विश्वविद्यालय खुलवाने की मांग को लेकर 5 दिन से धरने पर बैठे BHU के 5 छात्रों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

धरना दे रहे विद्यार्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन तानाशाही रवैया अपना रहा है। परिसर के सभी मंदिर खुले हैं, सर सुंदरलाल अस्पताल खुला है पर कक्षाएं खोलने के नाम पर विश्वविद्यालय प्रशासन आनाकानी कर रहा है, विश्वविद्यालय न खुलने के कारण यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों का जीवन अधर में लटकता नज़र आ रहा है...

Update: 2021-02-26 03:48 GMT

जनज्वार। पिछले 5-6 दिन से बीएचयू में कक्षायें शुरू किये जाने को लेकर छात्र धरना दे रहे हैं, जिनमें से 5 छात्रों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में सभी कक्षाएं के साथ खोलने के लिए सिंहद्वार पर धरना दे रहे 5 छात्रों आशुतोष, सुमित, अनुपम शोध, पवन और अविनाश कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार कर धरनास्थल को करा दिया है।

विश्वविद्यालय खोले जाने को लेकर धरना दे रहे विद्यार्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन तानाशाही रवैया अपना रहा है। परिसर के सभी मंदिर खुले हैं, सर सुंदरलाल अस्पताल खुला है पर कक्षाएं खोलने के नाम पर विश्वविद्यालय प्रशासन आनाकानी कर रहा है। विश्वविद्यालय न खुलने के कारण यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों का जीवन अधर में लटकता नज़र आ रहा है।

विश्वविद्यालय को खोलने की मांग को लेकर ही विद्यार्थियों और प्रशासन के बीच ठन गई है। लंका (वाराणसी) स्थित सिंह द्वार पर धरना दे रहे छात्रों ने अपनी मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन की रणनीति में बदलाव करते हुए गांधीवादी तरीके से अपनी मांग को रखते हुए आमरण अनशन पर जाने का फैसला किया था, जिसके बाद पुलिस ने 5 छात्रों को गिरफ्तार कर धरनास्थल खाली करा दिया।

भगत सिंह छात्र मोर्चा ने इस गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए कहा है, 'बड़ी बर्बरता से विश्वविद्यालय खुलवाने के संघर्ष कर रहे छात्रों को यूपी पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है ,जिसमें पवन, अनुपम, सुमित, अविनाश और आशुतोष शामिल हैं। हमें इनको छुड़ाने के लिए तत्काल रणनीति बनाने की जरूरत है। आप सभी साथी लंका गेट पहुंचें।'

बीएचयू के सिंहद्वार पर पिछले पांच दिन से धरना-प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहना है कि स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की 'ऑन-ऑफ लाइन' कक्षाएं सोमवार 22 फरवरी से शुरू कर दी गईं, लेकिन प्रथम एवं द्वितीय वर्ष की कक्षाएं उस तरह से शुरू नहीं की गई हैं। प्रदर्शनकारियों की यह भी मांग है कि वाराणसी समेत देश के अधिकांश स्कूल, कॉलेज एवं विश्वविद्यालय पुन: खोल दिए गए हैं, लेकिन यहां उनकी कक्षाएं शुरू नहीं की जा रही हैं। इस वजह से उनकी पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित है तथा वे बेहद तनाव में हैं। ऐसे में प्रशासन को तत्काल कक्षाएं बहाल करनी चाहिए।

इस मामले में सफाई देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासान ने सफाई में कहा है कि विश्वविद्यालय में कक्षाएं कोरोना से संबंधित सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए ही आयोजित की जाएंगी। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि 11 महीने बाद अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल फिर से खोले गये थे, जबकि सोमवार यानी 22 फरवरी से उनकी ऑन-ऑफ लाइन कक्षाएं शुरू कर दी गयी थीं।

धरनारत विद्यार्थियों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए 22 फरवरी को विश्वविद्यालय प्रशासन के पीआरओ डॉ. राजेश सिंह ने देर शाम विज्ञप्ति जारी कर भारत सरकार के निर्देशानुसार विश्वविद्यालयय को खोलने की बात कही और छात्र-छात्राओं से विश्वविद्यालय का शैक्षणिक वातावरण बनाने की अपील की थी।

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