ग्राउंड रिपोर्ट

Ground Report : बाढ़ के बाद बदहाल मोदी के विवादित मंत्री अजय मिश्र टेनी के संसदीय क्षेत्र का नया गांव, दलित सिखों के घर कई दिनों से नहीं जला चूल्हा

Janjwar Desk
29 Oct 2021 8:39 AM GMT
Ground Report : बाढ़ के बाद बदहाल मोदी के विवादित मंत्री अजय मिश्र टेनी के संसदीय क्षेत्र का नया गांव, दलित सिखों के घर कई दिनों से नहीं जला चूल्हा
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लोगों के पास न रहने को ठीक से छत है और न ही खाने को दो वक्त की रोटी, सहायता के नाम पर अफसर मुंह दिखाने जरूर आते हैं लेकिन सांत्वना देकर चले जाते हैं....

अजय प्रकाश की ग्राउंड रिपोर्ट

Lakhimpur Kheri। उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) अब किसी परिचय का मोहताज नहीं है। हाल ही में यह जगह खूब चर्चाओं में रही। हालांकि चर्चा में रहने का कारण बेहद दु:खद था। यहां के सांसद व केंद्रीय गृहराज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र ने प्रदर्शन कर रहे किसानों को कथित तौर पर अपनी एसयूवी से कुचल डाला था, जिसके बाद चार किसानों की मौत हो गई थी। इसके बाद हिंसा भड़की तो दो भाजपा कार्यकर्ता, एक वाहन चालक और एक पत्रकार की मौत हो गयी थी। इस पूरे मामले में कुल 9 लोगों की जान चली गई थी।

अजय मिश्र टेनी (Ajay Mishra Teny) के बेटे इस पूरे कांड में मुख्य आरोपी हैं। अजय मिश्र के इलाके में विकास के दावों की क्या असल हकीकत है, इसकी पड़ताल करने के लिए 'जनज्वार' की टीम लखीमपुर के 'नया गांव' पहुंची।

घाघरा नदी के किनारे बसा यह गांव बाढ़ की चपेट में है। गांव में अधिकांश दलित, भूमिहीन, सिख समुदाय के लोग रहते हैं। खेती-किसानी करके यह लोग अपना गुजर-बसर करते हैं। नया गांव कई सालों से बाढ़ का कहर झेल रहा है। हर साल घाघरा नदी का पानी गांव में घुस आता है और लोगों की जिंदगी तबाह कर वापस चला जाता है। इस साल सितंबर-अक्टूबर में रिकॉर्ड स्तर पर हुई बारिश से घाघरा नदी उफान पर थी। नदी का पानी घरों के भीतर घुस गया। फिर बारिश का पानी तो वापस चला गया लेकिन अपने पीछे मलबे को छोड़ गया।

गांव के लोग बताते हैं कि वह पहले से ही बमुश्किल इन कच्चे घरों में जिंदगी गुजार रहे थे। अब मलबे ने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। तस्वीरों से आप यहां के हालातों को समझ सकते हैं। बाढ़ के कारण लोग घरों को छोड़कर चले गए थे। पानी जाने के बाद जब लोग घरों को लौटे तो सड़क से लेकर घरों तक मलबा भरा पड़ा था। गांववालों ने बताते हैं कि घरों में 10-15 फीट तक पानी भर गया था। घर में रखा सारा सामान सड़ रहा है।

'नया गांव' में अब लोगों के पास न रहने को ठीक से छत है और न ही खाने को दो वक्त की रोटी। सहायता के नाम पर अफसर मुंह दिखाने जरूर आते हैं लेकिन सांत्वना देकर चले जाते हैं। लोगों को कोई मदद नहीं मिल रही है जिसके चलते गांव के लिए किसी तरह अपनी जिंदगी काट रहे हैं।

गांव की एक महिला अपने घर के अंदर के हालात को दिखाते हुए बताती हैं कि घाघरा का पानी मेरे घर में 5 -5 फीट तक भर गया था जिससे घर का सारा सामान पानी में बह गया। गाय मवेशी भी बह गए हैं। जो सामान बच गया था वो सारा भीग गया है। घर में अनाज रखा था वो भी भीग गया है। आप खुद ही देखिए पूरे घर में मिट्टी पड़ी है और पेटी में रखे सारे कपड़े भी भीग गए हैं। इस मलबे से लोग बीमार पड़ रहे हैं। हमारा तो सब कुछ बर्बाद हो गया है। अगर कहीं कुछ जमीन मिल जाती तो रहने के लिए घर बना लेते लेकिन यहां तो सरकार की तरफ से कोई पूछने तक नहीं आया।

महिला आगे बताती हैं कि 4 -5 दिनों से घर में खाना नहीं बना है। घर में कोई जगह ही नहीं बची है जहां चूल्हा लगाकर खाना पकाया जा सके। चारों तरफ मलबा ही मलबा फैला है। गुरद्वारे से जो खाना आ रहा है, 4 -5 दिन से हम वही खा रहे हैं। इसके अलावा और कोई मदद नहीं मिल रही है।

गांव के एक युवक ने घर के बाहर अपने पसारे गेहूं की ओर इशारा करते हुए कहा, 'देखो हमारा सारा गेहूं भीगने से खराब हो गया है। अब कुछ नहीं बचा है। युवक ने बताया कि गांव में कई लोगो के मवेशी बाढ़ में बह गए हैं। बहुत से लोगो के घर भी गिर गए हैं। गांव में कोई देखने के लिए नहीं आता, हमारे लिए कोई कुछ नहीं करता। गांव का प्रधान भी कुछ नहीं कर रहा है।'

दलित सिख समुदाय से ताल्लुक रखने वाली एक महिला बताती हैं, 'यहां 15 साल से लगातार बाढ़ आ रही है, इससे हम बहुत दुखी और परेशान हैं। हम इतने दिक्क्त में है पर यहां कोई मामूली सुविधा तक नहीं मिल रही है। यहां पर हमारा कोई देखभाल करने वाला नहीं है। जैसे-तैसे गुजारा कर रहे हैं। हम सरकार से आग्रह करते हैं कि वो किसी और जगह मजमा (मुआवजा ) दे दे, पूरे गांव को यहां से निकाले। घाघरा नदी का पानी बहुत तेजी से कटान कर रहा है, नदी गांव के एकदम पास आ गई है। लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

'जनज्वार' ने जब पूछा कि ग्राम प्रधान, विधायक, सांसद कुछ मदद नहीं करते?, इस पर महिला का कहना था कि हमें कोई कुछ मदद नहीं करता है। कोई भी गांव में नहीं आया? एक दो दिन पहले एक एसडीएम गांव आया था।

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