पूछड़ी में की गई बुलडोजर कार्रवाई पर उच्च न्यायालय ने वन विभाग की मनमानी पर अपनाया कड़ा रुख, डीएफओ प्रकाश चंद्र को दिया कारण बताओ नोटिस

अदालत के स्पष्ट स्टे के बावजूद DFO प्रकाश चंद्र आर्य ने हठधर्मिता दिखाते हुए याचिकाकर्ता की भूमि पर ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनें तैनात कर याचिकाकर्ता की तैयार फसलें और चारा नष्ट कर दिया गया और भूमि पर वन विभाग द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया...

Update: 2026-02-18 11:06 GMT

रामनगर। माननीय उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता पूछड़ी निवासी बालादत्त कांडपाल की भूमि पर वन विभाग द्वारा अवैध कब्जे और फसलों को नष्ट करने के मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायालय ने इसे अदालत के आदेश की "जानबूझकर अवज्ञा" का प्रथमदृष्टया मामला मानते हुए प्रतिवादी के विरुद्ध अवमानना कार्यवाही शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि याचिकाकर्ता के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 61A(1) के तहत बेदखली की कार्यवाही शुरू की गई थी। इस आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने माननीय उच्च न्यायालय में रिट याचिका (WPMS संख्या 583/2025) दायर की थी, जिस पर न्यायालय ने 27.02.2025 को एक अंतरिम आदेश पारित कर बेदखली की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

याचिकाकर्ता की अधिवक्ता तनुप्रिया जोशी ने न्यायालय को सूचित किया कि अदालत के स्पष्ट स्थगन (स्टे) आदेश के बावजूद, प्रतिवादी संख्या 1 प्रकाश चंद्र आर्य ने हठधर्मिता दिखाते हुए याचिकाकर्ता की भूमि पर विगत 24 दिसंबर 2025 में ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनें तैनात कर याचिकाकर्ता की तैयार फसलें और चारा नष्ट कर दिया गया और भूमि पर वन विभाग द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया।

माननीय न्यायालय ने इस कृत्य को गंभीर मानते हुए डीएफओ प्रकाश चंद्र को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और 18 मार्च 2026 को सुबह 10:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया गया है। उन्हें यह भी स्पष्ट करना होगा कि अदालती आदेशों के उल्लंघन के लिए उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही क्यों न की जाए।

संयुक्त संघर्ष समिति ने न्यायालय में पूछड़ी में बेदखली की मार झेल रहे पूछड़ी के ग्रामीणों की दमदार पैरवी के लिए एडवोकेट अनुप्रिया जोशी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वन विभाग द्वारा विगत 7 दिसंबर को की सैकड़ों लोगों के खिलाफ की गई बेदखली की कार्रवाई भाजपा के दबाव में गैर कानूनी तरीके से की गई थी। अतः बेदखल किए गए सभी लोगों का पुनर्वास किया जाए।

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