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तीन आदिवासी महिलाओं के लिए सिर्फ तीन गोलियां! क्या ऐसे होता है एनकाउंटर?

Prema Negi
7 Feb 2019 6:43 AM GMT
तीन आदिवासी महिलाओं के लिए सिर्फ तीन गोलियां! क्या ऐसे होता है एनकाउंटर?
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सुरक्षाबलों की गोली से मारी गई पोड़ियम सुक्की के चार बच्चे हैं, इसमें सबसे छोटा 3 महीने का नवजात है और अभी मां के दूध पर ही निर्भर था, जबकि बड़े बच्चे की उम्र 6 साल है...

सुशील मानव की रिपोर्ट

15 साल की हत्यारी रमनसिंह सरकार को छत्तीसगढ़ की जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता से बेदखल करके अपने लिए नई सरकार चुनी, मगर सरकार बदलने के बावजूद छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की तकदीर नहीं बदली। सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस कार्पोरेट की शॉर्प शूटर बनकर जंगल की सफाई के काम में लगी हुई हैं। आदिवासियों की साफ करना ही अब इनका मकसद हो जैसे।

हालिया घटनाक्रम में सुकमा जिले से 57 किमी दूर पोलमपल्ली थाना क्षेत्र के गोदेलगुड़ा का है, जहां शनिवार 2 फरवरी को लकड़ी लेने जंगल गई महिलाओं पर सुरक्षाबल के जवानों ने गोली मार दिया। गोलीबारी की आवाज सुनते ही महिलायें चिल्लाती रहीं कि हम नक्सली नहीं हैं, जंगल में लकड़ी लेने आई हैं। बावजूद इसके उन जवानों ने महिलाओं को गोली मार दी।

इस घटना में पोडिय़ामी सुक्की नामक एक महिला की मौत हो गई, वहीं दूसरी महिला कलमू देवे का उपचार जारी है। चश्मदीद पोडिय़ामी हूंगी के मुताबिक शनिवार 2 फरवरी की सुबह करीब पौने सात बजे पोडियामी सुक्की, पोडिय़ाम सुक्की व कलमू देवे गांव के पास जंगल लकड़ी लेने गई थी। गांव से कुछ दूर ही चली थी कि उन्हें जवानों की टुकड़ी नजर आई। जवानों को देखते ही हम गांव की ओर लौटने लगी। इस दौरान एक गोली की आवाज सुनते ही हम सब चिल्लाने लगे कि हम लकड़ी लेने आई हैं। हम पर गोली मत चलाओं। पर उन्होंने हमारी एक न सुनी। इसके बाद वो घायल कलमू देवे को लेकर गांव पहुंची और गांववालों को जानकारी दी।

सुकमा जिले से 57 किमी दूर पोलमपल्ली थाना क्षेत्र के गोदेलगुड़ा में सुरक्षाबलों की गोली से मारी गई पोडिय़म सुक्की के चार बच्चे हैं, इसमें सबसे छोटा 3 महीने का नवजात है और अभी मां के दूध पर ही निर्भर था, जबकि बड़े बच्चे की उम्र 6 साल है।

वहीं पूरे मामले पर मंत्री कवासी लखमा ने बयान जारी करते हुए कहा है कि मुझे इस घटना की जानकारी मिली थी। मैं लगातार वहां के नौजवानों से सम्पर्क कर रहा हूं। घटना के बाद जो भी मदद परिवार को दी जा सकती है, वो हम देंगे और पूरी घटना की निष्पक्ष जांच करवाएंगे। यदि इस घटना में कोई दोषी पाया जाता है तो उस पर भी कार्रवाई करवाई जाएगी।

पूरे मामले पर एसपी सुकमा जितेंद्र शुक्ला ने दुख जताया और वे भी मान रहे हैं कि मारी गई महिलाएं माओवादी नहीं ग्रामीण थीं, लेकिन वे साथ में यह भी कह रहे हैं कि महिलाओं को गोली मुठभेड़ में क्रास फायरिंग के दौरान लगी हैं। एसपी जितेंद्र शुक्ला ने कहा है कि इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले की न्यायिक जांच भी करवाई जा रही है। इसके अलावा मृतिका के परिजनों को 25 हजार और घायल महिला को 20 हजार रुपए की आर्थिक मदद तत्काल मुहैया कराई गई है।

जबकि घटना के दूसरे दिन आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता और आम आदमी पार्टी से जुड़ीं सोनी सोरी भी गोदेलगुड़ा पहुंचीं। सोनी सोरी ने पुलिस की क्रासफायरिंग थियरी की पोल खोल दी है। सोनी सोरी ने बताया कि ग्रामीणों से यही पता चला कि न तो ये माओवादी थे और न ही कोई मुठभेड़ हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि सिर्फ 3 ही गोली चली और दो महिला घायल हो गई थीं। मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए।

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