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अंधविश्वास

दूल्हा-दुल्हन मना रहे थे सुहागरात, सांप ने दूल्हे को डंसा, तंत्र-मंत्र के चक्कर में हो गई मौत

Janjwar Desk
20 Jun 2020 6:00 PM GMT
दूल्हा-दुल्हन मना रहे थे सुहागरात, सांप ने दूल्हे को डंसा, तंत्र-मंत्र के चक्कर में हो गई मौत

बिहार के मधुबनी जिले में तंत्र-मंत्र के चक्कर में सुहागरात को ही दूल्हे की जान चली गई। अस्पताल की जगह तांत्रिक के पास ले गए,जबतक अस्पताल पहुंचते,देर हो चुकी थी...

जनज्वार ब्यूरो, पटना। 21वीं सदी में भी देश अंधविश्वास से जकड़ा हुआ है। देश में नित्य ही अंधविश्वास के नए मामले सामने आते रहते हैं। खासकर बिहार जैसे शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े राज्य में किसी न किसी जिले में प्रायः ही ऐसी घटनाएं हो जातीं हैं, जिनसे इस वैज्ञानिक युग में भी हमारी पोंगापंथी सोच सामने आ जाती है।

ताजा मामला बिहार के मधुबनी जिले का है। यहां के हरलाखी थाना क्षेत्र के सुखवासी गांव के युवक को सांप ने काट लिया। परिजन और ग्रामीण उसे अस्पताल ले जाने की जगह पहले तांत्रिक के पास लेकर चले गए। काफी समय तक झाड़-फूंक का दौर चलता रहा। इससे न कोई लाभ होना था, न हुआ। पर इस चक्कर में युवक की स्थिति जरूर बिगड़ गई।

सुखवासी गांव के नीतीश कुमार की शादी बीते बुधवार की रात बासोपट्टी थाना क्षेत्र के मढिया गांव निवासी जोगिंदर राय की पुत्री के साथ हर्षोल्लास के माहौल में संपन्न हुई थी। शुक्रवार को उसकी सुहागरात थी और दूल्हा-दुल्हन अपने कमरे में सोए हुए थे। इसी बीच किसी विषैले सर्प ने युवक को डंस लिया। ग्रामीणों का कहना है कि सांप बहुत जहरीला था, इसलिए उसके बचने की उम्मीद कम थी।

ग्रामीणों ने बताया कि परिजन और ग्रामीण उसे एक तांत्रिक के पास लेकर चले गए। तांत्रिक ने काफी देर तक तंत्र-मंत्र किया। लेकिन जब स्थिति ज्यादा बिगड़ने लगी तो ग्रामीण उसे अस्पताल लेकर भागे। उसे बासोपट्टी PHC ले जाया गया पर उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे मधुबनी सदर अस्पताल रेफर कर दिया। मधुबनी सदर अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बाद दुबारा उसे तांत्रिक के पास ले जाया गया पर कोई लाभ नहीं हुआ।

महज दो दिन पूर्व ब्याही गई उसकी पत्नी विधवा हो गई। जिस घर से दो दिन पूर्व अरमानों के साथ उसकी बारात निकली थी,उसी घर से उसकी अर्थी निकली। ग्रामीणों का कहना है कि सांप विषैला था,इसलिए उसके बचने की उम्मीद कम थी। अब सवाल यह उठता है कि अंधविश्वास के चक्कर में अगर तांत्रिक के पास न ले जाकर उसे सीधे अस्पताल ले जाया जाता तो क्या उसे बचाए जाने की उम्मीद ज्यादा नहीं होती। आखिर देश के लीग कबतक अंधविश्वास, जादू-टोना,तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक के चक्कर में यूं ही जान गंवाते रहेंगे।

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