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मध्य प्रदेश

इंदौर में 87 साल के कोरोना मरीज के शव को चूहे ने कुतरा, एक लाख देने के बाद परिजनों को सौंपी लाश

Janjwar Desk
21 Sep 2020 1:41 PM GMT
इंदौर में 87 साल के कोरोना मरीज के शव को चूहे ने कुतरा, एक लाख देने के बाद परिजनों को सौंपी लाश
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इतवारिया बाजार के रहने वाले नवीन चंद जैन को सांस लेने में तकलीफ होने पर 17 सितंबर को यूनीक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। परिजन के अनुसार, बुजुर्ग का कोविड वार्ड में इलाज चल रहा था। रविवार रात करीब 3 बजे उनकी मौत की सूचना दी गई

जनज्वार। इंदौर में कोरोना काल के दौरान अस्पताल से मानवता को शर्मसार करने वाली ख़बर सामने आई है। इंदौर के अन्नपूर्णा इलाके में स्थित यूनीक अस्पताल में तीन दिन पहले भर्ती हुए 87 साल के बुजुर्ग की रविवार 20 सितंबर की देर रात मौत हो जाने के बाद मृतक के पूरी बॉडी को चूहों द्वारा कुतर देने का मामला सामने आया है।

मृतक के परिजनों ने अस्पताल में शव को लापरवाही से रखने का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि मृत्यु होने के बाद भी अस्पताल ने हमें शव नहीं दिया क्योंकि एक लाख रुपए का बिल बना था, जिसके बाद परिजनों को शव दिया गया।

इतवारिया बाजार के रहने वाले नवीन चंद जैन को सांस लेने में तकलीफ होने पर 17 सितंबर को यूनीक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। परिजनों के अनुसार, बुजुर्ग का कोविड वार्ड में इलाज चल रहा था। रविवार 20 सितंबर की रात करीब 3 बजे उनकी मौत की सूचना दी गई। कहा गया कि निगम की गाड़ी उन्हें अंतिम संस्कार के लिए लेकर जाएगी। जब हम दोपहर 12 बजे अस्पताल पहुंचे तो हमने देखा कि शव को जगह-जगह चूहों ने कुतर रखा है। हमने प्रबंधन से बात की तो उनका कहना था कि हमसे गलती हो गई।

इस घटना पर मृतक नवीन के परिजनों का कहना था कि 'जब हम लोग अस्पताल पहुंचे तो हमें एक लाख से ज्यादा का बिल थमा दिया गया। बिल जमा करने के बाद शव दिया गया। लेकिन जब हम लोगों ने शव को देखा तो हमारे होश उड़ गए। चेहरे और पैर में गंभीर घाव थे। अस्पताल प्रबंधन ने शव को कहीं ऐसी जगह पटक दिया था, जहां चूहों ने कुतर दिया। आंख पर गंभीर घाव हो गया था।' आक्रोशित परिजन ने शव अस्पताल के बाहर रखकर हंगामा किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने मामले को संभाला

परिजन के अनुसार, अस्पताल वालों ने भर्ती करने के बाद हमें मिलने नहीं दिया। रविवार शाम 4 बजे फोन पर बात हुई तो वे अच्छे से बात कर रहे थे। रात साढ़े 8 बजे अस्पताल वालों ने हमें बुलाया और हालत गंभीर बताते हुए हमसे कागज पर साइन करवा लिए। देर रात साढ़े 3 बजे हमें बताया कि उनकी मौत हो गई। यदि वे कह देते तो हम रात में ही शव लेकर चले जाते। अस्पताल वालों ने इस तरह से बॉडी क्यों छोड़ा? हमारे साथ अन्याय हुआ है।

इस घटना पर अन्नपूर्णा पुलिस स्टेशन से डीआई सतीश दिवेद्री ने जनज्वार को बताया, बुजुर्ग को 17 सितंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद 20 सितंबर को मौत हो जाने के बाद उनकी लाश को शवगृह में रख दिया गया था, जहां पर चूहों ने लाश को कुतर दिया। प्रशासन द्वारा अस्पताल के खिलाफ शिकायत कर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।

इससे पहले भी मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महाराज यशवंत राव हॉस्पिटल में लापरवाहियां का मामला सामने आया था। जहां 54 साल के तानाजी की 10 दिन पहले मौत हो जाने के कारण परिजनों को किसी तरह की सूचना नहीं दी गई थी।

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