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उत्तर प्रदेश

आरोपी शिक्षिका का खुलने लगा जालसाजी का खेल, अनामिका शुक्ला नहीं प्रिया है उसका असली नाम

Janjwar Team
6 Jun 2020 3:09 PM GMT
आरोपी शिक्षिका का खुलने लगा जालसाजी का खेल, अनामिका शुक्ला नहीं प्रिया है उसका असली नाम
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पकड़ी गई शिक्षिका के बारे में कासगंज पुलिस व अन्य सूत्रों से 'जनज्वार' को पता चला कि बीएसए की तहरीर के आधार पर केस दर्ज करके जिस युवती को गिरफ्तार किया गया, पुलिस पूछताछ में उसने अपना नाम प्रिया बताया।

जनज्वार ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक साथ 25 जिलों में तैनाती दिखाने वाली शिक्षिका अनामिका शुक्ला का रहस्य गहराता जा रहा है। कासगंज में पकड़ी गई महिला ने पुलिसिया पूछताछ में अपना नाम प्रिया बताया है। प्रिया यहां अनामिका शुक्ला के कागजों पर नौकरी कर रही थी। भ्र्ष्टाचार विरोधी सरकार के शिक्षा विभाग में इतनी बड़ी चूक हुई कैसे, फिलहाल यक्ष प्रश्न है। सुर्खियों में छाई अनामिका शुक्ला अपने फर्जीवाड़े से 13 ही महीनों में लगभग एक करोड़ रुपये का मानदेय भी ले चुकी है।

हस्यमई अध्यापिका ने सूबे में इतनी सुर्खियां बटोर ली हैं कि हर कोई जानना चाहता है कि आखिर अनामिका शुक्ला है कौन? फर्जी दस्तावेजों से कस्तूरबा विद्यालय में नौकरी करने वाली शिक्षिका को कासगंज पुलिस ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मामला भी दर्ज कर लिया है। लेकिन जब पुलिस ने उससे पूछताछ की तो चौंकाने वाली बात सामने आई।

कड़ी गई शिक्षिका के बारे में कासगंज पुलिस व अन्य सूत्रों के हवाले से 'जनज्वार' को पता चला कि बीएसए की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज करके जिस युवती को गिरफ्तार किया गया है, उसने पूछताछ में पुलिस को अपना नाम प्रिया बताया। उसके पिता का नाम महिपाल है। वो फर्रुखाबाद के लखनपुर की रहने वाली है। हालांकि प्रिया ने अनामिका शुक्ला के दस्तावेज पर नौकरी करने की बात कबूल की है।

स्तावेजों के मुताबिक अनामिका शुक्ला पुत्री सुभाष चंद्र शुक्ला निवासी लखनपुर जनपद फर्रुखाबाद कासगंज के फरीदपुर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में पूर्णकालिक विज्ञान विभाग में शिक्षिका के रूप में अगस्त 2018 से तैनात है। कई जिलों में तैनाती का मामला सामने आने के बाद शुक्रवार को बीएसए अंजली अग्रवाल ने शिक्षिका को व्हाट्सएप से नोटिस भेजकर प्रमाणपत्रों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए थे।

बीएसए की नोटिस मिलने के बाद शिक्षिका शनिवार को अपना त्यागपत्र लेकर बीएसए कार्यालय पहुंचीं थी। वहां खुद एक गाड़ी में बैठी रही तथा उसने अपने साथ आये पुरुष से त्यागपत्र भिजवा दिया। बीएसए अंजली अग्रवाल ने जब त्यागपत्र देने आए युवक से पूछताछ की तो उसने अनामिका के बाहर गाड़ी में बैठे होने की जानकारी दी। बीएसए के निर्देश पर विभागीय कर्मियों ने उसकी घेराबंदी कर ली। मौके पर पहुंची पुलिस ने शिक्षिका को गिरफ्तार कर लिया था।

बीते दिनों मानव संपदा पोर्टल की व्यवस्था लागू होने के बाद से कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में सभी शिक्षिकाओं का डाटा पोर्टल पर दर्ज किया गया। ऐसे में बागपत, प्रयागराज, मैनपुरी, आंबेडकरनगर समेत 25 जिलों में अनामिका शुक्ला नाम की शिक्षिका कार्यरत मिली। जिसके बाद प्रदेश के शिक्षा मंत्री के निर्देश पर शिक्षिका के खिलाफ केस दर्ज हुआ और ऐसे और मामलों की तलाश में पूरा महकमा अनुसंधान कर रहा है।

ताते चलें कि प्रदेश में कक्षा 6 से 8 तक कि जरूरतमंद बालिकाओं के लिए लगभग हर ब्लॉक में केजीबीवी संचालित है। इनमें बच्चियों की पढ़ाई के साथ आवास यानी हॉस्टल की भी व्यवस्था है। जिले में ऐसे विद्यालयों की संख्या लगभग 20 है। इन विद्यालयों में संविदा पर 30 हजार रुपये मानदेय पर शिक्षिकाओं की नियुक्ति होती है। इसी केजीबी विद्यालय में विज्ञान की शिक्षिका के रूप में 25 जनपदों में कार्यरत अनामिका शुक्ला के मिलने के बाद से बेसिक शिक्षा विभाग अलर्ट मोड़ पर आ गया है। शासन के निर्देश पर विभाग की ओर से अपने यहां केजीबीवी में कार्यरत शिक्षकों का रिकार्ड खंगाला जा रहा है। खासकर अनामिका शुक्ला नाम के लोगों पर विभाग का फोकस है।

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