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CM मनोहर लाल के विधानसभा क्षेत्र में किसानों के आगे घुटने पर आया प्रशासन, प्रदर्शनकारी तमाम बेरिकेड तोड़ लघु सचिवालय पहुंचे

Janjwar Desk
7 Sep 2021 3:07 PM GMT
CM मनोहर लाल के विधानसभा क्षेत्र में किसानों के आगे घुटने पर आया प्रशासन, प्रदर्शनकारी तमाम बेरिकेड तोड़ लघु सचिवालय पहुंचे
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आगे की रणनीति पर मनन के लिए किसान नेताओं ने बैठक शुरू की, तमाम बेरिकेड्स पुलिस के इंतजाम सभी को धत्ता बता प्रदर्शनकारी पहुंचे लघु सचिवालय....

मनोज ठाकुर की रिपोर्ट

जनज्वार ब्यूरो/करनाल। हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर के विधानसभा क्षेत्र करनाल में किसान महापंचायत में किसानों ने अपनी ताकत का अहसास कराया। किसानों की भीड़ के आगे प्रशासन के सारे इंतजाम बोने पड़ गए। किसान सभी बेरिकेड्स को तोड़ते हुए लघु सचिवालय पहुंच गए।

यहां किसान अब आगे की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। इधर प्रशासन भी आगे की रणनीति पर मनन करने में जुटा है। किसानों के लघु सचिवालय पर डटने के बाद करनाल में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

पिछले माह की 28 तारीख को करनाल के बसताड़ा टोल प्लाजा घरौंडा में पुलिस द्वारा किसानों पर किए गए लाठीचार्ज के विरोध में करनाल मंडी में महापंचायत का आयोजन किया गया था। महापंचायत में हरियाणा, पंजाब समेत दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में किसान महापंचायत में पहुचे।

किसानों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन बैकफुट आ गया। महापंचायत शुरू होते ही किसानों के शिष्टमंडल को बातचीत के लिए बुला लिया गया। इधर किसानों की मांग थी कि किसानों के सिर फोड़ने के आदेश देने वाले आईएएस अधिकारी आयुष सिन्हा के खिलाफ 302 का मामला दर्ज किया जाए। इस मांग को मानने के लिए प्रशासन ने इंकार कर दिया। तीन दोनो की बैठक के बाद भी जब कोई हल नहीं निकला तो किसानों ने लघु सचिवालय के घेराव के लिए मार्च का ऐलान कर दिया।

आक्रोशित किसान बैरीकेटस तोड़ते हुए लघु सचिवालय पर पहुंच गए। हालांकि जिला सचिवालय के पास पुलिस द्वारा किसानों को आगे बढऩे से रोकने के लिए पानी की बौछार की गई, इस दौरान कई किसान घायल हो गए।

संयुक्त किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी, योगेंद्र यादव सहित अन्य नेताओं के साथ जिला सचिवालय का घेराव करने निकल पड़े। किसानों के घेराव कूच को देख प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। हालांकि इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने किसान नेताओं से बातचीत का क्रम बनाए रखा। करनाल के नमस्ते चौक पर भारी पुलिस के दम पर प्रशासन आंदोलनकारी किसानों को काबू करने की कोशिश कर रहा था। इस दौरान एसपी निशांत यादव ने किसान नेताअों से बातचीत की। डीसी के आग्रह पर किसाना नेताअों ने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। नेताओं को गिरफ्तार होता देख कर कई किसानों को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर हरियाणा रोडवेज की बसों में बैठा लिया। इस बीच युवा किसान आक्रोशित हो गए ओर शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताने लगे। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने किसानों को समझाने की अपील की, लेकिन एक बार तो उनकी अपील का किसानों पर कोई असर दिखाई नहीं दिया। इस दौरान किसानों ओर पुलिस के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।

किसानों ने आक्रोशित होकर जिन बसों में किसानों को गिरफ्तार कर बैठाया गया था, उन बसों की बसों की हवा निकाल दी, कई किसान हाथ में झंडा थामे बसों पर थम गए। एक बार लगा कि पुलिस ओर किसानों के बीच टकराव होगा, बावजूद पुलिस प्रशासन ओर किसानों के बीच से टकराव की नौबत टल गई।

जिला सचिवालय के मेन गेट पर बैठ गए राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी

वाटर कैनन के प्रयोग के बाद भी किसान जिला सचिवालय तक पहुंचकर मेन गेट पर बैठकर नारेबाजी कर विरोध जताया। किसान नेताओं ने कहा कि प्रशासन ने किसानों को रोकने के लिए जो बाधाएं खड़ी की थी, उन्हें दूर करते हुए लघु सचिवालय तक पहुंच गए, जो किसानों की जीत है। हालांकि इस दौरान किसान नेता राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी, योगेंद्र यादव के बीच डीसी बीच में पहुंचकर बातचीत के लिए भी आए ताकि मामले को सुलझाया जा सके।

शहर को कर दिया था सील

प्रशासन ने किसानों के जिला सचिवालय के घेराव को देखते हुए पूरे शहर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया था। 40 कंपनियां पैरामिलिट्री फोर्स की तैनात की गई थी, जगह-जगह नाकाबंदी की गई थी, जिला सचिवालय ओर नई अनाजमंडी की ओर आने जाने वाले रास्तों पर भारी वाहन खड़े कर दिए गए थे। जिससे शहरवासियों के अलावा अन्य लोगों को काफी परेशानियों का सामना पड़ा।

टिकैत का ट्वीट- लघु सचिवालय पहुंचे

वहीं किसान नेता टिकैत ने ट्वीट किया कि वह किसान साथियों के साथ लघु सचिवालय करनाल में पहुंच चुके हैं। पुलिस ने हिरासत में जरूर लिया था, लेकिन युवाओं के जोश के आगे पुलिस को छोडऩा पड़ा। किसान साथियों के साथ सचिवालय पर उपस्थित हूं। लड़ाई जारी रहेगी।

इससे पहले अनाज मंडी के मंच से किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल के जिला सचिवालय घेराव के ऐलान के बाद किसानों ने कूच किया। राजेवाल ने मंच से ऐलान किया था कि किसान पहले मार्च निकालेंगे और फिर जिला सचिवालय का घेराव करेंगे। सभी किसान नेताओं ने अनाज मंडी में मंच पर जाने से पहले एक दुकान में मीटिंग की और घेराव का फैसला लिया। मीटिंग के बाद किसान नेता महापंचायत के मंच पर पहुंचे।

दो दौर की वार्ता के बाद भी बाहर आ गए थे सारे किसान नेता

इससे पहले दो दौर की वार्ता के बाद चढूनी-टिकैत समेत 11 सदस्य उठकर कुछ देर के लिए बाहर आए थे। बाहर आकर किसान नेताओं ने कहा था कि - जो हम मांग रहे वह प्रशासन नहीं दे रहा और जो प्रशासन दे रहा वह हम नहीं ले रहे। पहली वार्ता के बाद भी एक ब्रेक भी लिया गया था। दूसरे दौर की वार्ता के बाद भी जब बात नहीं बनी तो सभी किसान नेता उठकर बाहर आ गए। हालांकि कुछ ही देर बाद प्रशासन ने किसान नेताओं को तीसरे दौर की वार्ता के लिए भीतर बुला लिया। अब तीसरे दौर की वार्ता भी विफल हो गई है।

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