Last Update On : 21 09 2018 09:16:45 PM

राफेल डील पर नहीं थम रहा बवाल, बतौर कमीशन ही इस डील में अनिल अम्बानी को मिले थे 21,000 करोड़ रुपये….

जनज्वार। मोदी सरकार की राफेल सौदे पर सांप—छछूंदर जैसी हालत हो गयी है, वह एक सच यानी ‘अंबानी के लिए देश से किया धोखा’ को छुपाने के लिए हर बार एक से बड़े एक झूठ में फंसती जा रही है। अब तो फ्रांस ने मोदी सरकार को बिल्कुल ही नंगा कर दिया है कि कैसे इस भोंडी राष्ट्रवादी सरकार ने देश के साथ एक पूंजीपति घराने को मुनाफा दिलाने के लिए देशद्रोह का काम किया है, देश की संप्रभुता और साधनों का सौदा किया है

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राफेल डील विवाद को आज तब हवा मिल गई है जब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद की तरफ से कहा गया कि इस डील में अनिल अंबानी की कंपनी को चुनने में उनकी सरकार का कोई रोल नहीं था, बल्कि अंबानी का चुनाव करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने सिफारिश की थी।

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गौरतलब है कि कांग्रेस राफेल डील में मोदी सरकार की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठाती आ रही है, राहुल गांधी भी इसके लिए मोदी सरकार को घेरते आए हैं।

राफेल डील में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद की तरफ से यह बयान सामाजिक कार्यकर्ता और प्रख्यात वकील प्रशांत भूषण अंबानी के एक ट्वीट से सामने आया है। उन्होंने अपने ट्वीट में पूर्वफ्रांस्वा ओलांद के हवाले से कहा है कि अनिल अंबानी को चुनने में फ्रांस को कोई रोल नहीं रहा है।

प्रशांत भूषण ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरते हुए ट्वीट किया, ‘ये धमाकेदार है! पूर्व फ्रास राष्ट्रपति ओलांद जिन्होंने मोदी के साथ 36 राफेल विमान को लेकर सौदा किया था, ने कहा है कि फ्रांस या दसॉ ने डील के लिए अंबानी का चयन नहीं किया था! क्या इसकी सिफारिश मोदी ने की थी। क्या यह भी कोई सीक्रेट है मोदी जी?’

प्रशांत भूषण पहले भी दावा कर चुके हैं कि राफेल विमान सौदा इतना बड़ा घोटाला है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। बोफोर्स 64 करोड़ रुपये का घोटाला था, जिसमें चार प्रतिशत कमीशन दिया गया था। इस घोटाले में कमीशन कम से कम 30 प्रतिशत है। अनिल अंबानी को दिए गए 21,000 करोड़ रुपये केवल कमीशन के हैं, कुछ और नहीं।

मोदी द्वारा अंबानी को राफेल डील में सौदा दिलवाने का यह विवाद फ्रेंच न्यूज वेबसाइट मीडियापार्ट में कल छपे एक लेख के बाद सामने आया है, जिसमें राफेल डील को लेकर नए खुलासा किया गया। इस लेख को साफ बात नाम के ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया गया। इसी पोस्ट को आधार बनाते हुए प्रशांत भूषण ने मोदी सरकार पर इस नए विवाद पर प्रधानमंत्री से सवाल दागे हैं।

वरिष्ठ आर्थिक—राजनीतिक विश्लेषक राजेश रपरिया कहते हैं, ‘फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति आंस्वा ओलांदे ने राफेल डील के कर्ताओं को रंगे हाथ पकड़वा दिया है। अब साफ हो गया है कि अनिल अंबानी के चयन के पीछे कौन है।अब भी यह कारगर मुद्दा नहीं बन पाया तो विपक्षी दलों की सबसे बड़ी विफलता होगी।’

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