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सामाजिक कार्यकर्ता रंजना कुमारी लैंगिक नीति पर काम कर रहे 100 प्रभावशाली लोगों में शुमार

Prema Negi
31 May 2019 11:41 AM GMT
सामाजिक कार्यकर्ता रंजना कुमारी लैंगिक नीति पर काम कर रहे 100 प्रभावशाली लोगों में शुमार
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रंजना कुमारी ने कहा लैंगिक नीति में 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल होना मेरे लिए बेहद सम्मान की बात, यह सूची इस बात का प्रमाण कि दुनियाभर में हजारों लोग लैंगिक समानता के लिए कर रहे हैं अथक प्रयास, महिलाओं के लिए न्यायसंगत स्थान बनाने की दिशा में अभी भी बहुत कुछ किए जाने की है जरूरत....

जनज्वार। महिला अधिकार के क्षेत्र में कार्यरत संगठन सेंटर फ़ॉर सोशल रिसर्च की निदेशक डॉ. रंजना कुमारी को अपॉलिटिकल की दूसरी वार्षिक सूची में वर्ष 2019 के लिए लैंगिक नीति में 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किया गया है। इस सूची में उनके अलावा फुमज़िले म्लम्बो-न्गुका, कार्यकारी निदेशक, यूएन वुमन; रूथ बेडर-गिन्सबर्ग, अमेरिका सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश; कैरेन ग्रोन, विश्व बैंक समूह में लैंगिक विषयों के वरिष्ठ निदेशक; मिशेल बेचेलेट, मानवाधिकार के लिए उच्चायुक्त, संयुक्त राष्ट्र; मिशेल ओबामा, संस्थापक, ग्लोबल गर्ल्स एलायंस; बिनेटा डिओप, संस्थापक, फिम्मेस अफ्रीका सॉलिडेराईट; मरियम जलाबी, संस्थापक सदस्य, सीरियाई महिला राजनीतिक आंदोलन; एवं मार्गोट वालस्ट्रॉम, विदेश मंत्री, स्वीडन भी शामिल हैं।

विभिन्न देशों की सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और शैक्षणिक समुदायों की ओर से प्राप्त 9000 से अधिक नामांकनों के आधार पर इस सूची को तैयार किया गया, जिसमें यूएएन वुमन, वुमन डिलिवर, वुमन इन ग्लोबल हेल्थ, जी-7 जेंडर इक्वलिटी एडवाइजरी काउंसिल, हार्वर्ड और गेट्स फाउंडेशन शामिल थे।

पिछले वर्ष की सूची में जस्टिन ट्रूडेउ, कनाडा के प्रधानमंत्री; आइरिस बोनेट, हार्वर्ड बिहेव्यरल साइंटिस्ट; गैरी बार्कर, लैंगिक समानता में अधिकाधिक पुरुषों को शामिल करने के अग्रणी पक्ष समर्थक जैसे गणमान्य व्यक्ति शामिल थे। इसके अलावा विश्व बैंक, यूएएन वुमन और मलाला फंड एवं कई अन्य संगठन भी शामिल थे, जो पूरी दुनिया में समाचार की सुर्खियों में छाए हुए थे।

इस मौके पर सेंटर फ़ॉर सोशल रिसर्च की निदेशक रंजना कुमारी ने कहा कि, “लैंगिक नीति में 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल होना मेरे लिए बेहद सम्मान की बात है। मैं सभी विजेताओं और नामित व्यक्तियों को बधाई देती हूँ। अपॉलिटिकल की सूची इस बात का प्रमाण है कि पूरी दुनिया में हजारों लोग लैंगिक समानता के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। पूरी दुनिया में बहुत सारे अच्छे कार्य हो रहे हैं, तथा पूरे विश्व को महिलाओं के लिए न्यायसंगत स्थान बनाने की दिशा में अभी भी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है।”

अपॉलिटिकल की ओर से लैंगिक नीति पर काम करने वाले 100 सर्वाधिक प्रभावशाली लोगों की अधिष्ठापन सूची प्रकाशित की गई, जो पिछले वर्ष इस तरह की पहली वैश्विक पहल थी। यह पूरी दुनिया को नीति-निर्धारण, शोध कार्यों, लोकोपकार अथवा पक्षसमर्थन के माध्यम से अधिक न्यायसंगत जगह बनाने के कार्य में संलग्न महिलाओं और पुरुषों को सम्मानित करता है तथा उत्सव मनाता है।

यह सूची पूरी दुनिया के अग्रणी संगठनों के विभिन्न लैंगिक विशेषज्ञों द्वारा प्राप्त नामांकन पर आधारित थी, जिस का तुलनात्मक अध्ययन अपॉलिटिकल के अपने पत्रकारों और संपादकों के शोध के आधार पर किया गया। सूची में शामिल सभी व्यक्तियों एवं संगठनों को लैंगिक नीति के संदर्भ में सरकार, राजनीति, शैक्षणिक समुदाय, लोकोपकार, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, गैर सरकारी संगठनों एवं पक्षसमर्थकों के पथप्रदर्शी कार्यों के लिए सम्मानित किया गया है।

गौरतलब है कि रंजना कुमारी ने अपना जीवन दक्षिण एशियाई क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तिकरण को समर्पित किया है। उनकी स्कूली शिक्षा वाराणसी, उत्तर प्रदेश में हुई। उनके दादा, एक स्वतंत्रता सेनानी, पंडित विश्वनाथ शर्मा, वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विद्यापीठ के संस्थापक सदस्य थे, जो ब्रिटिश भारत में भारतीयों द्वारा संगठित पहला आधुनिक विश्वविद्यालय था। स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के उपरांत वह दिल्ली चली गईं तथा उन्होंने और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए, एम.फिल और पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।

वर्ष 1976 में रंजना कुमारी के घर के समीप एक महिला की दहेज के लिए हत्या की गई थी, और इस घटना के बाद ही उन्होंने समाज के वंचित पक्ष के लिए काम करने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने विश्व प्रसिद्ध प्रकाशन "ब्राइड्स आर नॉट फ़ॉर बर्निंग" के माध्यम से अपनी सक्रियता का प्रदर्शन किया। उन्होंने लैंगिक मुद्दों पर 8 अन्य पुस्तकों की रचना की है, जिन्हें आलोचकों की प्रशंसा मिली है।

रंजना कुमारी ने साउथ एशिया नेटवर्क अगेंस्ट ट्रैफिकिंग (SANAT) के समन्वयक के तौर पर कार्य किया है तथा वह "गर्भाधान-पूर्व एवं प्रसव-पूर्व नैदानिक परीक्षण अधिनियम, 2001", में केंद्रीय सलाहकार बोर्ड की सदस्य हैं, साथ ही वह महिलाओं एवं बच्चों की तस्करी की रोकथाम के लिए केंद्रीय सलाहकार समिति में भी शामिल हैं। उनके कुछ सर्वाधिक जोशपूर्ण अभियानों में लोकतंत्र और शासन में महिलाओं की भागीदारी, दहेज प्रथा एवं दहेज संबंधी हिंसा की समाप्ति, तथा कन्या भ्रूण हत्या का उन्मूलन शामिल है।

रंजना कुमारी ने महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण विधेयक को संसद में पारित करने के माध्यम से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का पक्षसमर्थन करते हुए पहल की शुरुआत की। वर्तमान में वह फेसबुक के वैश्विक सुरक्षा सलाहकार बोर्ड की सदस्य और ट्विटर की विश्वास एवं सुरक्षा परिषद की सदस्य भी हैं। वर्ष 2015 में, रंजना कुमारी को एशिया में महिलाओं एवं समाज की भलाई में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित लोटस लीडरशिप अवार्ड से सम्मानित किया गया।

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