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शिक्षा

आधार को आधार बना दिल्ली के सरकारी स्कूल ने 7वीं के छात्र को नहीं दिया दाखिला

Prema Negi
6 April 2019 11:03 AM GMT
आधार को आधार बना दिल्ली के सरकारी स्कूल ने 7वीं के छात्र को नहीं दिया दाखिला
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दिल्ली सरकार के स्कूल ने परिजनों से कहा पहले आधार की जानकारियां करवाओ दुरुस्त फिर आओ बच्चे के एडमिशन के लिए, जबकि सुप्रीम कोर्ट दे चुका है आदेश, आधार नहीं है स्कूल एडमिशन के लिए जरूरी…

जनज्वार। एक तरफ भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) और सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ शब्दों में कह दिया है कि आधार कार्ड के अभाव में बच्चों को दाखिला देने से मना नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय भी दिया था कि स्कूल एडमिशन के लिए आधार जरूरी नहीं है और न ही बच्चों के स्कूल एडमिशन से आधार का कुछ लेना—देना है। मगर इन नियमों—मानकों को न सिर्फ प्राइवेट स्कूल, बल्कि सरकारी स्कूल भी धत्ता बता रहे हैं।

आधार के चलते राजधानी दिल्ली के एक सरकारी स्कूल ने बच्चे को दाखिला देने से मना कर दिया। जानकारी के मुताबिक 12 साल के प्रांजल ने गुड़गांव से छठी क्लास पास की है, मां—बाप के दिल्ली आने के बाद 7वीं में दाखिले के लिए दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित चंद्रशेखर आजाद ब्यावज सीनियर सेकेंडरी स्कूल में उसके दाखिले के लिए अप्लाई किया गया। शहर और घर बदलने के बाद मां बाप द्वारा प्रांजल के आधार कार्ड में भी दिल्ली की जानकारियां अपडेट कर दी जाती हैं, मगर स्कूल यह कहते हुए प्रांजल को एडमिशन देने से मना कर देता है कि आपके आधार कार्ड में आपके पिता का नाम नहीं लिखा है, और टीसी में लिखा है।

सवाल है कि जब सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि आधार एडमिशन के लिए अनिवार्य नहीं है तो एक सरकारी स्कूल बच्चे को आधार में तथ्यगत ग​लतियां बता दाखिला देने से मना कैसे कर सकता है। मान लेते हैं कि 12 साल के बच्चे के आधार में पिता का नाम नहीं लिखा है, तब भी दिल्ली सरकार का स्कूल दाखिला देने से मना कैसे कर सकता है।

प्रांजल की मां अनीता बेटे का दाखिला दिल्ली सरकार के स्कूल में न होने के बाबत बताती हैं, हम जब प्रांजल का दाखिला करवाने दिल्ली के चंद्रशेखर आजाद ब्यावज सीनियर सेकेंडरी स्कूल में गए तो कहा गया कि आधार में पता चेंज के दौरान गलतियां की है, इसलिए दाखिला नहीं हो सकता। पहले इन गलतियों को सुधारिये उसके बाद एडमिशन होगा। जबकि बच्चे के आधार पर प्रांजल कुमार ही लिखा हुआ वीडियो में साफ देखा जा सकता है।

जिस छात्र प्रांजल को दिल्ली के न्यू फ्रेंडस कॉलोनी के चंद्रशेखर आजाद ब्यावज सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने दाखिला देने से मना किया वह कहता है, मुझसे स्कूल में कहा गया कि आपके टीसी में कुछ और नाम है और आधार में कुछ और। क्योंकि टीसी की डिटेल से आधार की डिटेल थोड़ा अलग है इसलिए मुझे दाखिला देने से मना कर दिया गया। कहा गया कि पहले आधार ठीक करवाओ फिर एडमिशन लेने आओ। मुझे बुरा लग रहा है कि सभी बच्चे पढ़ने जाते हैं और मैं नहीं जा पा रहा।

है कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बावजूद कि आधार बच्चों के एडमिशन के लिए अनिवार्य नहीं है, एक सरकारी स्कूल का प्रबंधन ऐसा रुख कैसे अख्तियार कर सकता है। स्कूल के रुख को देखें तो लगता है कि यहां बिना आधार कार्ड किसी को भी एडमिशन नहीं मिलता होगा।

सुप्रीम कोर्ट के वकील अशोक अग्रवाल जिन्होंने प्रांजल को दिल्ली सरकार के स्कूल में एडमिशन न दिए जाने का मुद्दा उठाया है कहते हैं, यह सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का सरासर उल्लंघन है, जिसमें उसने कहा है कि किसी भी आधार किसी भी बच्चे के शिक्षा लेने के अधिकार के मार्ग में रोड़ा नहीं है, और न ही कोई स्कूल आधार के आधार पर दाखिला देने से मना कर सकता है।'

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