश में प्रतिवर्ष औसतन 92651 करोड़ रुपये मूल्य का लगभग 7 करोड़ टन अनाज बर्बाद होता है।संयुक्त राष्ट्र के फ़ूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाईजेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार हमारे देश में अनाज पैदा करने से लेकर इसके उपभोग के बीच लगभग 40 करोड़ अनाज बर्बाद चला जाता है, जिसमें लगभग 2 करोड़ टन गेहूं होता है। अनुमान है कि देश में 14 प्रतिशत से अधिक आबादी कुपोषित है, फिर भी प्रति व्यक्ति औसतन 50 किलोग्राम प्रतिवर्ष खाने की बर्बादी की जाती है।

जाहिर है, मोदी जी के न्यू इंडिया में एक तरफ तो भुखमरी और कुपोषण बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ अनाज की बर्बादी बढ़ती जा रही है। इन सबके बीच सरकार गरीबों को हरेक महीने 5 किलो अनाज बांटने का जश्न मना रही है, या यो कहें कि जश्न मनाने के लिए अनाज बांटने का नाटक किया जा रहा है।

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