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Sonepat News : खट्टर सरकार के राज में सोशल एक्टिविस्ट को 2 साल बाद भी नहीं मिली पुलिस प्रताड़ना से मुक्ति, HHRC आखिरी उम्मीद

Janjwar Desk
8 Jan 2022 9:13 AM GMT
Sonepat News : खट्टर सरकार के राज में सोशल एक्टिविस्ट को 2 साल बाद भी नहीं मिली पुलिस प्रताड़ना से मुक्ति, HHRC आखिरी उम्मीद
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सोनीपत पुलिस के उत्पीड़न का शिकार सोशल एक्टिविस्ट विमल किशोर। 

पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के चहेते हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर कहने को तो प्रदेश में रामराज का दावा करते हैं, लेकिन पुलि​सिया कामकाज का तरीका अमानवीय है। आलम यह है कि पुलिस प्रताड़ना के शिकार सोशल एक्टिविस्ट विमल किशोर आज भी बेड रेस्ट पर हैं और आये दिन पुलिस उनके दरवाजे पर दस्तक देकर परेशान करने का कोई भी मौका नहीं चूकती।

सोनीपत। हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ( CM Manohar Lal Khattar ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के चहेते हैं। वह अपने प्रदेश में रामराज होने का दावा करते हैं, लेकिन पुलि​सिया कामकाज का तरीका अमानवीय है। आलम यह है कि पुलिस प्रताड़ना के शिकार सोशल एक्टिविस्ट विमल किशोर ( Social Activist Vimal Kishore ) आज भी बेड रेस्ट पर हैं। उनकी समाजसेवा सोनीपत पुलिस ( Sonipat Police ) को इतनी खली कि एक मामले दो साल बाद भी लोकल पुलिस, हेल्थ विभाग व स्थानीय प्रशासन के अधिकारी उन्हें प्रताड़ित ( Police torture ) करते रहते हैं। आये दिन पुलिस उनके दरवाजे पर दस्तक देकर परेशान करने का कोई भी मौका नहीं चूकती, जबकि वो बेड रेस्ट पर हैं और घर से निकलने की स्थिति में नहीं हैं।

दरअसल, विमल किशोर सोशल एक्टिविस्ट ( Social Activist Vimal Kishore ) हैं और आम आदमी पार्टी ( AAP ) के प्रदेश प्रवक्ता भी हैं। वह हर पल व्यवस्था से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए तैयार रहते हैं। परोपकार के एक ऐसे ही मामले के बाद से उनपर सोनीपत पुलिस ( Sonipat Police ) , सरकारी अस्पताल के डॉक्टर और अधिकारी और जिला प्रशासन के अधिकारियों की वक्र दृष्टि है। इस बात को लेकर वह डीएसपी, एसपी, आईजी, डीसी, हरियाणा के सीएम और कई अन्य जगहों पर न्याय पाने के लिए गुहार लगा चुके हैं। एसपी सोनीपत ने उन्हें साल 2020 में घटना के बाद केस को रद्द कराने का आश्वासन दिया था। उसके बाद से पुलिस प्रताड़ना से राहत मिली थी। लेकिन हाल ही में तत्कालीन एसपी जशनदीप सिंह रंधावा का ट्रांसफर होने के बाद से उनके पीछे सोनीपत पुलिस व अस्पताल के अधिकारी पीछे पड़ गए हैं। थाना पुलिस बार-बार नोटिस जारी कर उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी दे रही है। इस प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने हरियाणा मानवाधिकार आयोग ( HHRC ) से भी न्याय की गुहार लगाई है, पर उन्हें अभी तक कहीं से कोई राहत नहीं मिली है।

पीड़ित बुजुर्ग की मदद का सिला




दरअसल, इस मामले की शुरुआत अप्रैल, 2020 की एक घटना से होती है। स्थानीय पुलिस ने जयभगवान नाम के एक बुजुर्गा की बेरहमी से पिटाई की थी। इसके बाद सरकारी अस्पताल ने जांच कराने के लिए एंबुलेंस देने से इनकार कर दिया था। पीड़ित बुजुर्ग ने सोनीपत के मोहल्ला कलां निवासी सोशल एक्टिविस्ट से मदद की गुहार लगाई थी। सरकारी अस्पताल सोनीपत से जयभगवान ने फोन कर बताया था कि देवीलाल चौक पर पुलिस वालों ने मेरी डंडों से मारा पीटा है। लहूलुहान हालत में सरकारी अस्पताल पहुचां हूूं लेकिन अस्पताल में जांच के एंबुलेंस नहीं दे रहे हैं। इसके बाद विमल किशोर बुजुर्ग की सहायता के लिए के मौके पर पहुंच गए। पूछने पर बुजुर्ग ने बताया कि एक्सरे व हड्डियों का डॉक्टर न होने के कारण मुझे पीजीआई खानपुर रेफर कर दिया गया है। मैं दूसरे मरीज का इंतजार कर रहा हूं। एंबुलेंस वाले कह रहे हैं कि जब तक दूसरा मरीज नहीं आएगा खानपुर कला के लिए एक आदमी के लिए एंबुलेंस नहीं मिलेगी।

इस बात पर विमल किशोर को हैरानी हुई तो उन्होंने अपने मोबाईल से वीडियो बना लिया और एंबुलेंस कर्मचारी का बयान भी रिकॉर्ड कर लिया। डॉक्टर ने भी बताया था कि जब तक दूसरा मरीज नहीं आता हम एंबुलेंस नहीं भेज सकते। यह सारी बातें कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। जब डॉक्टर और एंबुलंस के कर्मचारियों को पता चला कि सारी बातें रिकॉर्ड हो गई तो उन्होंने तुरंत एंबुलेंस दे दी। वो जयभगवान को पीजीआई खानपुर लेकर चले गए जहां एक्स-रे करने उपरांत पता चला कि जय भगवान के बाएं हाथ की हड्डी टूटी हुई है। दोपहर तक इलाज करवा कर जय भगवान जी अपने घर चले गए।

पुलिस ने फर्जी केस में फंसाया

लेकिन विमल किशोर की परेशानी उसी समय से शुरू हो गई। उसी दिन गीता भवन पुलिस चौकी वाले विमल और पीड़ित जय भगवान को समझौते का दबाव डालने लगे। जब हमने समझौते के लिए मना कर दिया तो पुलिस वालों ने एक व्यक्ति से फोन करवाकर कहा यदि आपने समझौता न किया तो आपका चालान काट देंगे। झूठे मुकदमे दर्ज कर जेल में डाल देंगे जिसकी रिकॉर्डिंग विमल के पास हैं उसी दिन शाम को पीड़ित का 5000 का चालान भी पुलिस वालों ने कर दिया। पुलिस उत्पीड़न का सिलसिला यहीं नहीं थमा। थाना पुलिस ने सिविल अस्पताल की डॉक्टर मैडम की शिकायत पर मेरे खिलाफ FIR नम्बर 200 U/S 384/353/188/186 Dated 27-4-2020 PS civil line दर्ज कर ली। जबकि मैंने केवल उस गरीब बुजुर्ग की मदद की थी। कोई गैर कानूनी काम नही किया था। लेकिन ये बाद न तो पुलिस को और न ही अस्पताल को अच्छी लगी। स्थानीय प्रशासन के लोगों को खुंदक इस बात से भी है कि मैं लोगो की मदद करता रहता हूं और भ्रष्ट अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ आवाज उठाता रहता हूं।डीसी सोनीपत अंशज सिंह से इसकी शिकायत की थी।

भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर डीसी ने भी कराई FIR

इसके अलावा लॉकडाउन में पिछले काफी दिनों से सरकार के आदेशानुसार गरीबों को सुखा राशन न मिलने की आवाज उठाता रहा हूं। इसलिए उपायुक्त महोदय ने जातिगत दुश्मनी निकालते हुए सरकारी अस्पताल के डॉक्टर से मेरे खिलाफ झूठी शिकायत दिलवाकर मुकदमा दर्ज करवा दिया। इससे पहले भी डीसी अंशज सिंह ने नगर निगम के अधिकारी से फर्जी शिकायत दिलवाकर मुकदमा दर्ज करवा रखा है।

अभी तक नहीं मिली एफआईआर की कॉपी

इसके अलावा पुलिस ने जो मेरे खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है उसकी एफआईआर की कॉपी भी ऑनलाइन नहीं डाली गई है। न ही मुझे एफआईआर की कॉपी मुहैया कराई गई है। पुलिस ने ऐसा जान बूझकर किया है ताकि मैं अदालत में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी न लगा सकूं और वो मुझे जेल में डाल दें। पिछले दो साल से प्रशसन के इस रवैये से परेशान होकर मैंने नवनियुक्त्त पुलिस अधीक्षक से भी न्याय की गुहार लगाई है। साथ ही निष्पक्ष जांच करवाकर झूठे मुकदमे को रद्द करवाने की मांग की है। पीड़ित जय भगवान को पीटने वाले दोषी पुलिसकर्मियों, झूठी शिकायत देने वाली डॉक्टर व साजिश रचने वाले उपायुक्त महोदय के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही की मांग की है। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ( HHRC ) से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है।

SP रंधावा ने दिया था केस रद्द कराने का आश्वासन

बता दें कि जब तक सोनीपत के पुलिस अधीक्षक जशनदीप सिंह रंधावा रहे तब के थाना पुलिस ने मेरे खिलाफ कार्रवाई करने से बच रही थी, लेकिन उनका तबादला होते ही थाना पुलिस और अन्य अधिकारी मेरे खिलाफ साजिश रचने लगे हैं। वो लोग पुराने एफआईआर को लेकर मुझे गिरफ्तार करना चाहते हैं। पूर्व एसपी जशनदीप सिंह रंधावा ने मामले में गिरफ्तारी न होने और मामला रद्द करने का आश्वासन भी दिया था। पता नहीं क्यों डीएसपी रविंद्र जी ने मामला रद्द करने की कार्यवाही नहीं की। 2 वर्ष बाद एक बार फिर उसी मामले में पुलिस मेरे घर आई थी, जबकि मैं बेड रेस्ट पर हूं। मेरा इलाज चल रहा है। अवैध फाइनेंसरों के खिलाफ एक शिकायत के मामले में मुझपर जानलेवा हमला हुआ था। तब से यानि 14 माह से बेड पर उपचाराधीन हूं। चलने फिरने में असमर्थ हूं। इसके बावजूद मुझे परेशान किया जा रहा है। अब नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक राहुल शर्मा जी को व्हाट्सएप द्वारा शिकायत भेजकर न्याय की गुहार लगाई।

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