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मुंबई हाईकोर्ट के जज ने लिखी ऐसी चिट्ठी कि वह उत्तराखण्ड की अदालत में बन गई जनहित याचिका

Prema Negi
29 Jun 2019 1:14 PM GMT
मुंबई हाईकोर्ट के जज ने लिखी ऐसी चिट्ठी कि वह उत्तराखण्ड की अदालत में बन गई जनहित याचिका
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चारधाम यात्रा के एक महीने में ही यात्रा में आए 44 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। पहले ही महीने में इतने बड़े पैमाने पर होने वाली मौतों ने उत्तराखंड सरकार पर सवालिया निशान कर दिये हैं खड़े...

जेपी सिंह की रिपोर्ट

जनज्वार। उत्तराखंड के नैनीताल हाईकोर्ट ने चारधाम यात्रा पर आए बाम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति केआर श्रीराम के एक पत्र को गंभीरता से लिया है। अदालत ने न्यायमूर्ति के चारधाम यात्रा में व्याप्त अव्यवस्था को लेकर दिए पत्र को जनहित याचिका के तौर पर लिया है। इसमें मुख्य सचिव के साथ ही प्रमुख सचिव तीर्थाटन और मंदिर समिति को पक्षकार बनाते हुए सरकार सहित विपक्षियों से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की संयुक्त खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।

न्यायमूर्ति श्रीराम पिछले 22 मई से 1 जून तक चारधाम यात्रा पर रहे। हाईकोर्ट के उत्तराखंड के मेहमान के तौर पर उन्होंने अपने परिवार के साथ यह यात्रा पूरी की। न्यायमूर्ति श्रीराम इस दौरान दुश्वारियों से परेशान हुए। प्रदेश की खूबसूरती तो उनको भा गई, लेकिन यात्रा के दौरान सुविधाओं का नितांत अभाव उनको अखर गया।

यात्रा के दौरान उन्‍हें श्रद्धालुओं की पीड़ा समझ में आई। पैदल यात्रा के दौरान खाने, पीने, ठहरने और यहां तक की मेडिकल सुविधाओं का भी नितांत अभाव दिखा। इस संदर्भ में उन्‍होंने उत्‍तराखंड के नैनीताल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखकर अवगत कराया है। वहीं चीफ जस्टिस ने इस पत्र को जनहित याचिका में तब्‍दील कर प्रदेश सरकार से चार सप्‍ताह में जवाब पेश करने को कहा है।

चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन को 15 जून को लिखे अपने पांच पन्ने के पत्र में उन्होंने यमुनोत्री के हालत में सुधार के लिए तत्काल ध्यान देने की जरूरत बताई है। यहां की अव्यवस्थाओं का लंबा ब्यौरा देते हुए उन्होंने कहा कि यहां कभी भी आपदा की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने संकरे रास्ते और विश्राम के लिए कोई व्यवस्था नहीं होने के साथ ही पूरे मार्ग में कहीं भी पुलिस की मौजूदगी नहीं रहने का भी उल्लेख किया है, ताकि आपदा के समय उनका सहयोग लिया जा सके।

दरीनाथ-गंगोत्री और फाटा से केदारनाथ के बीच हेली सेवा में व्यवस्था को लेकर भी न्यायमूर्ति श्रीराम ने कई सुधार की जरूरत बताई है। न्यायमूर्ति श्रीराम ने कहा कि पहाड़ी व साल में अधिकतर बर्फ से ढके क्षेत्र में सुविधा के लिए अहम कार्य करने की चुनौती है, लेकिन प्राकृतिक कारण बताकर सरकार अपने दायित्व से नहीं बच सकती है। हालांकि जज ने चारधाम के लिए बन रही ऑलवेदर रोड की सराहना की है।

दालत ने मामले को जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई के लिए तय किया है। साथ ही प्रदेश के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव तीर्थाटन और श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ मंदिर समिति के सीईओ को पक्षकार बनाया है। वहीं पक्षकारों सहित सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

रअसल इस साल 7 मई को गंगोत्री, यमुनोत्री धाम के कपाट, 9 मई को केदारनाथ धाम के कपाट और 10 मई को बदरीनाथ धाम के कपाट खुले। लेकिन चुनावी दौर के कारण चारधाम यात्रा आधी अधूरी तैयारियों के बीच शुरू हो गयी। त्रिवेंद्र रावत की सरकार मानकर चल रही थी कि चुनावी दौर के कारण इस साल कम श्रद्धालु चारधाम की यात्रा पर आएंगे, लेकिन इस बार बड़ी संख्या में श्रद्धालु चार धाम यात्रा में उमड़ रहे हैं।

चारधाम यात्रा के एक महीने में ही इस यात्रा में आए 44 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। पहले ही महीने में 44 मौतें होने से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दम भरने वाले स्वास्थ्य विभाग पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

स बार रिकॉर्ड तोड़ संख्या में यात्री चारधाम आ रहे हैं, जिसमें सबसे ज्यादा बद्रीनाथ और केदारनाथ की ओर रुख कर रहे हैं। अमूमन बद्रीनाथ में यात्रियों की संख्या ज्यादा होती थी, पर इस बार केदारनाथ में बड़ी संख्या में लोग आए हैं। जहां बद्रीनाथ में एक महीने में पांच लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे हैं, वहीं केदारनाथ में भी इस बार यह आंकड़ा लगभग बराबर ही है।

यात्रा शुरू होने से पहले स्वास्थ्य विभाग ने यात्रियों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने की बात कही थी, लेकिन यात्रा की शुरुआत में ही दूर प्रदेशों से आए 44 लोगों की मौत हो चुकी है।

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