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बिहार के संस्कृत महाविद्यालयों में नियुक्ति में आरक्षण से लेकर साक्षात्कार तक में भ्रष्टाचार

Janjwar Desk
3 Aug 2021 12:08 PM GMT
बिहार के संस्कृत महाविद्यालयों में नियुक्ति में आरक्षण से लेकर साक्षात्कार तक में भ्रष्टाचार
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(कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा से संबद्ध महाविद्यालयों में कर्मियों के चयन में नियमों की अनदेखी आम बात है)

बिहार युवक कांग्रेस के उपाध्यक्ष मनजीत आनंद साहू कहते हैं कि सरकार लाख दावा कर ले लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन भर्तियों में न तो आरक्षण का पालन किया जा रहा है और न ही कोरोना प्रोटोकाल का...

जितेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट

जनज्वार। बिहार में शिक्षक से लेकर शिक्षणेतर कर्मियों तक की नियुक्ति में मनमानी को लेकर अभ्यर्थियों में आक्रोश है। इनका मानना है कि संस्कृत महाविद्यालयों में नियुक्ति के दौरान भर्ती को लेकर सरकार द्वारा जारी किए गए गाइडलाइन का कहीं भी पालन नहीं किया जाता है। ऐसे भर्तियों को मनमाने तरीके से अंजाम देने के लिए एक पूरा रैकेट सक्रिय है।

यहां हम बात कर रहे हैं कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय दरभंगा से संबद्ध महाविद्यालयों में भर्ती पर।यहां कर्मियों के चयन में नियमों की अनदेखी आम बात है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक भर्ती के दौरान इन्हें न तो यूजीसी के निर्देशों से कोई वास्ता रहता है और न ही राज्य सरकार के दिशा निर्देशों का। यहां सब कानून खूद तय किये जाते हैं और पालन भी अपने मनमाफिक तरीके से किए जाते हैं। इस दौरान निर्धारित प्रावधान के अनुसार आरक्षण का अनुपालन नहीं हो रहा। साथ ही साक्षात्कार को लेकर जारी गाइडलाइन को भी सिरे से खारिज की जा रही है।

इस तरह की शिकायतों पर नजर दौड़ाऐं तो चर्चा में बने अमी लाल बबुआ संस्कृत उपशास्त्री कालेज खारा बुथाम मधेपुरा प्रमुख है।यहां नियुक्ति के दो वर्ष पूर्व विज्ञप्ति निकाली गई।बिहार युवक कांग्रेस के उपाध्यक्ष मनजीत आनंद साहू कहते हैं कि विज्ञापन संख्या 01/2019 के तहत प्रधानाचार्य,शिक्षक, लिपिक व चतुर्थश्रेणी कर्मी के लिए स्वीकृत व रिक्त पदों पर भर्ती हेतु आवेदन आमंत्रित किया गया। जिसके तहत आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 20 अक्टूबर तय की गई। जिसकी साक्षात्कार अभी संपन्न हुआ है।कुल सात पदों के लिए आवेदन आमंत्रित करने के बाद साक्षात्कार के लिए बुलावा पत्र आरक्षित वर्ग के आवेदकों को दिया ही नहीं गया।


शासी निकाय के सचिव व विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डा श्रीपति त्रिपाठी के हस्ताक्षर से 11 मार्च को साक्षात्कार के लिए 20 आवेदकों को पत्र जारी किया गया। सास बात यह रही कि साक्षात्कार स्थल अमी लाल बबुआ संस्कृत महाविद्यालय व विश्वविद्यालय कैंपस दरभंगा को न बनाकर पूर्णिया जिला मुख्यालय पर एक होटल को बनाया गया।यह साक्षात्कार भी उस समय आयोजित किया गया जब कोरोना प्रोटोकाल के अनुपालन के तहत शिक्षण संस्थाएं बद पडी थी तथा बिना प्रशासन की अनुमति के ऐसे आयोजन पर रोक लगे हुए थे।

उधर साक्षात्कार के दिन अचानक पूर्णिया जिला प्रशासन को इसकी भनक लगी तो वह कार्रवाई की हिदायत देते हुए होटल में किसाी भी तरह के आयोजन की स्थिति में वै धानिक कार्रवाई की चेतावनी जारी कर दी। इसके बाद भी साक्षात्कार स्थगित करने के बजाय जवाबदेह लोगों ने होटल से एक किलोमीटर दूर एक निजी मकान में साक्षात्कार संपन्न कराने का निर्णय लिया। साथ ही इसकी सूचना सभी अभ्यर्थियों को मोबाइल पर कॉल करके दे दी गई। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अभ्यर्थियों से इसकी जानकारी अन्य किसी को न दिए जाने की हिदायत भी दी।

जानकारों के मुताबिक इस तरह साक्षात्कार की पूरी औपचारिता ऐसे पूरी कर ली गई। अवकाश के दौरान साक्षात्कार के आयोजन पर सवाल उठाते हुए राजभवन तक शिकायत की गई। इसके बाद भी अब तक राजभवन के तरफ से न र्कोइ महाविद्यालय को पत्र आया और न ही कोई निर्देष ही प्राप्त हुए।साक्षात्कार में शामिल रहे एक अभ्यर्थी ने कहा कि विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मियों के आपसीमिलीभगत से यहां उनके रिश्तेदारों व करीबीयों की नियुक्ति करने की पूरी मंशा है।

इसके अलावा बेगुसराय के श्रीशंकर संस्कृत उप शास्त्री महाविद्यालय शाहपुर में भी भर्ती के दौरान आरक्षण के अनुपालन को लेकर संस्थान के मंशा पर सवाल उठाए जा रहे हैं।यहां विज्ञापन संख्या एसएसयूसी 001 /2021 के तहत शिक्षक व लिपिक पद के आवेदन जारी किए गए। इसके तहत 6 जुलाई तक आवेदन जमा करने को कहा गया। इसके बाद साक्षात्कार की तिथि 14 जुलाई तय की गई। यहां भी आरक्षण के मानकों की अनदेखी करने के आरोप लग रहे हैं।

बिहार युवक कांग्रेस के उपाध्यक्ष मनजीत आनंद साहू कहते हैं कि सरकार लाख दावा कर ले लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन भर्तियों में न तो आरक्षण का पालन किया जा रहा है और न ही कोरोना प्रोटोकाल का। अपने चहेतो की भर्ती के लिए संस्कृत महाविद्यालय मनमानी करने में लगा हैं। इसकी शिकायत शासन से लेकर राज्यपाल तक की गई हैं।दलित व पिछडों को उनके हक से वंचित करने की किसी भी प्रक्रिया का हम विरोध करते रहेंगे। साथ ही पालन कराने की मांग को लेकर हर संभव लडाई लडी जाएगी। जिससे की वाजिब लोगों की भर्ती हो सके। साथ ही संस्कृत महाविद्यालयों में मनमानी के खेल पर स्थाई रूप से रोक लग सके।


आरक्षण का अनुपालन न किए जाने के शिकायतों की होगी समीक्षा

कामेश्वर सिंह संस्कृत महाविद्यालय के कुलपति शशिनाथ झा ने कहा कि अमी लाल बबुआ संस्कत उपशास्त्री कालेज खारा बुथाम मधेपुरा में नियुक्ति में आरक्षण के अनुपालन न किए जाने की शिकायतों की समीक्षा की जाएगी। भर्ती में किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर कार्रवाई होगी। उन्होंने साक्षात्कार मधेपुरा आयोजित करने के बजाए पूर्णिया में किसी के निजी भवन होने की शिकायत पर अनभिज्ञता जताई।उन्होंने कहा कि इस संबंध में कोई शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी।

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