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China Rename 15 Places In Arunachal Pradesh : चीन ने अब अरुणाचल प्रदेश पर बढ़ाई चिंता, 15 और स्थलों के नाम बदले

Janjwar Desk
31 Dec 2021 1:44 PM GMT
चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स का दावा- अरूणाचल प्रदेश के 15 स्थलों के बदले नाम
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(चीन ने अरुणाचल के 15 स्थलों के बदले नाम)

China Rename 15 Places In Arunachal Pradesh : चीन ने जांगनान, अरुणाचल प्रदेश के लिए चीनी नाम, में 15 स्थानों के नामों को चीनी अक्षरों, तिब्बती और रोमन वर्णमाला में मानकीकृत किया है...

China Rename 15 Places In Arunachal Pradesh : चीन ने भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश में 15 और स्थानों के लिए चीनी अक्षरों, तिब्बती और रोमन वर्णमाला के नामों की घोषणा की है। चीन अरुणाचल प्रदेश (Arunchal Pradesh) के दक्षिण तिब्बत (South Tibbet) होने का दावा करता है।

सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने गुरुवार को दी गई खबर में कहा कि चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने बुधवार को घोषणा की कि उसने जांगनान, अरुणाचल प्रदेश के लिए चीनी नाम, में 15 स्थानों के नामों को चीनी अक्षरों, तिब्बती और रोमन वर्णमाला में मानकीकृत किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह स्टेट काउंसिल, चीन की कैबिनेट द्वारा जारी भौगोलिक नामों पर नियमों के अनुसार है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि देशांतर और अक्षांश वाले 15 स्थानों के आधिकारिक नामों में आठ रिहायशी इलाके, चार पहाड़, दो नदियां और एक पहाड़ी दर्रा है।

2017 में छह अन्य स्थानों के बाद चीन द्वारा दिए गए अरुणाचल में स्थानों के मानकीकृत नामों का यह दूसरा बैच है।

चीन के नवीनतम कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए, विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा: "हमने ऐसी रिपोर्ट देखी है। यह पहली बार नहीं है जब चीन ने अरुणाचल प्रदेश राज्य में स्थानों के नाम बदलने का प्रयास किया है। चीन ने अप्रैल 2017 में भी ऐसे नाम देने की कोशिश की थी। अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और रहेगा। अरुणाचल प्रदेश में आविष्कृत नामों को निर्दिष्ट करने से इस तथ्य में कोई बदलाव नहीं आता है।"

भारत-चीन सीमा विवाद में 3,488 किलोमीटर लंबी एलएसी शामिल है, और बीजिंग नियमित रूप से अपने दावे की पुष्टि करने के लिए शीर्ष भारतीय नेताओं और अधिकारियों के अरुणाचल प्रदेश के दौरे का विरोध करता है।

चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम निर्दिष्ट करना भारत के साथ क्षेत्रीय दावों को दोहराने की उसकी रणनीति का हिस्सा है। अतीत में बीजिंग ने हमेशा भारतीय नेताओं - राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और वरिष्ठ मंत्रियों - के उत्तर-पूर्वी राज्य के दौरे पर आपत्ति जताई है। हाल के महीनों में चीन द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गांवों की स्थापना की खबरें आई हैं। नामकरण देश के आक्रामक विस्तारवादी दृष्टिकोण का हिस्सा है।

ग्लोबल टाइम्स की खबर के मुताबिक चीन ने जिन आठ स्थानों के नाम को मानकीकृत किया है उनमें शन्नान क्षेत्र के कोना काउंटी में सेंगकेजोंग और दागलुंगजोंग, न्यिंगची के मेडोग काउंडी में मनीगांग, डुडिंग और मिगपेन, न्यिंगची के जायू काउंटी के गोलिंग, डांगा और शन्नान प्रीफेक्टर के लुंझे काउंटी का मेजाग शामिल है। इसमें कहा गया कि चार पहाड़ वामोरी, डेउ री, लुंझुब री और कुनमिंगशिंगजे फेंग हैं।

जिन दो नदियों के नाम मानकीकृत किए गए हैं वे शेन्योगमो ही और डुलैन ही हैं तथा कोना काउंटी के पहाड़ी दर्रे का नाम से ला दिया गया है। खबर में बीजिंग के चीन तिब्बत विज्ञान अनुसंधान केंद्र के विशेषज्ञ बताए गए लियान शिंगमिल को उद्धृत करते हुए दावा किया गया कि यह घोषणा सैकड़ों सालों से अस्तित्व रखने वाले स्थानों के नाम के राष्ट्रीय सर्वे का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि यह एक वैध कदम है और उन्हें मानकीकृत नाम देना चीन की संप्रभुता है। आने वाले समय में क्षेत्र में और स्थानों के मानकीकृत नामों की घोषणा की जाएगी।

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