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लेबर राइट एक्टिविस्ट शिव कुमार के पिता का आरोप, जेल में मेरे बेटे को मारा-पीटा, उसके तीन नाखूनों को उखाड़ा

Janjwar Desk
5 March 2021 9:12 AM GMT
लेबर राइट एक्टिविस्ट शिव कुमार के पिता का आरोप, जेल में मेरे बेटे को मारा-पीटा, उसके तीन नाखूनों को उखाड़ा
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[ चंडीगढ़ के अस्पताल में शिव कुमार, फोटो : जनज्वार डॉट कॉम ]

शिव कुमार के पिता राजवीर कुमार (55 वर्षीय) बताते हैं कि 'मेरा बेटा फिलहाल अस्पताल में है उसका चेकअप चल रहा है। जेल में उसे बहुत मारा पीटा गया। उसके तीन नाखूनों को उखाड़ दिया गया है। शरीर के दो जगह में फ्रैक्चर आए हैं और कई जगहों पर चोट के निशान भी हैं।

जनज्वार ब्यूरो। लेबर राइट एक्टिविस्ट शिव कुमार (24 वर्षीय) को हरियाणा पुलिस ने 4 मार्च को रिहा कर दिया है। कुमार पर तीन मामलों के खिलाफ मामला दर्ज था और इसी के तहत उसे सिंघु बॉर्डर से गिरफ्तार किया था। उन पर धारा 148, 149, 323, 384 और 506 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। ये धाराएं दंगा भड़काने और डराने धमकाने से जुड़ी हैं। इसके अलावा 12 जनवरी को उनपर हत्या के प्रयास, दंगे और अन्य मामलों में एफ़आईआर दर्ज की गई। तीसरा केस भी उसी दिन कुंडली पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।

लगभग 50 दिन तक जेल में रहने के बाद शिव कुमार को सोनीपत कोर्ट से जमानत मिल गई है। रिहाई के वक्त नवदीप कौर भी मोके पर मौजूद थी। जमानत मिलने से पहले शिव कुमार को कई चोटें आई हैं और साथ ही पैरों की तीन उंगलियों के नाखून उखड़े हुए है और हाथ और पैर में दो फ्रैक्चर भी आए हैं। जेल से रिहा होने के बाद कुमार को पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़ में चेकअप के लिए लाया गया है। शिव कुमार ने पुलिस पर यह आरोप लगाए थे कि उसे बहुत मारा पीटा गया और जातिसूचक गालियां भी दी गई।

इस पूरे मामले पर शिव कुमार के पिता राजवीर कुमार (55 वर्षीय) बताते हैं कि 'मेरा बेटा फिलहाल अस्पताल में है उसका चेकअप चल रहा है। जेल में उसे बहुत मारा पीटा गया। उसके तीन नाखूनों को उखाड़ दिया गया है। शरीर के दो जगह में फ्रैक्चर आए हैं और कई जगहों पर चोट के निशान भी हैं। हालांकि मुझे खुशी है कि बेटा रिहा हो गया।' जीएमसीएच अस्पताल में पिता समेत कई दोस्त मौजूद हैं और कुमार का इंतजार कर रहे हैं।

पिता आगे कहते हैं कि मेरे बेटे को फंसाया गया गया है कि कैसे उसने किसानों के हक में आवाज उठाई। उसने किसान आंदोलन के समर्थन में मजदूर भाईयों के साथ मिलकर किसानों के लिए आवाज उठाई इसीलिए उसपर इतने गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

शिव कुमार के दोस्त जसमिंदर टिंकू (26 वर्षीय) ने 'जनज्वार' से बातचीत में कहा कि कुमार को जेल में बहुत प्रताड़ित किया गया। उसे जातिसूचक गालियां भी दी गईं। पुलिस के कई अधिकरियों ने कहा कि चXX होकर तू नेता बनेगा। यह बहुत ही डरावना सा लगता है कि आज भी दलित होना कितना बड़ा गुनाह है। जसमिंदर बताते हैं कि कुछ ही देर में कुमार को अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। कुमार दलित हैं इसीलिए उसे इतना मारा पीटा गया। उसे ऐसे मारा गया जैसे कि वो कोई बड़ा गुंडा है।

जसमिंदर ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब 20 फरवरी को कुमार मेडिकल के लिए चंड़ीगढ़ आया था तब भी कुछ पुलिसवाले उसे धमकी दे रहे थे कि तुझे फिर से रिमांड में लेगे। इस पूरे मामले में दलित नेता उदित राज ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी खत्म हो रही है। बीजेपी का जो रामराज्य है उसमें विरोध का स्थान नहीं है। शिव कुमार के साथ जो कुछ भी हो रहा है उसके तीन कारण हैं। किसान आंदोलन का समर्थन करना एक कारण है, दलित होना दूसरा कारण है और मजदूरों की लड़ाई लड़ना तीसरा कारण है। तीनों कारणों की वजह से उसको यह सजा मिली है। तमाम लोग जेल में सड़ रहे हैं। जो सरकार के खिलाफ जाएगा उसके कंप्यूटर में फर्जी तरीके से गलत जानकारियां डाल दी जाएंगी और फिर उन्हें जेल में डाल दिया जाएगा।

अपने विरोधियों के खिलाफ ED का गलत प्रयोग कर रही सरकार

दलितों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार पर पूर्व आईपीएस वी.एन.राय कहते हैं कि यह क्रिमिनल एक्टिविटी है। जिन्होंने यह किया है उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। शिव कुमार पर चल रहा मामला अलग है और उसे जेल में प्रताड़ित किया गया है यह अलग केस है। जातिसूचक बातें कही गई है तो मेरा ख्याल है कि इसके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। मामला चड़ीगढ हाईकोर्ट के संज्ञान में भी है। जब 16 जनवरी को कुमार को अरेस्ट किया गया था तब वह बिलकुल ठीक-ठाक था और जमानत से पहले ही उसके शरीर में इतनी चोटें.. तो लाजमी है।

मानाविधिकार कार्यकर्ता राहुल कपूर कहते हैं कि जिस तरह से लेबर एक्टिविस्ट शिव कुमार को जेल में टार्चर किया गया है वो बेहद शर्मनाक है। केन्द्र सरकार और जिन राज्यों में बीजेपी की सरकार है वो जितने भी नौजवान आंदोलनकारी हैं उनको लगातार जेल में डाल देती है। उनको गलत तरीके से फंसाकर उनपर देशद्रोह के चार्ज लगा देती है। चड़ीगढ हॉस्पिटल ने भी अपनी रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि कुमार के साथ कस्टोडियल टॉर्चर हुआ है। अब यह इंटरनेशनल इश्यू बन रहा है। नवदीप कौर के लिए कमला हैरिस ने भी ट्वीट किया था। इस पूरे मामले पर नेशनल ह्यूमन राइट कमिशन को जांच करनी चाहिए ताकि बेकसूरों को इंसाफ मिल सके। इस पूरे मामले पर जो भी पुलिस वाले और नेता जिम्मेदार है उनपर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।

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