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दिल्ली

रक्षा सौदों में दलाली के आरोप में समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जेटली को चार साल की जेल

Janjwar Desk
30 July 2020 12:19 PM GMT
रक्षा सौदों में दलाली के आरोप में समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जेटली को चार साल की जेल
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सजा के बावजूद जया जेटली फिलहाल जेल जाने से इस वजह से बच गईं हैं क्योंकि उन्होंने हाइकोर्ट में फैसले के तुरंत बाद अपील कर दी, जहां से इस पर फिलहाल रोक लग गई है...

जनज्वार। रक्षा सौदों में दलाली के आरोप में समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जेटली को चार साल की जेल रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार के आरोप में समता पार्टी की पूर्व अध्यक्ष जया जेटली को गुरुवार को दिल्ली की एक अदालत ने चार साल की जेल की सजा सुनायी। यह सजा सुनाए जाने के बाद जया जेटली ने दिल्ली हाइकोर्ट में इसके खिलाफ अपील दायर की है। वाजपेयी शासन के दौरान साल 2000 में रक्षा सौदे के बिचैलियों से तत्कालीन रक्षामंत्री जार्ज फर्नांडीज के घर पर जया जेटली की बातचीत व पैसों के लेन-देन के मामले की सीबीआइ की विशेष अदालत में बुधवार को सुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो हो गई थी। उसके बाद आज सजा का एलान किया गया।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने जया जेटली को इस मामले में गुरुवार को शाम पांच बजे तक तिहाड़ जेल प्रशासन के सामने सरेंडर करने का वक्त दिया था, लेकिन उनके द्वारा हाइकोर्ट में अपील के बाद निचली अदालत द्वारा दी गगई सजा को स्थगित कर दिया गया। इस कारण फिलहाल जया जेटली जेल जाने से बच गईं।

सीबीआइ की विशेष अदालत के जज वीरेंदर भट्ट ने जया जेटली, उनकी ही पार्टी के पूर्व सहयोगी गोपाल पचेरवाल और रिटायर्ड सैन्य अधिकारी मेजर जनरल एसपी मुरगई को भ्रष्टाचार के आरोप में आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया था।

आपराधिक मामले में किसी दोषी को तीन साल या उससे अधिक की सजा होेने पर तुरंत जेल भेजने का प्रावधान है, लेकिन जया जेटली ने फिलहाल हाइकोर्ट से राहत पा ली। अगर तीन साल से कम की सजा होने पर निचली अदालत के सामने अगर दोषी जमानत अर्जी दाखिल करता है तो उसे स्वीकार या अस्वीकार किया जा सकता है।

क्या है मामला?

जया जेटली वाजपेयी शासन में रक्षामंत्री रहे जार्ज फर्नांडीज की करीबी थीं। उन पर उस समय आरोप लगा था कि सेना को थर्मल इमेजर की आपूर्ति करने के लिए संदिग्ध कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में आए पत्रकारों से अभियुक्तों ने रिश्वत स्वीकार की थी। यह बैठक जार्ज के सरकारी आवास पर हुई थीं। दरअसल, यह पत्रकारों का एक स्टींग आॅपरेशन था, जिसे आपॅरेशन वेस्ट इंड नाम दिया गया था।

रक्षा कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में मिले मैथ्यू सैमुअल एक पत्रकार थे और एक वेब पोर्टल से संबंधित थे। आरेाप था संदिग्ध कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में आए पत्रकारों से अभियुक्तों ने रिश्वत स्वीकार की। इस मामले में जया जेटली, तत्कालीन मेजर जनरल एसपी मुरगई, गोपाल के परेरवाल और सुरेंद्र कुमार सुरेखा का नाम आया और उन्हें आरोपी बनाया गया। सीबीआइ ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और 2006 में जेटली व अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। इस आरोप में कहा गया था कि जया जेटली ने 2000-01 में मुरगई, सुरेखा और पचेरवाल के साथ आपराधिक साजिश रची और खुद व किसी अन्य व्यक्ति के लए दो लाख रुपये रिश्वत ली।

यह रकम काल्पनिक फर्म मेसर्स वेस्टेंड इंटरनेशनल लंदन के प्रतिनिधि मैथ्यू सैमुअल से ली गई थी। उन्होंने कुछ रक्षा उपकरणों के लिए रक्षा मंत्रालय से आर्डर हासिल करने के लिए यह सब किया।

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