अमेरिकी गुप्तचर विभाग का आरोप 'चीन अति शक्तिशाली सेना का निर्माण कर रहा है' के क्या हैं मायने?

ट्रंप प्रशासन की चीन पर झुंझलाहट का कारण चीन की सरकार द्वारा निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को जीत की बधाई देना भी है। दुनिया के बड़े देशों में चीन ने शुरू में इस चुनाव परिणाम पर पूरी चुप्पी साध ली थी पर 12 नवंबर को चीन के विदेश विभाग के प्रवक्ता ने वक्तव्य दिया कि चीन सरकार अमेरिकी जनता के फैसले का सम्मान करती है और बाइडेन और कमला हैरिस को बधाई देती है।

Update: 2020-12-06 06:28 GMT

John ratcliffe.

महेंद्र पांडेय का विश्लेषण

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन में राष्ट्रीय गुप्तचर विभाग के मुखिया जॉन रत्क्लिफ्फे ने 3 दिसंबर को वाल स्ट्रीट जर्नल के संपादकीय पृष्ठ पर लिखे गए लेख में चीन पर आरोप लगाया है कि इस देश में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जवानों पर जैविक परीक्षण कर उन्हें अति शक्तिशाली बनाने का काम किया जा रहा है। इस लेख में कहा गया है कि चीन केवल अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा है। वह देश दुनिया की अर्थव्यवस्था, सैन्य शक्ति और प्रोद्योगिकी पर एकछत्र राज करना चाहता है और इसके लिए किसी भी हद तक जा सकता है। गुप्तचर विभाग के मुखिया ने मई 2020 में इस पद को संभाला था और उसके बाद चीन को अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन मानते हुए रूस और आतंकवाद से संबंधित फंड को भी चीन की जासूसी में लगा दिया।

अमेरिका में चुनावों के बाद से अभी तक ट्रंप प्रशासन चीन पर लगातार हमले कर रहा है और गुप्तचर विभाग के मुखिया का यह वक्तव्य भी इस हमले की कड़ी को आगे ले जाता है। हालांकि ट्रंप प्रशासन के सभी आरोपों की तरह इस आरोप का कोई भी सबूत पेश नहीं किया गया। चुनावों के बाद से ट्रंप और उनका पूरा प्रशासन बस दो काम में व्यस्त है। राष्ट्रपति चुनावों में धांधली के आरोप लगाना और चीन पर तमाम किस्म का दोषारोपण करना। चीन पर इस नए आरोप को भी जानकार इसी कड़ी में देख रहे हैं।

अनेक अंग्रेजी फिल्मों में पुलिस या सैनिकों में जैविक स्तर पर बदलाव कर उन्हें अति-शक्तिशाली बना देने की कहानियां हैं। यूनिवर्सल सोल्जर नामक फिल्म में सामान्य सैनिकों में ऐसे परिवर्तन कर दिए गए थे जिनसे उनके घाव तुरंत भर जाएं और साथ ही उनकी ताकत सामान्य व्यक्ति की तुलना में कई गुना अधिक हो, लगभग यही सब रोबोकोप नामक फिल्म में भी था।

ट्रंप प्रशासन की चीन पर झुंझलाहट का कारण चीन की सरकार द्वारा निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को जीत की बधाई देना भी है। दुनिया के बड़े देशों में चीन ने शुरू में इस चुनाव परिणाम पर पूरी चुप्पी साध ली थी पर 12 नवंबर को चीन के विदेश विभाग के प्रवक्ता ने वक्तव्य दिया कि चीन सरकार अमेरिकी जनता के फैसले का सम्मान करती है और बाइडेन और कमला हैरिस को बधाई देती है। इसके ठीक बाद चीन-अमेरिका के रिश्तों के जानकारों ने एक स्वर में दावा किया था अगले दो महीनों के दौरान अमेरिका द्वारा चीन पर अनेक गंभीर आरोप लगाए जायेंगे। केवल दो महीने इसलिए कहा गया क्योंकि अमेरिका में यदि सबकुछ सामान्य रहा तो ट्रंप 19 जनवरी तक ही राष्ट्रपति रहेंगे।

अमेरिका में राष्ट्रीय गुप्तचर विभाग के मुखिया जॉन रत्क्लिफ्फे के आरोप अनेक कारणों से सवालों के घेरे में हैं। उन्होंने इस बारे में कोई भी सबूत नहीं दिए और ना ही गुप्तचर विभाग की किसी रिपोर्ट में ऐसा कभी बताया गया है, चीन आधुनिक प्रोद्योगिकी के संदर्भ में, विशेष तौर पर आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में एक है। यदि उसे अति शक्तिशाली सैनिक का निर्माण करना होगा तो फिर आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस से लैस रोबोट्स को विकसित करना उसके लिए आसान होगा। सेवारत जवानों पर कितना भी जैविक परीक्षण किया जाए उनमें शारीरिक और मानसिक तौर पर बहुत अधिक अंतर नहीं लाया जा सकता है। यदि कुछ अंतर आ भी जाए तो ये सैनिक अगले कुछ वर्षों में सेना से रिटायर भी होंगे। ऐसे में उन पर निवेश से बेहतर है रोबोटिक्स में सेना के अनुरूप बदलाव।

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