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Oxygen Shortage Deaths : हूँ.. हूँ करती एंबुलेंस और चीख-पुकार के अलावा कुछ दिखाई-सुनाई नहीं दे रहा था- गलत बोल रहे मंत्रीजी

Janjwar Desk
18 Dec 2021 8:49 AM GMT
Oxygen Shortage Deaths : हूँ.. हूँ करती एंबुलेंस और चीख-पुकार के अलावा कुछ दिखाई-सुनाई नहीं दे रहा था- गलत बोल रहे मंत्रीजी
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Oxygen Shortage Deaths : उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा कि ऑक्सीजन की कमी से कोरोना काल में किसी की मौत नहीं हुई है...

मनीष दुबे की रिपोर्ट

Oxygen Shortage Deaths : उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह (UP Health Minister Jai Pratap Singh) का एक लिखित बयान आने के बाद कोरोना काल (Covid 19) मे मरे लोगों पर बहस ताजा हो गई है। अपने बयान में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 'कोविड के दौरान ऑक्सीजन की कमी (Oxyzen Crisis) से एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है।' मंत्री के इस बयान के बाद एक बार फिर 'जनज्वार' ने लोगों की प्रतिक्रियाएं जानी तो लोगों ने कई तरह की टिप्पणियां व्यक्त कीं।

पेट्रोल पंप में नौकरी करने वाले शिव प्रताप सिंह हमसे बताते हैं कि कोरोना महामारी (Covid 19 Panedemic) के दौरान जब लॉकडाउन (Lockdown) लगा था तो वह समय मैं अपने जीवन मे कभी नहीं भूल सकता। सड़क पर हूँ..हूँ करती एंबुलेंस की आवाजों के अलावा कुछ सुनाई नहीं देता था। एक एक दिन में हम लोग सिर्फ चौराहे से निकलती सैकड़ों लाशें गिनते रहते थे। लॉकडाउन लग गया था, इक्का दुक्का ग्राहक आते थे।

अस्पतालों के बाहर, श्मशान घाटों के बाहर सिर्फ मरने और जलने वालों की कतारें दिखती थीं। कोई अपनी मां के लिए, कोई अपने बाप के लिए रो रहा। कितनों के तो जवान लड़के लड़कियां निपट गए इस कोरोना काल के दौरान। स्वास्थ्य मंत्री जो कह रहे वह बिल्कुल सफेद झूठ बोल रहे। मेरी आँखों के सामने कितने ही लोग ऑक्सीजन की किल्लत से मरे हैं।

इसी पेट्रोल पंप के मैनेजर विनीत सचान ने हमें बताया कि स्वास्थ्य मंत्री जी का जो बयान सामने आया है वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। वह जिस जिम्मेदार पद पर बैठे हैं, उन्हें कम से कम इस तरह की बात बिल्कुल भी शोभा नहीं देती है। मेरे ही पेट्रोल पंप में काम करने वाले एक कर्मचारी ने सिर्फ इस बात के लिए ही दम तोड़ दिया क्योंकि उसे वक्त रहते ऑक्सीजन नहीं मिल पाई थी। और इस बात का सिर्फ मैं ही नहीं 50 लोग गवाह हैं, जिन्हें मैं खड़ा कर पुछवा सकता हूँ।

वरिष्ठ पत्रकार सुशील दुबे ने 'जनज्वार' से बात करते हुए कहा कि, अब क्या कहूँ मंत्री हैं वो। चुनकर आये हैं, और सबसे बड़ी बात ये है कि योगी ने मंत्री बनाया है। कैसे ये लोग इस तरह की बात कह जाते हैं और उससे पहले यह कि आखिर ये लोग सोच भी कैसे लेते हैं, इस तरह की बातें। समझ में नहीं आता कि डोज ज्यादा हो जाता है या कुछ और। अरे मंत्रीजी को सोचना चाहिए कहीं और मुंह दिखाना है या नहीं दिखाना है। उनका जो बयान आया है वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और मैं ऑक्सीजन की कमी से मरने वाले लोगों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।


बिल्हौर विधानसभा के पूर्व प्रभारी और बसपा नेता विनय कुमार गौतम कहते हैं, इस तरह का बयान बहुत ही निंदनीय है, बल्कि बहुत ज्यादा खेदपूर्ण है। यह सिर्फ और सिर्फ भाजपा वाले ही कह भी सकते हैं। लाशों के ढेर लगे थे। इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ जब लाशों को जलाने के लिए श्मशान घाटों के बाहर टोकन सिस्टम तक चालू हो गया था। ऑक्सीजन के लिए लोग भटक रहे थे। खुद भाजपा के कई विधायक ऑक्सीजन के लिए भटक रहे थे। मंत्रीजी को वह समय भूलना नहीं चाहिए।

यह बिल्कुल सच है कि कोरोना के दौरान लोग ऑक्सीजन की किल्लत में बहुत अधिक संख्या में मरे हैं। खुद जनज्वार संवाददाता ने अस्पतालों और श्मशान घाटों के भीतर तक जाकर ग्राउंड रिपोर्टें की थीं। उस दौरान जलती चिताओं और आंखों से बहते आंसुओं के अलावा कुछ नजर नहीं आ रहा था। एक एक बेड में दो दो मरीजों का इलाज किया जा रहा था। ऑक्सीजन की कालाबाजारी और किल्लत से जूझते लोग अपने अपनों को खो रहे थे।

यहां तक की सोशल मीडिया तक में ऑक्सीजन की उपलब्धता के लिए लोग मैसेज दर मैसेज कर रहे थे। सरकार या सरकार का एक भी नुमाइंदा उस दौरान नजर नहीं आ रहा था। ऑक्सीजन केंद्रों पर अफसरों को बैठना पड़ा था। ऐसे में योगी सरकार के स्वास्थ्य मंत्री जी प्रताप सिंह का इस तरह का गैरजिम्मेदाराना बयान बेहद निंदा का विषय है।

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