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Uttarakhand Election 2022 Results Live Updates : मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के हारने की बड़ी खबर, पूर्व CM हरीश रावत ने अपने प्रतिद्वंदी को दी बधाई

Janjwar Desk
10 March 2022 11:09 AM GMT
Uttarakhand Election 2022 Results Live Updates : मुख्यमंत्री पुष्कर धामी  के हारने की बड़ी खबर, पूर्व CM हरीश रावत ने अपने प्रतिद्वंदी को दी बधाई
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Uttarakhand Election 2022 Results Live Updates : पुष्कर सिंह धामी खटीमा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार से छह हजार से ज्यादा वोटों से हार गए हैं...

Uttarakhand Election 2022 Results Live Updates : भाजपा की उत्तराखंड में सरकार बननी तो तय हो गयी पर उसके लिए सबसे बड़ा सदमा यह है कि उसके मुख्यमंत्री पुष्कर धामी (Pushkar Singh Dhami) को अपनी खटीमा सीट गंवानी पड़ी है। धामी को करीब 6 हजार वोटों से हार मिली है। इसके चलते सरकार बनाकर भी भाजपा (BJP) को 12 महीने के अंदर राज्य में चौथे मुख्यमंत्री की तलाश करनी होगी।

मणिपुर में भी पहली बार सभी सीटों पर लड़ रही भाजपा की सरकार बरकरार रहना तकरीबन तय हो गया है। खटीमा सीट से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 37,254 वोट लाकर कांग्रेस के भुवन सिंह कापड़ी (44,479 वोट) से करीब 6 हजार वोट से हार गए हैं।

उत्तराखंड में फिलहाल भाजपा ने 70 सीट में से 9 सीट जीत ली हैं और 38 पर बढ़त बना रखी है। यहां कांग्रेस (Congress) ने 7 सीट जीती है और 12 पर आगे चल रही है। यहां 4 सीट पर अन्य दलों को बढ़त हासिल है। देवभूमि में AAP का खाता खुलता नहीं दिख रहा है।

वहीं लालकुआं से भाजपा के डॉ. मोहन सिंह बिष्ट (Mohan Singh Bisht) ने 14 हजार से ज्यादा वोट से कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Harish Rawat) को हरा दिया है। हालांकि ऑफिशियल रिजल्ट नहीं आया है। हरिद्वार से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक कांग्रेस के सतपाल ब्रह्मचारी को हराकर 5वीं बार विधायक बन गए हैं। गंगोत्री से भाजपा के सुरेश चौहान, कांग्रेस के विजयपाल सजवाण से 6687 वोट से आगे चल रहे हैं। यहां AAP के सीएम कैंडिडेट अजय कोठियाल तीसरे नंबर पर हैं। और चौबट्टाखाल से भाजपा के मौजूदा मंत्री सतपाल महाराज कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष केसर नेगी से 4431 वोट से आगे चल रहे हैं।

चुनाव नतीजों की सबसे पहली गणना लोहाघाट सीट से पूरी हुई। यहां कांग्रेस प्रत्याशी खुशहाल सिंह अधिकारी ने जीत दर्ज की। लालकुआं सीट से कांग्रेस प्रत्याशी एवं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत चुनाव हार गए हैं। बीजेपी के मोहन सिंह बिष्ट ने हरीश रावत को 14000 से ज्यादा वोटों से चुनाव हरा दिया है। प्रतापनगर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी विक्रम सिंह नेगी ने की जीत दर्ज की। विकासनगर से भाजपी प्रत्याशी मुन्ना सिंह चौहान जीत गए। हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र से चुनाव जीत गईं। पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य भी चुनाव जीत गए।

हार को स्वीकारते हुए हरीश रावत ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा- 'लालकुआं विधानसभा क्षेत्र से मेरी चुनावी पराजय की औपचारिक घोषणा ही बाकी है। मैं लालकुआं क्षेत्र के लोगों से जिनमें बिंदुखत्ता, बरेली रोड के सभी क्षेत्र सम्मिलित हैं, क्षमा चाहता हूं कि मैं उनका विश्वास अर्जित नहीं कर पाया और जो चुनावी वादे उनसे मैंने किये, उनको पूरा करने का मैंने अवसर गवा दिया है, बहुत अल्प समय में आपने मेरी तरफ स्नेह का हाथ बढ़ाने का प्रयास किया। मैं अपने आपको आपके बड़े हुए हाथ की जद में नहीं ला पाया।'

रावत ने अपने पोस्ट में आगे लिखा- 'कांग्रेसजनों ने अथक परिश्रम कर मेरी कमजोरियों को ढकने और जनता के विश्वास को मेरे साथ जोड़ने का अथक प्रयास किया उसके लिए मैं अपने सभी कार्यकर्ता साथियों को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं। एक बार राजनीति स्थिति में स्थायित्व आ जाए, लोगों का ध्यान अपने दैनिक कार्यों पर आ जाए तो मैं लालकुआं क्षेत्र के लोगों को धन्यवाद देने के लिए उनके मध्य पहुंचूंगा। उन्होंने मुझसे श्रेष्ठ उम्मीदवार को अपना प्रतिनिधि चुना है। उनको और उनके द्वारा चयनित उम्मीदवार को मेरी ओर से बहुत-बहुत बधाई और आगे के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं।'

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में मोदी फैक्टर का असर कायम रहा। इन जिलों में धार्मिक भावनाओं का खासा महत्व है। BJP ने इसे भुनाने में कसर नहीं छोड़ी। PM मोदी खुद कई बार उत्तराखंड में चुनावी कैंपेन करने के लिए आए। बताया जा रहा कि मोदी के चुनावी कैंपेन से राज्य की आठ से दस सीटों पर सीधे असर पड़ा। यही वजह रही कि आज उत्तराखंड में परंपरा को तोड़कर BJP ने सत्ता में वापसी की।

इस बार के चुनावों के पहले भाजपा की ओर से केदारनाथ के कायाकल्प का जोरशोर से प्रचार किया गया। चारधाम को जोड़ने वाले हाइवे को 4 लेन करने, चारधाम के विकास को हाइलाइट किया गया। PM मोदी ने कई बार केदारनाथ धाम का दौरा किया। नेपाल और चीन सीमा तक सड़कों के चौड़ीकरण, ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेलवे लाइन के निर्माण से विकास का खाका खींचा गया।

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