Positive News : पढाई में अपने गांव मदनपुर की परंपरा तोड़ रही बिहार की मुस्कान, अब दिल्ली में होटल मैनेजमेंट की करेगी पढ़ाई

Positive News : बिहार का मदनपुर आज भी काफी पिछड़ा हुआ है जिसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि वहां पर्याप्त संख्या में बच्चों के पढ़ने के लिए स्कूल नहीं हैं, सड़कें कच्ची हैं और बिजली की पर्याप्त सुविधा नहीं है...

Update: 2021-12-18 04:53 GMT

बिहार के छोटे से गांव मदनपुर की गरीब बच्ची मुस्कान करेगी दिल्ली में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई

Positive news : बिहार के एक छोटे से जिले पूर्वी चंपारण के मदनपुर गांव की मुस्कान ने वो कर दिखाया जो इस गांव की कोई भी लड़की नहीं कर सकी। मुस्कान मदनपुर गांव की पहली ऐसी लड़की हो गई है जिसने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने का मुकाम हासिल करने के बाद अब होटल मैनेजमेंट कोर्स के लिए भी क्वालिफाई कर लिया है, वरना इस गांव की कई लड़कियों की तो स्कूली शिक्षा पूरी होने से पहले ही उनकी शादी कर दी जाती है।

मदनपुर आज भी काफी पिछड़ा हुआ है जिसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि आज भी वहां पर्याप्त संख्या में बच्चों के पढ़ने के लिए स्कूल नहीं है, आज भी वहां की सड़कें कच्ची हैं, आज भी वहां बिजली की पर्याप्त सुविधा नहीं है और लोगों को अपनी आजीविका के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है।

मुस्कान के पिता को भी काफी संघर्ष करना पड़ा। फिर आजीविका की तलाश में वो सपरिवार दिल्ली चले गए और वहां सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करने लगे। मुस्कान अपने परिवार के साथ 2005 से दिल्ली में रह रही है।

मुस्कान ने अपनी शिक्षा दिल्ली के एक छोटे सरकारी स्कूल से पूरी की है। उसने दसवीं कक्षा में 73% तथा 12वीं कक्षा में 89% अंक हासिल किये हैं। मुस्कान अपने करियर में कुछ और ऊंचाइयां प्राप्त करने के लिए होटल मैनेजमेंट का कोर्स करना चाहती है, जिसके लिए मुस्कान ने इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के सीईटी की परीक्षा दी। सीईटी में मुस्कान का रैंक 485वां रहा और उसे इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी का बनारसीदास चांदीवाला होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग अलॉट हुआ है।

अपनी सफलता के बारे में मुस्कान बताती है, 'मेरी अब तक की पढ़ाई पूरी करने में नव जागृति कलेक्टिव की खास भूमिका रही है। नव जागृति कलेक्टिव एक एनजीओ है, जिसके जरिये मैंने छठी क्लास में एडमिशन लिया और तब से लेकर आज तक इस एनजीओ की बड़ी दीदी और दादा (डालिया कर एवं तपन कर) ने हमारी पढ़ाई के लिए जरूरी चीजों के अलावा हमारे लिए पर्याप्त ट्यूशन और अन्य आवश्यकताओं की व्यवस्था की, जिनकी वजह से मैं अपने स्कूल में काफी अच्छा स्कोर कर पाई।'

मुस्कान की इस सफलता में दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में काम करने वाले एनजीओ नव जागृति कलेक्टिव का महत्वपूर्ण योगदान है। नवजागृति कलेक्टिव की कोऑर्डिनेटर डालिया कर कहती हैं, 'नव जागृति सामूहिक समाज की बेहतरी के लिए काम करने वाला एक संगठन (एनजीओ) है। वर्तमान में हम 32 परिवारों और 100 बच्चों (लगभग) की मदद कर रहे हैं जो एनजीओ से जुड़े हैं, लेकिन और भी बहुत से लोग हैं जिन्हें हमारी मदद और समर्थन की ज़रूरत है और इसके लिए हम प्रयास कर रहे हैं! हमारी गतिविधियों के संचालन में, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की अग्रणी कंपनी स्मार्ट क्यूब का उल्लेखनीय सपोर्ट भी मिलता है। इसके अलावा, आप पार्टी के विधायक प्रवीण कुमार से भी हमें कई अवसरों पर सहायता मिलती है जिससे हम जरूरतमंद बच्चों के विकास के लिए कुछ कर पाते हैं।'

गौरतलब है कि नवजागृति कलेक्टिव के प्रयासों के चलते दूसरे कई और भी ग़रीब व बेसहारा बच्चे अपनी ज़िन्दगी को बेहतर बनाने के लिए न केवल स्कूली शिक्षा हासिल करने में सफल रहे हैं बल्कि अच्छे अंक हासिल कर अपनी मेधा और प्रतिभा का परिचय भी दे चुके हैं। वहीं पढ़-लिख कर कुछ बच्चे अच्छी नौकरियां हासिल करने में भी सफल रहे हैं। इनमें जितेंद्र कुमार और भोलू कुमार के नाम उल्लेखनीय हैं। जितेंद्र कुमार ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है और अभी पीएचडी चैंबर ऑफ़ कॉमर्स एन्ड इंडस्ट्री में प्रोजेक्ट कोर्डिनेटर के पद पर कार्यरत है। वहीं भोलू कुमार ने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है और अब ज़ोमेटो में फ़ूड डेलिवरी एजेंट के रूप में कार्यरत है।

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