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प्रिंटिग प्रेस मालिक करता था एग्जाम कंट्रोलर अंजू लता कटियार से मिलीभगत कर यूपीपीएससी के पेपर लीक

Prema Negi
30 May 2019 4:09 PM GMT
प्रिंटिग प्रेस मालिक करता था एग्जाम कंट्रोलर अंजू लता कटियार से मिलीभगत कर यूपीपीएससी के पेपर लीक
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यूपीपीएससी एग्जाम लीक कांड में वाराणसी क्राइम ब्रांच ने परीक्षा नियंत्रक अंजू लता कटियार को कर लिया है गिरफ्तार, कोलकाता के प्रिंटिंग प्रेस मालिक कौशिक कुमार से मिले सबूतों के आधार पर की गई है अंजू की गिरफ्तारी

जेपी सिंह की रिपोर्ट

जनज्वार। भर्ती विवादों से घिरे उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की एलटी ग्रेड परीक्षा के पेपर लीक करने के मामले में यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की टीम ने बड़ा खुलासा किया है। कोलकाता में पेपर छापने वाली प्रिटिंग प्रेस का मालिक ही पेपर लीक करने वाले गैंग का सरगना निकला है।

अब इसी कड़ी में लंबी पूछताछ के बाद पेपर लीक कांड से तार जुड़ने के सबूत मिलने पर वाराणसी क्राइम ब्रांच ने परीक्षा नियंत्रक अंजू लता को गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक अपनी अवैध कमाई का पांच फीसद कमीशन पेपर लीक कांड का मास्टरमाइंड यानी प्रिंटिंग प्रेस का ​मालिक कौशिक कुमार अंजू कटियार को देता था।

एसटीएफ ने वाराणसी के चोलापुर इलाके से मंगलवार 28 मई को प्रिटिंग प्रेस मालिक कोलकाता निवासी कौशिक कुमार को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से लैपटॉप, कुछ पेपर व कई लोगों के नाम-पते मिले हैं। एसटीएफ, चोलापुर पुलिस ने गोपनीय तरीके से कौशिक को विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में चौदह दिन के लिए जेल भेज दिया।

एसटीएफ ने जैसे ही कौशिक को गिरफ्तार करने के बाद उससे मिली जानकारी शासन तक पहुंचाई, हड़कंप मच गया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पूरे आपरेशन में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

इसके बाद प्रयागराज स्थित उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग मुख्यालय में मंगलवार 28 जून की आधी रात को पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। एलटी ग्रेड परीक्षा पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने वाराणसी पुलिस के साथ में छापा मारा। यहां लोकसेवा आयोग की तीसरी मंजिल पर एक अधिकारी के बेडरूम से लेकर अन्य कई कमरों की छानबीन की गई। यहां से कई दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। कार्रवाई देर रात तक चलती रही।

एसटीएफ की प्रयागराज यूनिट के अधिकारी भी यहां कार्रवाई में शामिल हुए। एलटी ग्रेड परीक्षा पेपर लीक मामले में लोक सेवा आयोग की परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार के मोबाइल, लैपटॉप से अहम साक्ष्य मिले हैं। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने उसे जब्त कर लिया है। अब अंजू कटियार की गिरफ्तारी की तैयारी चल रही है। 28 मई की देर रात आयोग मुख्यालय में छापा मारने के बाद एसटीएफ बुधवार 29 मई को दिन भर छानबीन करती रही। कई फाइल और दूसरे दस्तावेज भी सील किए गए हैं। रात में भी आयोग में एसटीएफ के अधिकारी जमे रहे।

पेपर लीक मामले में गिरफ्तार कौशिक कुमार ब्लेसिंग स्क्योर प्रेस प्राइवेट लिमिटेड का मालिक है। इस प्रिंटिंग प्रेस में सरकारी व गैरसरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों की गोपनीय छपाई होती है। सर्च वारंट लेकर आयोग पहुंची टीम ने परीक्षा नियंत्रक के कमरा, आलमारी समेत अन्य जगह की तलाशी ली। मोबाइल और लैपटॉप में कई साक्ष्य मिलने पर उसे कब्जे में लिया।

29 मई की सुबह टीम फिर आयोग पहुंची और अंजू से घंटों पूछताछ की। एसटीएफ का दावा है कि कई ऐसे सबूत मिले हैं, जिसके तहत गिरफ्तारी हो सकती है। कौशिक के पास से रुपये, आईडी कार्ड, एटीएम के अलावा एक बैग भी मिला, जिसमें आयोग की ओर से जारी सील प्रश्न पत्र दिया गया था।

मोबाइल की जांच में पता चला है कि परीक्षा नियंत्रक और मुख्य आरोपित कौशिक के बीच वाट्सएप पर बातचीत होती थी। आरोप है कि लीक पेपर 20 से 25 लाख रुपये में अपने सदस्यों के जरिए बेचता था। अपनी अवैध कमाई का पांच फीसद कमीशन अंजू कटियार को देता था।

हालांकि तलाशी के दौरान उनके कमरे से एसटीएफ को रकम नहीं मिली है, लेकिन प्रिंटिग प्रेस के मालिक कौशिक कुमार ने पुलिस को बताया कि यहां से पेपर लेकर अशोक देव चौधरी कोलकाता गया। वाराणसी में अन्य सहयोगी संजय, अजीत चौहान, अजय चौहान, प्रभुदयाल ने भी उसका सहयोग किया था। इनका पता रंजीत प्रसाद ही जानता है। रंजीत ने कौशिक को इस कार्य के लिए 50 लाख रुपये दिए थे। इसके साथ कई छात्रों के हाईस्कूल, इंटर के मूल अंकपत्र और प्रमाणपत्र शेष राशि के लिए बतौर गिरवी रखे गए थे।

कौशिक के अनुसार यूपीपीएससी की परीक्षा नियंत्रक/सचिव अंजू कटियार को कुल रकम का पांच प्रतिशत कमीशन दिया जाता था। परीक्षा के बाद कौशिक से मुलाकात में अंजू ने कहा था कि 2.80 करोड़ रुपये की कमीशन अभी नहीं मिली, कब दोगे? इसके बाद कौशिक ने तत्काल 10 लाख नगद उन्हें दिये। बाकी का हिसाब बाद में करने की बात कही।

नकल माफियाओं ने यूपीपीएससी की एलटी ग्रेड परीक्षा के हिन्दी और समाजशास्त्र का पेपर आउट कराकर एक-एक अभ्यर्थी से 20-20 लाख रुपये में पास कराने का ठेका लिया था। प्रश्नपत्र आउट कराने के बाद वाराणसी में अभ्यर्थियों को उत्तर याद कराया गया और इसके बाद पेपर को जला दिया गया। लेकिन एक व्यक्ति ने इसकी वीडियो रिकार्डिंग करके एसटीएफ को साक्ष्य के रूप में दिया है। इसी आधार पर एसटीएफ ने उन अभ्यर्थियों का बयान दर्ज किया है जिन्होंने लाखों रुपये खर्च करके पेपर हासिल किए थे।

एसटीएफ ने सर्विलांस की मदद से उन अभ्यर्थियों को ट्रेस कर लिया जो इस परीक्षा में शामिल थे। उनको बुलाकर बयान दर्ज किया। इनमें जौनपुर के अजीत कुमार ने बयान दिया कि उसे मडियाहूं के अजय और अजीत चौहान ने परीक्षा पास कराने के लिए 20 लाख रुपये लिया था। 28 जुलाई 2018 को उसे किसान यूपी कॉलेज वाराणसी बुलाया।

वहां से सूरत सिंह और चंद्रभारन सिंह कौशल विकास केन्द्र पर ले गए। वहां पर संजय, रंजीत व गणेश पहले से मौजूद थे। उन लोगों ने हल प्रश्न पत्र दिया और याद कराया। इसी तरह जौनपुर के सूरज, चंद्रभान, गाजीपुर के बृजेश यादव व नीरज कुमार ने कर लाखों रुपये दिए थे।

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