Adani Ports drugs Cases : आखिर अडानी पोर्ट ही क्यों बन रहा है ड्रग तस्करी का आसान अड्डा?

Adani Ports drugs Cases : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी दोस्त गौतम अडानी का मुंद्रा पोर्ट एक बार फिर चर्चा में है। 376.5 करोड़ के हेरोइन बरामदगी के बाद फिर एक बार एटीएस की जांच की कार्रवाई चल रही है

Update: 2022-07-14 14:08 GMT

Adani Ports drugs Cases : आखिर अडानी पोर्ट ही क्यों बन रहा है ड्रग तस्करी का आसान अड्डा?

जितेंद्र उपाध्याय की पड़ताल

Adani Ports drugs Cases : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी दोस्त गौतम अडानी का मुंद्रा पोर्ट एक बार फिर चर्चा में है। 376.5 करोड़ के हेरोइन बरामदगी के बाद फिर एक बार एटीएस की जांच की कार्रवाई चल रही है, पर सवाल उठता है कि पिछले एक वर्ष से लगातार मुंद्रा पोर्ट पर ही सर्वाधिक नशीले पदार्थों की बरामदगी क्या मात्र यह अनायास है,या अवैध कमाई के जरीये अकुत संपति एकत्र करने व देश के नवजवानों को नशे की ओर ढकेलने की एक गहरी साजिश। इन सवालों का जवाब तलाशना मौजू है।

गुजरात के आतंकवाद निरोधी दस्ता यानी एटीएस ने कच्छ जिले के पास एक कंटेनर से 376.5 करोड़ के रुपये कीमत वाले 75.3 किलोग्राम हेरोइन जब्त की है। बताया जाता है कि हेरोइन की खेप को कपड़े के थान में छिपाकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारत लाया गया था। मादक पदार्थ को पंजाब भेजा जाना था। गुजरात एटीएस को को मिले इनपुट के आधार पर गुजरात एटीएस की एक टीम पंजाब पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर के साथ मुंद्रा पहुंची और एक संदिग्ध कंटेनर हेरोइन के खेप को जब्त किया। खबरों के अनुसार यह कंटेनर मई के महीने में ही मुंद्रा बंदरगाह पंहुच गया था। पुलिस के अनुसार कंटेनर में कपड़े के 540 थान थे, जिनमें से 64 थानों के अंदर हेरोइन पाउडर मिला।

कपड़े के रोल के अंदर कार्डबोर्ड में जगह बनाकर हेरोइन को कपड़े में लपेटकर रखा गया था। कार्डबोर्ड पाइप के ऊपर एक और प्लास्टिक पाइप रखा गया था। दोनों के बीच की खाली जगह में ड्रग्स को पैक किया गया था, फिर दोनों तरफ से टेप से चिपका दिया गया था। इसके अलावा, कार्डबोर्ड पाइप और प्लास्टिक पाइप पर नीला कार्बन पेपर चिपकाया गया था, ताकि एक्स-रे स्कैनिंग के दौरान पकड़ में न आ सके।

गुजरात के पुलिस महानिदेशक आशीष भाटिया ने बताया कि एटीएस उच्च शुद्धता की 75.3 किलोग्राम हेरोइन बरामद की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 376.5 करोड़ रुपये कीमत होने का अनुमान है। इस मामले में अब तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। गुजरात के पुलिस महानिदेशक ने कहा, 'ड्रग्स तस्कर भारत में मादक पदार्थ भेजने के लिए हर उस जरिये का इस्तेमाल करेंगे, जो उन्हें उपयुक्त लगता है।

मुंद्रा बंदरगाह पर वर्षभर में भारी मात्रा में बरामद हुए मादक पदार्थ

गुजरात में अडानी का मुंद्रा बंदरगाह दुनिया का सबसे बड़ा ड्रग तस्करी का अड्डा बनते जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक पिछले एक साल में यहां कई मौकों पर 25 हजार करोड़ से ज्यादा की तस्करी का नशीला पदार्थ बरामद किया जा चुका है। इस साल मई में डीआरआई ने मुंद्रा बंदरगाह के पास एक कंटेनर से 56 किलोग्राम कोकीन जब्त की, जिसकी कीमत लगभग 500 करोड़ रुपये थी। इसी साल अप्रैल में कच्छ में कांडला बंदरगाह के पास एक कंटेनर से लगभग 1,439 करोड़ रुपये की 205.6 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी।

डीआरआई ने पिछले साल सितंबर में मुंद्रा बंदरगाह पर दो कंटेनरों से लगभग 3,000 किलोग्राम हेरोइन जब्त की थी। उसके बारे में माना जाता है कि यह अफगानिस्तान में तैयार हुई थी। इसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग 21,000 करोड़ रुपये आंकी गई थी। यह देश में पकड़ी गई अब तक की सबसे बड़ी ड्रग्स सप्लाई मानी जाती है। अफगानिस्तान से रवाना यह खेप 13 सितंबर को ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह से गुजरात रवाना के लिए निकली थी। इसे आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा पहुंचाया जाना था।फर्म ने खेप को 'टेल्कम पाउडर' घोषित किया था। वहीं निर्यात करने वाली फर्म की पहचान अफगानिस्तान के कंधार स्थित हसन हुसैन लिमिटेड के रूप में की गई थी। राजस्व खुफिया निदेशालय और कस्टम के ऑपरेशन में हेरोइन की बरामदगी हुई थी। जिसे एजेंसी ने जब्त कर लिया।.

अडाणी का बंदरगाह बना मादक पदार्थों का प्रवेश द्वार

अडाणी ग्रुप द्वारा संचालित मुंद्रा बंदरगाह देश के सबसे बड़े बंदरगाहों में से एक है। पिछले साल मात्रा के हिसाब से इस बंदरगाह का कारोबार सबसे अधिक रहा। उधर हाल यह है कि कच्छ भारत में मादक पदार्थों की तस्करी का प्रवेश द्वार बनता दिख रहा है। चाहे पिछले कुछ वर्षों से कच्छ के समंदर से तस्करी करके लाई गई हेरोइन या कोकीन हो, बंदरगाह पर माल के साथ आने वाली ड्रग्स हो या फिर पाकिस्तान से भेजी गई हेरोइन की बीच समुद्र में बरामदगी, कच्छ में विभिन्न तरीकों से मादक पदार्थों की तस्करी की अंतरराष्ट्रीय कोशिश हो रही है।

पिछले कुछ वर्षों में ड्रग्स की सबसे बड़ी मात्रा पकड़े जाने वाले 4 प्रमुख राज्यों में गुजरात कभी नहीं रहा। फिर अचानक 2021 में पहले जून महीने में भी तस्करी हुई थी लेकिन पकड़ी नहीं गई। अब सितंबर में 3000 किलो की खेप पकड़ी गई। जानकारों का मानना है कि बिना किसी पोर्ट अधिकारी के भरोसे कोई तस्कर इतना बड़ा जोखिम कैसे ले सकता है। साल 2020 में भारत में ड्रग्स की सबसे बड़ी मात्राएं यूपी, महाराष्ट्र, तेलंगाना और तमिलनाडु से पकड़ी गई थी। वहीं, साल 2019 में बिहार, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और असम ये टॉप पर चार राज्य रहे। लेकिन अब गुजराज के कच्छ के मुंद्रा पोर्ट पर एक साल में पकड़े जाने वाले ड्रग्स की मात्रा से भी ज्यादा कैसे पकड़ में आ गई? इसके पीछे गहरी साजिश तो है ही। जिसकी बड़े स्तर पर जांच की जरूरत है।

पिछले वर्ष सितंबर में 3000 किलो की ड्रग्स की खेप पकड़े जाने पर अडानी समूह की तरफ से जारी एक स्टेटमेंट में दावा किया गया था कि पोर्ट के रख-रखाव की जिम्मेदारी बेशक हमारे समूह के पास है लेकिन वहां पर चेकिंग करने का अधिकार सरकारी एजेंसियों को ही है। किस कंटेनर में क्या आ रहा है और क्या जा रहा है, इसे जांच करने का अधिकार मुंद्रा पोर्ट अथॉरिटी को नहीं है।

इस सवाल पर केरल के पूर्व डीजीपी डॉ. एन.सी. अस्थाना ने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि बेशक ये जिम्मेदारी पोर्ट की नहीं होती है। चेकिंग की जिम्मेदारी पुलिस और सरकारी एजेंसियां ही करती हैं। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल है कि पकड़ी गई ड्रग्स की खेप पूरे देश में जितनी सालभर में पकड़ी जाती है उससे भी कई गुना ज्यादा है।

पूर्व डीजीपी बताते हैं कि साल 2019 में देश भर में कुल करीब 2500 किलो ड्रग्स पकड़ी गई थी। उससे पहले करीब 1500 किलो पूरे देश में ड्रग्स जब्त हुई थी। लेकिन मुंद्रा पोर्ट पर पकड़े गए ड्रग्स का वजन 3000 किलो है। यानि दो गुना लगभग। वो भी सिर्फ दो कंटेनर में ये मात्रा पकड़ी गई है। पूर्व डीजीपी यहां एक सवाल उठाते हैं कि किसी भी चीज की तस्करी करने वाले कभी भी एक साथ इतनी भारी मात्रा में वो भी सबसे कीमती ड्रग्स की खेप नहीं ले जाते। क्योंकि इनके पकड़े जाने का हमेशा डर बना रहता है। ऐसे में यह बड़े मात्रा में तस्करी बिना किसी संरक्षण के नहीं की जा सकती है।

देश के जानेमाने अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण हाल ही में मंद्रा पोर्ट पर बरामद हेरोइन के मामले में ट्वीट कर कहते हैं कि गुजरात में अडानी का मुंद्रा पोर्ट बन गया है दुनिया का सबसे बड़ा ड्रग्स तस्करी का अड्डा। पिछले एक साल में यहां कई मौकों पर 20 हजार करोड़ से ज्यादा की तस्करी का नशा पकड़ा गया। उर्वी सराय रिट्वीट करते हुए लिखती हैं अदानी मुंद्रा बंदरगाह ड्रग का भंडाफोड़, गुजरात में बारिश, कमजोर हुआ रूपया, गिरती अर्थव्यवस्था, जय हो इंडियन मीडिया।

50 लाख युवा हेरोइन जैसे मादक पदार्थों के सेवन में संलिप्त

भारत में तेजी से नशीले पदार्थों का सेवन बढ़ रहा है। चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के 65 प्रतिशत युवा नशे में लिप्त हैं। भारत में 13 करोड़ लोग धूम्रपान करते हैं। 50 लाख युवा हेरोइन जैसे मादक पदार्थों के आदि हैं। पिछले वर्ष मुंद्रा पोर्ट से बरामद 3000 किलो ड्रग्स से भारत कितने लोग प्रभावित होते। इस सवाल का जवाब तलाशने पर बता चला कि स्वीडिश रिपोर्ट के मुताबिक एक व्यक्ति एक दिन में औसतन 460 मिलीग्राम ड्रग्स का सेवन कर सकता है। यानी लगभग 500 मिलीग्राम जिसे हम आधा ग्राम भी कह सकते हैं। इस तरह जो 3000 किलो जो ड्रग्स मिला है उससे 15 लाख लोगों को ये ड्रग्स उपलब्ध होती। लेकिन यहां 3000 किलो ड्रग्स पूरा प्योर है। मार्केट में ड्रग्स बिना मिलावट के सप्लाई नहीं होती। इस पर एक डेनिस रिसर्च है। जिसमें कहा गया है कि ड्रग्स की प्योर मात्रा में कम से कम 23 फीसदी या इससे भी ज्यादा की मिलावट होती है। ये मिलावट कभी मिल्क सुगर तो कभी दूसरे केमिकल की होती है। ऐसे में दावा है कि मुंद्रा पोर्ट से पकड़ी गई ड्रग्स की खेप से कम से कम 75 लाख लोग प्रभावित होते। ये आंकड़ा 1 करोड़ के पार भी पहुंच सकता था।

मुंद्रा पोर्ट भारत का सबसे बड़ा निजी बंदरगाह

कच्छ की खाड़ी के उत्तरी तट पर मुंद्रा पोर्ट है। पूर्व में अडानी समूह के स्वामित्व वाले मुंद्रा पोर्ट और स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड द्वारा संचालित व बाद में इसे कई बंदरगाहों के प्रबंधन के लिए अदानी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड में विस्तारित किया गया था ।

भारत में 13 प्रमुख और 200 छोटे तथा मध्यम अधिसूचित बंदरगाह हैं। छोटे बंदरगाह राज्यवार गुजरात (42), महाराष्ट्र (48),गोवा (5), कर्नाटक (10), केरल(17), तमिलनाडु (15), आन्ध्रप्रदेश (12) ओडिसा (13), पश्चिम बंगाल (1) दमण और दीव (2), लक्षद्वीप (10), पोंडिचेरी (2) और अंडमान निकोबार द्वीप (23) है।

भारत में ड्रग्स की तस्करी का इतिहास

भारत में ड्रग्स और ड्रग्स की तस्करी का लंबा इतिहास रहा है। वैदिक काल में भव्य मारिजुआना का उपयोग दवाइयों और त्योहारों में किया जाता था। कालांतर में ब्रिटिश शासकों ने बंगाल के खेतों में धान की जगह लोगों को अफीम की खेती करने को मजबूर किया। इसी वजह से 1770 का द ग्रेट बंगाल अकाल पड़ा था। जिसमें 10 मिलियन यानी करीब 1 करोड़ लोगों की मौत हुई थी।

ड्रग्स की तस्करी विश्व का सबसे पुराना अवैध व्यापार है। भारत में ड्रग्स अफगानिस्तान, ईरान, पाकिस्तान, म्यांमार, लाओस, कंबोडिया, थाईलैंड और भूटान से लाया जाता है। इन देशों की सीमाओं से भारत में ड्रग्स की खेप आती रहती हैं। दरअसल, इसे ड्रग्स आतंकवाद का नाम दिया गया है। इस ड्रग्स आतंकवाद से दुनिया के पहले 10 देशों में से भारत भी एक रहा है। इसे पनपने के लिए काफी मात्रा में धन ड्रग्स की तस्करी के माध्यम से भी आता है।

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दुनिया की प्रमुख अफीम की खेती वाले क्षेत्र आतंकवादी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, अलकायदा और हिज्बुल मुजाहिदीन, जैसे आतंकवादी संगठनों के घर हैं। पिछले वर्ष मुंद्रा पोर्ट पर जब्त ड्रग्स की बड़ी खेप भी अफगानिस्तान से आई थी। तो अब इसमें संदेह नहीं है कि अफगानिस्तान का अफीम उत्पादक क्षेत्र अब तालिबान के संरक्षण में है, और तालिबान को पोषित करने के लिए आवश्यक धन और मुख्य आय का जरिया बन चुका है।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में दुनिया की 80 प्रतिशत अफीम की खेती होती है। ड्रग से जुड़े नियम और कानून भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए 14 नवंबर 1985 को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकॉट्रॉपिक अधिनियम यानी एनडीपीएस लागू हुआ। इसके अंतर्गत किसी भी व्यक्ति को ड्रग्स का निर्माण खेती करना, बेचना, खरीदना और परिवहन करना अवैध है।

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