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पंजाब : पहले बेटे पर झूठा मामला दर्ज किया, छोड़ने के बदले विधवा का रेप किया, जांच के लिए SIT बनी तो वह भी हुई रद्द

Janjwar Desk
27 May 2021 11:10 AM GMT
पंजाब : पहले बेटे पर झूठा मामला दर्ज किया, छोड़ने के बदले विधवा का रेप किया, जांच के लिए SIT बनी तो वह भी हुई रद्द
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(कारोबारी ने उसे बेटी बनाकर अपने जाल में फंसाया था और उसके पिता की हत्या की धमकी देकर गलत काम करने के लिए उसे मजबूर कर रहा था)

पीड़िता ने बताया एएसआई गुरविंदर सिंह उसके साथ संबंध बनाना चाहता था, इसके लिए वह लगातार उस पर दबाव बनाता था....

मनोज ठाकुर की रिपोर्ट

जनज्वार ब्यूरो, चंडीगढ़। पुलिस किस तरह से अपने मुलाजिमों को बचाने की कोशिश करती है। इसका एक उदाहरण पंजाब में देखने को मिला। मामला बठिंडा का है। यहां पुलिस पर आरोप है कि पहले तो पुलिस के एक एएसआई ने एक युवक को फर्जी मामले में नामजद कर लिया।

आरोप है कि फिर उस युवक को छोड़ने के लिए उसकी विधवा मां से दुष्कर्म किया। मामला उठा तो यहां के जांच के लिए बठिंडा के एसएसपी ने जो एसआईटी गठित की, इस टीम में एक भी महिला पुलिस जांच अधिकारी को शामिल नहीं किया।

पीड़िता इसके खिलाफ हरियाणा और पंजाब हाईकोर्ट पहुंची, यहां उसने याचिका दायर कर जांच टीम पर सवाल उठाया। पीड़िता की याचिका पर संज्ञान लेते हुए पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय ने जांच टीम को रद्द करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही एक नई जांच टीम गठित करने के आदेश भी दिए। इसमें महिला जांच अधिकारियों को शामिल करने का आदेश भी कोर्ट ने दिया।

कोर्ट के आदेश के बाद अब नई जांच टीम बनाई गई है। इसमें एडीजीपी गुरप्रीत कौर, मुक्तसर की एसएसपी सुधीरविजी और डीएसपी प्रभजोत कौर को शामिल किया गया है।

कोर्ट ने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

पीड़िता ने कोर्ट में बताया कि एएसआई गुरविंदर सिंह उसके साथ संबंध बनाना चाहता था। इसके लिए वह लगातार उस पर दबाव बनाता था। जब वह इसमें कामयाब नहीं हुआ तो उसने उसके 20 साल के बेटे नशा तस्करी का आरोप लगाते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।

बेटे को जब पुलिस ने पकड़ लिया तो वह परेशान हो गई। तब एएसआई ने उससे संबंध बनाने और दो लाख रुपए की मांग की। पीड़िता ने बताया कि उसने एक लाख रुपए तो दे भी दिए।

इसके बाद एक दिन एएसआई जबरदस्ती उसके घर घुसकर दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं एएसआई कई बार उसके घर आया। इस पर महिला ने ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी।

एएसआई जब अगली बार महिला के घर आया तो ग्रामीणों ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। उसकी वीडियो बनाई। इसके साथ ही पुलिस को मामले की जानकारी दी गई। पुलिस ने तब एएसआई को गिरफ्तार कर लिया था।

बठिंडा पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि यह मामला जैसे ही सामने आया तो तुरंत ही आरोपी एएसआई को बर्खास्त कर दिया था। मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम गठित की गई थी। इसमें तब एसपी हेडक्वार्टर सुरिंदर पाल सिह, डीएसपी परमजीत सिंह और थाना कैंट के एसएचओ एसआई गुरमीत सिंह को शामिल किया गया था।

प्रवक्ता ने बताया कि लेकिन पीड़िता को इस जांच टीम से आपत्ति थी, इसलिए वह कोर्ट में चली गई। अब नई जांच टीम गठित कर दी गई है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार आगे की कार्यवाही की जाएगी।

पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय की एडवोकेट व महिला कार्यकर्ता एडवोकेट आरती ने बताया कि पंजाब पुलिस जो कार्यवाही कर रही थी, वह दिखावा भर थी। रेप पीड़िता के मामले की जांच के लिए गठित कमेटी में एक भी महिला जांच अधिकारी शामिल न हो, तो इस कमेटी का तुक ही क्या है? क्या पीड़िता कमेटी के पुरुष जांच अधिकारियों के सामने अपनी बात आसानी से रख सकती है।

इसलिए पहली ही नजर में यह लग रहा है कि पुलिस कार्यवाही का दिखावा भर कर रही थी। जांच के नाम पर बाद में आरोपी एएसआई का बचाव किया जा सके। महिला ने इस बाबत कई बार पुलिस के उच्च अधिकारियों से इस बाबत संपर्क किया, लेकिन जब उसकी बात नहीं सुनी गई तो उसे मजबूरी में पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय में आना पड़ा।

पंजाब महिला आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में महिला उत्पीड़न के 30 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए गए है। इसमें यौन उत्पीड़न के मामलों की संख्या ज्यादा है।

एडवोकेट आरती ने बताया कि दिक्कत यह है कि पुलिस महिला यौन उत्पीड़न के मामलों पर लीपापोती करती नजर आती है। इससे पहले मार्च माह में भी हरियाणा और पंजाब उच्च न्यायालय में एक मामला आया था, उसमें एक सहायक प्रोफेसर ने याचिका लगा कर पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के दो प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न के मामले की जांच का आदेश जारी करने की अपील की थी।

इस मामले में पीड़िता ने कहा था था कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने की कमेटी तो बनी है, इस कमेटी के सामने उसका केस है। लेकिन कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। उसने कमेटी के सामने 21 मार्च 2018 को शिकायत दी थी। लेकिन दो साल होने को आ गए, इस मामले में आगे कुछ नहीं हुआ। आरती ने बताया कि पीड़िता तब थक हार कर इस साल मार्च में हाईकोर्ट आई थी।

इससे यह पता चल रहा कि महिला यौन उत्पीड़न पर सिस्टम किस तरह से काम कर रहा है। आरती ने बताया कि बठिंडा में विधवा से रेप मामले में यह भी जांच होनी चाहिए कि क्यों अधिकारियों ने इस तरह की कमेटी गठित की जिसमें एक भी महिला जांच अधिकारी शामिल नहीं है।

क्योंकि इससे जांच कमेटी गठित करने वाली अथॉरिटी की मानसिकता भी पता चलता है। उनकी भी कोशिश ऐसे मामलों पर उचित कार्यवाही करने की बजाय लीपापोती की रहती है। यह भी एक वजह है कि महिलाएं यौन उत्पीड़न पर खुल कर बोलने से बचती है। इसका फायदा भी अपराधिक मानसिकता वाले खूब उठाते हैं।

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