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उत्तर प्रदेश

बिकरू डॉन विकास दुबे की पत्नी को मिल गयीं उसकी अस्थियां, मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए अभी करना होगा इंतजार

Janjwar Desk
18 Aug 2020 1:44 PM GMT
बिकरू डॉन विकास दुबे की पत्नी को मिल गयीं उसकी अस्थियां, मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए अभी करना होगा इंतजार
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2 जुलाई की रात को बिकरू गांव में विकास दुबे के घर दबिश देने पहुंची पुलिस की टीम पर घात लगाकर बैठे बदमाशों ने हमला कर दिया था जिसमें 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे, यूपी एसटीएफ ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए विकास दुबे को मार गिराया था....

कानपुर। बिकरू एनकाउंटर में मारे गए दहशतगर्द विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे सोमवार दोपहर बड़े बेटे आकाश दुबे व अधिवक्ता संग भैरव घाट पति की अस्थियां लेने पहुंची। इसके बाद वह मृत्यु प्रमाणपत्र लेने भैरवघाट स्थित नगर निगम के कार्यालय गईं, लेकिन थाने से वहां कोई कागजात न भेजने के चलते उन्हें बिना प्रमाणपत्र के ही लौटना पड़ा।

बता दें कि दो जुलाई की देर रात विकास दुबे ने साथियों संग मिलकर पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं। वारदात में सीओ बिल्हौर समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। एसटीएफ ने उसे 10 जुलाई को मुठभेड़ में मार गिराया था।

भैरवघाट विद्युत शवदाह गृह पर उसका अंतिम संस्कार करा दिया गया था। सोमवार दोपहर उसकी पत्नी रिचा दुबे ने अपने बड़े बेटे व अधिवक्ता ब्रह्मदेव प्रताप मौर्या, आलोक शर्मा संग भैरवघाट स्थित बिजली शव दाह गृह पहुंचकर विकास की अस्थियां लीं।

एलआईसी कार्यालय भी गई रिचा

सूत्रों के मुताबिक भैरवघाट से निकलते ही रिचा ने डीआईजी डॉ प्रीतिंदर सिंह को कॉल कर मिलने की इच्छा जाहिर की, लेकिन उनका फोन डीआईजी के पीआरओ ने उठाया और बाद में बात करने की बात कही। चार बार कॉल करने के बाद भी डीआईजी से कोई रिस्पांस न मिलने पर उन्हें लौटना पड़ा।

सूत्रों के अनुसार विकास ने अपने नाम से एलआईसी में कई जीवन बीमा पालिसी कराई थीं। उनकी जानकारी लेने के लिए वह एलआईसी कार्यालय भी गई।

ये है पूरा मामला

बता दें कि दो जुलाई की रात को बिकरू गांव में विकास दुबे के घर दबिश देने पहुंची पुलिस की टीम पर घात लगाकर बैठे बदमाशों ने हमला कर दिया था जिसमें सीओ देवेंद्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। यूपी एसटीएफ ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए विकास दुबे सहित उसके पांच साथियों को मुठभेड़ में मार गिराया था।

इसके बाद अब तक पुलिस इस मामले में 20 से अधिक लोगों को जेल भेज चुकी है। विकास के तीन साथी सरेंडर भी कर चुके हैं। वहीं इस घटना में शामिल कई बदमाश अभी तक फरार चल रहे हैं। जिन्हें ढूंढने के लिए बराबर यूपी एसटीएफ की कई टीमें लगी हुई हैं।

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