UP : पत्नी के पास डॉक्टर को देने के लिए नहीं थे 15000 रूपये, ढाई महीने बाद हुआ कोरोना मृतक का अंतिम संस्कार

मेरठ में इलाज के दौरान ही उस व्यक्ति की मौत हो गयी थी। व्यक्ति की मौत के बाद उसकी पत्नी से अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि अंतिम संस्कार के लिए शव देने के लिए 15,000 रुपए लगेंगे तब शव दिया जाएगा वरना हम लोग ही अंतिम संस्कार कर देंगे...

Update: 2021-07-02 11:51 GMT

यूपी के हापुड़ में 15000 रूपये ना होने पर ढ़ाई महीने बाद हो सका कोरोना मृतक का अंतिम संस्कार.

जनज्वार, मेरठ। उत्तर प्रदेश के हापुड़ (HAPUR) में कोरोना का कहर अभी भी कम नहीं हुआ है। ताजा मामला हापुड़ के सिटी कोतवाली क्षेत्र का है, जहां 15,000 रुपए न होने पर कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के शव का करीब ढाई महीने बाद आज अंतिम संस्कार किया गया।

मृतक युवक अप्रैल महीने में कोरोना पॉजिटिव हुआ था, इलाज के दौरान उसे मेरठ (MERRUT) रेफर कर दिया गया था। मेरठ में इलाज के दौरान ही उस व्यक्ति की मौत हो गयी थी। व्यक्ति की मौत के बाद उसकी पत्नी से अस्पताल के डॉक्टरों ने कहा कि अंतिम संस्कार के लिए शव देने के लिए 15,000 रुपए लगेंगे तब शव दिया जाएगा वरना हम लोग ही अंतिम संस्कार कर देंगे।

इसके बाद पत्नी पैसे का इंतजाम करने हापुड़ आ गई, लेकिन उससे शव के लिए 15,000 का इंतजाम नहीं हो सका और वो अस्पताल द्वारा अंतिम संस्कार की बात सोचकर शव लेने ही नहीं गई। इसके बाद मृतक की पत्नी हापुड़ से अपने दो बच्चों को लेकर अपने गांव चली गई।

करीब ढाई महीने बाद अस्पताल को शव की सुध आई, अस्पताल (HOSPITAL) द्वारा शव को परिजनों के इंतजार के लिए रखा हुआ था। जब ढाई महीने बाद भी कोई शव लेने नहीं आया तो मेरठ अस्पताल ने शव को हापुड़ स्वास्थ विभाग के सुपुर्द कर दिया और हापुड़ स्वास्थ विभाग ने तीन दिन पहले शव को जीएस मेडिकल कॉलेज में रखवा दिया।

जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग प्रशासन के सहयोग से परिजनों को ढूंढ़ने लगे। आज जब परिजनों का पता चला तो विभाग ने शव उन्हें सौंप दिया और एक एनजीओ (NGO) के माध्यम में शव का अंतिम संस्कार करा दिया गया।

हालांकि मामले में हापुड सीएचसी प्रभारी डॉ. दिनेश खत्री का कहना है कि मृतक के भाई को मेरठ के अस्पताल से बताया गया था कि मरीज कोरोना पॉजिटिव (COVID POSITIVE) था, लेकिन वह यह बात सुनकर भाग गया था और तब से अब तक अपना मोबाइल भी स्विच ऑफ किया हुआ है। उन्होंने कहा कि अब मृतक के मकान मालिक और उसकी पत्नी को ढूंढ कर शव उनके सुपुर्द कर दिया गया है और शव का अंतिम संस्कार भी एक एनजीओ के माध्यम से करा दिया गया है।

जब मृतक की मासूम बच्ची और पत्नी श्मशान पर अंतिम संस्कार के लिए आईं तो उनके आंसू रोके न रुक रहे थे। हालांकि इस घटना ने एक बार फिर से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। कोरोना संक्रमित शव को अस्पताल ज्यादा दिनों तक अपने पास नहीं रख सकते हैं, लेकिन इस मामले में शव ढाई महीने तक अस्पताल में रहा।

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