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राष्ट्रीय

Assam News : क्या असम पुलिस की कार्रवाई से परेशान ग्वालपाड़ा के ग्रामीणों ने खुद ही ध्वस्त कर दिया मदरसा?

Janjwar Desk
8 Sept 2022 2:17 PM IST
Assam News : क्या असम पुलिस की कार्रवाई से परेशान ग्वालपाड़ा के ग्रामीणों ने खुद ही ध्वस्त कर दिया मदरसा?
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Assam News : क्या असम पुलिस की कार्रवाई से परेशान ग्वालपाड़ा के ग्रामीणों ने खुद ही ध्वस्त कर दिया मदरसा?

Assam News : असम के ग्वालपाड़ा जिले के अलगा गांव ( Alga Villagers ) के लोगों का कहना है कि हम तो कम पढ़े लिखे और और मजदूरी करने वाले ग्रामीण हैं। पुलिस को आतंकी गतिविधियों से लिंक वाले मदरसों ( Terrorist link mosque ) के खिलाफ कार्रवाई करनी है करे, पर निर्दोष ग्रामीणों को परेशान न करे।

Assam News : असम के हिमंता बिस्व सरमा सरकार की ओर से पिछले कुछ समय से कथित तौर पर जिहादी गतिविधियों से जुड़े मदरसों ( terrorist link mosque ) के खिलाफ कार्रवाई से वहां के ग्रामीण काफी परेशान हैं। ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों की शिकायत ये है कि उन्हें क्या पता कि कौन और किस मदरसे ( madarsa ) का इमाम या मौलवी व टीचर का लिंक आतंकी संगठनों से है। हम तो कम पढ़े लिखे और और मजदूरी करने वाले ग्रामीण हैं। पुलिस को आतंकी गतिविधियों से लिंक वाले मदरसों के खिलाफ कार्रवाई करनी है करे, पर निर्दोष ग्रामीणों को परेशान न करे। इसके बावजूद पुलिसिया कर्रवाई से परेशान लोग खुद ही मदरसा ध्वस्त करने लगे हैं।

ऐसा ही एक मामला असम ग्वालपाड़ा ( Gwalpara ) जिले के पाखिउरा चर इलाके के अलगा गांव ( Alga village ) से सामने आया है। असम पुलिस ( Assam Police ) ने इस बात का दावा किया हैं। बीबीसी की एक ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक ग्वालपाड़ा ज़िले के पाखिउरा चर इलाके के दरगाह अलगा गांव में 6 जुलाई को स्थानीय लोगों ने जिहादी गतिविधियों के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए जाने के विरोध में एक मदरसे और उससे सटे घर को खुद ही ध्वस्त कर दिया।



दरअसल, असम पुलिस ( Assam Police ) ने पिछले महीने 20 अगस्त को जिहादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में माटिया थाना अंतर्गत टिलापारा नतुन मस्जिद के इमाम जलालुद्दीन शेख को गिरफ़्तार किया था। ग्वालपाड़ा पुलिस का दावा है कि जलालुद्दीन ने दरगाह अलगा गांव के मदरसे ( Madarsa ) में दो फरार बांग्लादेशी नागरिकों को शिक्षक के पद पर रखा था। पुलिस के मुताबिक अमीनुल इस्लाम और जहांगीर आलम नामक दोनों संदिग्ध बांग्लादेशी लोग चरमपंथी संगठन अंसारुल्लाह बांग्ला टीम ( ABT ) के सदस्य थे। दोनों मदरसे से सटे एक टीन और बांस से बने कच्चे मकान में रहते थे। जब उन दोनों संदिग्धों के बारे में छानबीन शुरू हुई तो वे वहां से फरार हो गए। फिलहाल, असम पुलिस ने जलालुद्दीन के साथ उस मामले में मोरनोई थाना क्षेत्र के तिनकुनिया शांतिपुर मस्जिद के इमाम अब्दुस सुभान को भी गिरफ़्तार किया है। इससे पहले यानि 27 जुलाई को पुलिस ने दरगाह अलगा गांव के 22 साल के अब्बास अली को एबीटी के एक सदस्य को अपने घर पर आश्रय देने के आरोप में गिरफ़्तार किया था। अब्बास अली पर उस संदिग्ध बांग्लादेशी को एक सिम कार्ड और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने के भी आरोप लगे हैं।

अलगा के ग्रामीण पुलिसिया पूछताछ से परेशान

असम ( Assam ) में जब से दरगाह अलगा गांव ( Alga Village ) के मदरसे ( Madarsa ) में पुलिस को जिहादी लिंक ( Terror link mosque ) सुराग मिला है उस समय से गांव के कई लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। इस गांव के कुछ लोगों का कहना है कि मदरसे में दो संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक को पकड़ने को लेकर जब से पुलिस कार्रवाई कर रही है गांव वाले बहुत परेशान हैं। पाखिउरा चर इलाके में बसे नदी के बीच का रेतीला इलाका है। इस गांव की आबादी करीब 500 है, जहां सौ फीसदी बंगाली मूल के मुसलमान बसे हुए हैं। ग्वालपाड़ा शहर से इस गांव तक पहुंचने के लिए नदी पार करनी पड़ती है। दरगाह अलगा गांव से ताल्लुक रखने वाले एक शख्स ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब से गांव के मदरसे में जिहादी गतिविधियों के आरोप लगे हैं और कुछ लोगों की गिरफ्तारी हुई है उस समय से यहां के लोग काफी परेशान हैं।

यह चर इलाके में बसा एक बहुत छोटा सा गांव है। यहां लोग इतने पढ़े-लिखे नहीं हैं। अधिकांश लोग दिहाड़ी मजदूरी और किसानी का काम कर अपना गुजारा करते हैं। इसलिए किसी ने भी नहीं सोचा कि मदरसे में पढ़ाने वाले लोगों का किसी जिहादी संगठन से संबंध होगा। या फिर वो लोग बांग्लादेशी नागरिक हैं। जब उनकी पहचान का मामला सामने आया तो वे फरार हो गए। इसके बाद से गांव के लोगों से पूछताछ हो रही है। एक दर्जन से अधिक लोगों से पुलिस पूछताछ कर चुकी है। यही वजह है कि गांव के लोग न केवल खौफ में हैं बल्कि उनमें असंतोष भी गहराता जा रहा है। पूछताछ से परेशान होकर ही गांव के लोगों ने हाल ही में आपस में एक बैठक कर खुद ही इस मदरसे को तोड़ने का फैसला किया। इस तरह गांव के लोगों ने 6 जुलाई को मदरसे के साथ बने उस कच्चे मकान और रसोई को ध्वस्त कर दिया जिसमें वो दोनों संदिग्ध नागरिक रहते थे।

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