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प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता करीमा की संदिग्ध मौत, पीएम मोदी को भावुक संदेश भेज बताया था अपना भाई

Janjwar Desk
22 Dec 2020 2:06 PM GMT
प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता करीमा की संदिग्ध मौत, पीएम मोदी को भावुक संदेश भेज बताया था अपना भाई
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photo : social media

रक्षाबंधन पर बलोच स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन की अध्यक्ष करीमा बलोच ने पीएम मोदी को अपना भाई बताते हुए एक भावुक वीडियो संदेश जारी किया था, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था...

जनज्वार। बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के हनन को लेकर पाकिस्तानी सेना के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली कार्यकर्ता करीमा बलोच की लाश कनाडा में रहस्यमय परिस्थितियों में बरामद की गयी।

गौरतलब है कि करीमा बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के उत्पीड़न से बचकर कनाडा में शरणार्थी के तौर पर रह रही थीं। बीबीसी ने 2016 में उन्हें दुनिया की 100 सबसे प्रेरणादायक और प्रभावशाली महिलाओं में से एक के रूप में नामित किया था। करीमा को देश और विदेश में बलूचों की सबसे मजबूत आवाज में से एक के रूप में जाना जाता था।

करीमा ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सेना की बर्बरता के खिलाफ डटकर आवाज उठायी थी। रविवार 20 दिसंबर से लापता करीमा की लाश कनाडा के टोरंटों में पायी गयी।

2016 में रक्षाबंधन पर बलोच स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन की अध्यक्ष करीमा बलोच ने पीएम मोदी को अपना भाई बताते हुए एक भावुक वीडियो संदेश जारी किया था, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

करीमा बलोच ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भाई बताते हुए कहा था कि रक्षाबंधन के दिन बलूचिस्तान की एक बहन भाई मानकर आपसे कुछ कहना चाहती है। बलूचिस्तान में कितने ही भाई लापता हैं। कई भाई पाक सेना के हाथों मारे गए हैं। बहनें आज भी लापता भाइयों की राह तक रही हैं। हम आपको ये कहना चाहते हैं कि आपको बलूचिस्तान की बहनें भाई मानती हैं। आप बलोच नरसंहार, युद्ध अपराध और मानवाधिकार हनन के खिलाफ अंतराष्ट्रीय मंचों पर बलोचों और बहनों की आवाज बनें।'

वहीं 2016 में ही स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने भाषण में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर व बलूचिस्तान के लिए स्वतंत्रता का समर्थन किया था। स्वतंत्रता दिवस के भाषण में पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इन क्षेत्रों का उल्लेख किया था। उसके बाद ही करीमा बलोच ने प्रधानमंत्री मोदी को भाई संबोधित करते हुए भावुक अपील की थी, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुई।

करीमा बलोच को अंतिम बार रविवार 20 दिसंबर की शाम को तीन बजे के आसपास देखा गया था। अब उनके परिवार ने इस बात की पुष्टि की है कि करीमा का शव मिल गया है। करीमा बलोच को पाकिस्तानी सरकार और सेना के खिलाफ सबसे मुखर आवाज माना जाता था। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भी बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों के खिलाफ आवाज बुलंद की थी।

करीमा बलोच की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर पाकिस्तान सरकार और उनकी खुफिया एजेंसी आईएसएई पर शक जताया जा रहा है, कहा जा रहा है कि इनमें से कोई ीाी उनकी हत्या करवा सकता है। बीबीसी ने 2016 में करीमा बलोच को दुनिया की 100 सबसे प्रेरणादायक और प्रभावशाली महिलाओं में से एक के रूप में नामित किया गया था।

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