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उत्तर प्रदेश

Muzaffarnagar Riots 2013 : BJP विधायक समेत 11 दोषियों को सश्रम कारावास, करीब 50000 लोग हुए थे बेघर

Janjwar Desk
12 Oct 2022 7:53 AM IST
Muzaffarnagar Riots 2013 : BJP विधायक समेत 11 दोषियों को सश्रम कारावास, करीब 50000 लोग हुए थे बेघर
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Muzaffarnagar Riots 2013 : मुजफ्फरनगर दंगा मामले में भाजपा विधायक विक्रम सैनी ( BJP MLA Vikram Saini ) समेत 12 लोगों को दो साल के सश्रम कारावास के साथ 10 लाख रुपए का जुर्माना भी भरना होगा।

Muzaffarnagar Riots 2013 : उत्तर प्रदेश की मुजफ्फरनगर की एक अदालत ने नौ साल पुराने दंगा मामले में भारतीय जनता पार्टी के विधायक विक्रम सैनी ( BJP MLA Vikram Saini ) सहित 12 लोगों को 2013 के दंगों में सजा सुनाई है। सभी को दो साल के सश्रम कारावास के साथ 10 लाख रुपए का जुर्माना भी भरना होगा। अदालत ने 15 अन्य आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिए हैं।

मुजफ्फरनगर दंगा ( Muzaffarnagar riots ) मामले में सजा तीन साल से कम होने की वजह से भाजपा नेता विक्रम सैनी को अदालत ( MP-MLA Courts ) से जमानत भी मिल गई। दंगे की वजह से करीब 50 हजार लोगों को बेघर होना पड़ा था। इस दंगे की वजह से तत्कालीन अखिलेश यादव की सरकार की काफी किरकिरी हुई थी।

दरअसल, 27 अगस्त 2013 को जानसठ थाना क्षेत्र के गांव कवाल में एक छेड़खानी के मामले में मलिकपुरा निवासी ममेरे भाईयों सचिन और गौरव की हत्या के बाद 28 अगस्त को शाहनवाज की हत्या कर दी गई थी, जिससे गांव में तनाव फैल गया था। 28 अगस्त को सचिन और गौरव की अंत्येष्टि से लौटते वक्त लोगों ने कवाल में मारपीट और तोड़फोड़ की थी जिसके बाद कवाल में दोनों समुदाय के लोगों के बीच बहस हो गई थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। जबकि 15 लोग मौके से फरार हो गए थे।

मुजफ्फरनगर दंगे में भाजपा विधायक विक्रम सैनी समेत 12 को दो दो साल की सजा पर पीड़ितों के वकील अकरम अख्तर चौधरी ने जनज्वार से हुई बातचीत में कहा दोषियों को जो सजा दी गयी है, वह न्याय के नाम पर बड़ा और भद्दा मजाक है। भाजपा विधायक और अन्य को पहले तो मात्र 2 साल की सजा सुनाई गयी और उस पर भी तुरंत जमानत भी मंजूर कर ली गयी। इतने बड़े कत्लेआम और संप्रदाय विशेष के 50 हजार लोगों को बेघर करने की सजा के नाम पर यह मजाक नहीं तो क्या है।

थाना पुलिस ने खतौली से भाजपा के मौजूदा विधायक विक्रम सैनी को बलकटी के साथ पकड़ा था। इसके अलावा आरोपित धर्मवीर और सलेकचंद को बल्लम, रविन्द्र को फरसा और नूर मोहम्मद को तलवार के साथ तथा रोहताश, सोनू, दीपक, प्रवीण को डंडे आदि के साथ पकड़ा था। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में फारूख पर रायल से फायरिंग करना दिखाया था। कुल 24 लोगों को नामजद किया गया था।

चर्चित दंगा मामले में विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ( MP-MLA Court verdict ) ने सजा सुनाए जाने के बाद बीजेपी विधायक ( BJP MLA ) और अन्य दोषियों को 25-25 हजार रुपए के 2 मुचलकों पर रिहा कर दिया गया। जमानत मिलने से पहले इन सभी को कई घंटों तक न्यायिक हिरासत में रखा गया। जमानत मिलने के बाद अब वे अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे सकेंगे। भाजपा विधायक विक्रम सैनी तथा 26 अन्य के खिलाफ मुजफ्फरनगर दंगों की मुख्य वजह माने जाने वाले कवाल कांड मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। कवाल गांव में अगस्त 2013 में छेड़खानी के एक मामले में गौरव और सचिन तथा शाहनवाज नामक युवकों की हत्या हुई थी।

दंगों में मारे गए थे 60 से ज्यादा लोग

Muzaffarnagar Riots 2013 : मुजफ्फरनगर जिले के जानसठ थाना क्षेत्र में शुरुआती तीन हत्या की घटनाओं ने बाद में साम्प्रदायिक रंग ले लिया था। गौरव और सचिन का अंतिम संस्कार करके लौट रही भीड़ ने हिंसक रुख अख्तियार करते हुए कई मकानों को आग लगा दी थी। इस मामले में सैनी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्यवाही की गई थी। कवाल कांड के बाद सितंबर 2013 में मुजफ्फनगर और आसपास के कुछ जिलों में साम्प्रदायिक दंगे भड़क उठे थे, जिनमें कम से कम 60 लोग मारे गये थे और 50 हजार अन्य लोगों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा था।

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