देश के 65 अधिवक्ताओं ने केंद्र को लिखी चिट्ठी, IAMC गठन में CJI NV Ramana की भूमिका पर उठाए सवाल, CAG जांच की मांग

देश के 65 प्रमुख अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया है कि आईएएमसी ( IAMC Hyderabad ) की स्थापना में तेलंगाना सरकार द्वारा सार्वजनिक धन और संपत्ति का दुरुपयोग किया गया हैं। इसके गठन में कानूनी प्रक्रियाओं का भी उल्लंघन हुआ है।

Update: 2022-08-26 02:33 GMT

देश के 65 अधिवक्ताओं ने सीएजी को लिखी चिट्ठी, आईएएमसी गठन में सीजेआई एनवी रमना की भूमिका पर उठाए सवाल, जांच की मांग

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ( CJI NV Ramana ) आज अपने पद सेवानिवृत हो जाएंगे। इस बीच देश के 65 वरिष्ठ अधिवक्ताओं और आर्बिट्रेटर्स ने केंद्र सरकार ( country top 65 advocates wrote letter central government ) को उनके खिलाफ एक चिट्ठी लिखी है। अधिवक्ताओं के समूह ने पत्र के जरिए एनवी रमना के नेतृत्व में गठित व हैदराबाद स्थित अंतर्राष्ट्रीय मिडिएशन और आर्बिट्रेटर्स केंद्र ( IAMC Hyderabad ) की स्थापना में उनकी कथित भूमिका और गैर कानूनी कार्यों की सीएजी से जांच ( CAG investigation ) कराने की मांग की है। केंद्र सरकार को जारी पत्र पर मद्रास उच्च न्यायालय के एक वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू सहित 65 कानूनी पेशेवरों, मध्यस्थों और आर्बिट्रेटर्स के हस्ताक्षर हैं। इन लोगों ने 15 अगस्त को इस पत्र पर हस्ताक्षर किया था।

देश के प्रमुख अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया है कि आईएएमसी ( IAMC Hyderabad ) की स्थापना में तेलंगाना सरकार द्वारा सार्वजनिक धन और संपत्ति का दुरुपयोग किया गया हैं। इसके गठन में कानूनी प्रक्रियाओं का भी उल्लंघन हुआ है। आईएएमसी की स्थापना सीजेआई एनवी रमना द्वारा की गई थी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली और हाल ही में सेवानिवृत्त एल नागेश्वर राव इसके ट्रस्टियों में शामिल हैं। यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब 26 अगस्त को एनवी रमना अपने पद से सेवानिवृत हो रहे हैं। बता दें कि सीजेआई रमना ने पिछले साल दिसंबर में हैदराबाद के बाहरी इलाके नानकरामगुडा में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की उपस्थिति में आईएएमसी का उद्घाटन किया था।

तेलंगाना सरकार से हासिल किया 250 करोड़ का लाभ

वकीलों और आर्बिट्रेटर्स के समूहों ने दावा किया है कि आईएएमसी की स्थापना कर सीजेआई ने केंद्र सरकार के हितों को संवर्द्धन किया है। साथ ही इस केंद्र के जरिए अपने बिजनेस को बढ़ाने का काम किया है। जस्टिस रमना ने केंद्र के लिए हाई.टेक सिटी में 5 एकड़ जमीन प्राप्त कर तेलंगाना सरकार से लगभग 250 करोड़ रुपए की बड़ी वित्तीय लाभ भी हासिल किया। सीजेआई ने जो किया वो आचार संहिता के खिलाफ है। इसे एक गंभीन अनियमितता और सार्वजनिक पद व संपत्तियों को दुरुपयोग मानते हुए अधिवक्ताओं ने केंद्र सरकार से सीएजी जांच ( CAG investigation ) कराने की मांग की है।

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