आखिर यू हीं रोहित ने नहीं लिया आत्महत्या का फैसलाः एक पिता के हत्या से लेकर बेटे के मौत तक की कहानी

छह माह पूर्व एक पिता की दरिंदों ने दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी। इस पिता का मात्र यह दोष था कि वे शहर की कीमती सरकारी जमीनों पर कब्जा जमाए लोगों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।

Update: 2022-03-26 19:52 GMT

जनज्वार। छह माह पूर्व एक पिता की दरिंदों ने दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी। इस पिता का मात्र यह दोष था कि वे शहर की कीमती सरकारी जमीनों पर कब्जा जमाए लोगों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। इनकी हमेशा के लिए आवाज बंद कर देने का जिम्मा माफियाओं ने भाड़े के बदमाशों को दी। इन बदमाशों ने आखिरकार चंद रूपयों के खातिर अपने काम को अंजाम दे दिया। हत्या के मामले में ये बदमाश तो पुलिस के हत्थे चढ़ गए,पर हत्याकांड का तानाबाना बुननेवाले अपनी उंची पहुंच के बदौलत कानून के सिकंजे से बाहर रह गए।जिन्हें सजा दिलाने की कसमें खाई थी,बेटे ने। हालांकि दहशत व दम तोड़ते इंसाफ की असली तस्वीर को देख बेटे ने कम समय में ही हार मान ली। न्याय की उम्मीद लगाए पुलिस दरबार में पहुंचने पर यहां फटकार मिलने से सदमे में आये बेटे ने अपने शरीर में आग लगाकर तीन मंजील से छलांग लगा दी। जिसके चलते उसकी जीवन लीला समाप्त हो चुकी है,पर वे संघर्ष के सवालों का जवाब आज भी अधूरा है।

हम यहां बात कर रहे हैं बिहार के उस चंपारण की जहां से महात्मा गांधी ने स्वाधीनता आंदोलन की शुरूआत की थी। यहां के इतिहास के गर्भ में संघर्षों की न जाने कितनी कहानियां छुपी है। इसके विपरित आज आजाद भारत में यहां का एक परिवार अपनी ही पुलिस व प्रशासन से न्याय की उम्मीद लगाए अपनों को खोता जा रहा है। पूर्वी चंपारण के मुख्यालय मोतीहारी के रोहित अग्रवाल के अपने शरीर में आग लगाकर तीन मंजील से छलांग लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। दो दिन पूर्व की इस घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है। यह हालात पैदा हुआ पिछले 20 वर्ष के न्याय की लड़ाई में इसाफ न मिलने पर।

इसे विस्तार से जानने के पहले यह बताना चाहूंगा कि मोतीहारी के हरसिद्धि निवासी विपिन अग्रवाल की 24 सितंबर 2021 को हरसिद्धि ब्लॉक ऑफिस गेट के पास दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। विपिन एक आरटीआई कार्यकर्ता थे। जिन्होंने हरसिद्धि ब्लॉक बाजार इलाके की कीमती 8 एकड़ सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चला रखा था। इस मामले में स्थानीय प्रशासन के कोई कार्रवाई न करने पर हाईकोर्ट में कई केस किया था। कोर्ट के निर्देश पर अतिक्रमण कर बनाए गए कई मकानों, दुकानों और पेट्रोल पंप को ढाह दिया गया था।.इसी कारण वह भू-माफियाओं के निशाने पर आ गए थे। हालांकि इस प्रकरण को करीब से जाननेवालों का मानना है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर मात्र कुछ रस्मी कार्रवाईयां की गई थी। एनएपीएम के विद्याकर झा कहते हैं कि इसको लेकर विपिन ने आरटीआई के तहत आवेदन देकर कई महत्वपूर्ण सूचना मांगते हुए प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की थी। कहा जाता है कि इस पर सूचना आयोग व न्यायालय ने भी विपिन को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश देते हुए अतिक्रमण हटाने को कहा था।

विपिन अग्रवाल के पिता विजय अग्रवाल का कहना है कि विपिन की हत्या से एक साल पहले 2020 में भी घर पर फायरिंग की गई थी। इसके बाद स्थानीय अधिकारियों से लेकर डीजीपी तक से अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई थी। थाने में कई आवेदन देकर सनहा और प्राथमिकी दर्ज कराई थी, लेकिन प्रशासन हमेशा उदासीन बना रहा। हत्याकांड में शूटर्स की गिरफ्तारी के बाद अक्टूबर 2021 में पूर्वी चंपारण के तत्कालीन एसपी नवीन चंद्र झा ने कहा था कि हत्या के पीछे व्यापारियों, राजनेताओं और रियल एस्टेट एजेंटों की सांठगांठ थी। हालांकि उन्होंने नेताओं-कारोबारियों के नाम का खुलासा करने से इनकार कर दिया था। लेकिन पूर्व में विपिन ने अपने पत्रों के माध्यम से पूरे खेल में एक दल के पूर्व जिलाध्यक्ष समेत अन्य का नाम लिया था।

विपिन अग्रवाल को मारने को दी गई थी 20 लाख की सुपारी

आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल की हत्या मामले में अरेराज डीएसपी अभिनव धीमान के नेतृत्व में बनी एसआईटी की टीम ने बीते जनवरी में ही मुख्य शूटर सचिन सिंह को गिरफ्तार कर लिया था। हत्याकांड में शामिल दो शूटर सहित छह लोगों को हत्या की सुपारी में सहयोग करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार अपराधियों ने पुलिस के सामने दिए बयान में बताया था कि हरसिद्धि बाजार की करोड़ों की सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के केस दर्ज करने को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या की गई थी। 20 लाख रुपये में सुपारी दी गई थी.

पुलिस कार्रवाई से हतास होकर रोहित ने की आत्महत्या

पिता की हत्या के साजिशकर्ताओं की गिरफ्तारी और न्याय नहीं मिलने से परेशान 14 वर्षीय रोहित ने 24 मार्च को आग लगाकर तीन मंजिले मकान से कूदकर जान देदे दी। मृत किशोर रोहित अपने पिता आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल की हत्या के साजिशकर्ताओं की गिरफ्तारी के लिए जद्दोजहद कर रहा था। पुलिस पर साजिशकर्ताओं से मिलीभगत करने का आरोप लगाते हुए उसने हरसिद्धि में अपने घर सामने स्थित तीन मंजिले एक निजी नर्सिंग होम की छत पर आग लगाकार कूद पड़ा। छत से कूदने के दौरान उसने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की थी। इससे पुलिस के खिलाफ उसके आक्रोश का अंदाजा लगाया जा सकता है। इलाज के दौरान मोतिहारी के निजी अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

आरटीआई कार्यकर्ता बिपिन अग्रवाल के बडे भाई विनय कुमार अग्रवाल ने कहा कि आग लगाने की घटना की जानकारी नहीं थी। साथ ही कहा कि भतीजा रोहित भाई बिपिन अग्रवाल की हत्या में पुलिस की कार्रवाई साजिश कर्ताओं के खिलाफ नहीं होने से परेशान था। इसी कारण ही वह आत्महत्या जैसे जघन्य कार्य को बाध्य हुआ। वहीं, मोतिहारी नगर के प्रसिद्ध व्यवसायी और विपिन अग्रवाल के रिश्तेदार विरेन्द्र जलान ने कहा कि समाज के लिए कार्य करने वाले के साथ ऐसी बदसलूकी होगी, जिसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। पुलिस प्रशासन की कार्रवाई से समाजिक कार्य करने वाले आगे आने के पहले सोचने को विवश होंगे।

एसपी कुमार आशीष ने कहा कि सीसीटीवी कैमरे की तस्वीर को दिखाते हुए कहा कि रोहित अपने चाचा के साथ मिलने आया था, लेकिन उसकी मंशा मिलने की नहीं थी। इसी कारण वह मिलने के बजाय इधर-उधर घूम रहा था और अनाप-शनाप बोल रहा था। इसके साथ ही एसपी ने कहा कि पुलिस ने कोर्ट से आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी करने के लिए गुहार लगायी है। चूंकि आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल की हत्या के दर्ज मुकदमें में परिजनों ने किसी पर भी आरोप नहीं लगाते हुए अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। इसी कारण पुलिस के अनुसंधान में नाम आये अपराधियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर रही है।

सीआईडी से कराई जाएगी जांच

डीएम शीर्षत कपिल अशोक ने रोहित की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच का कार्य सीआईडी को भेजा जा रहा है। जहां तक पुलिस ने मामले का अनुसंधान किया उसके आगे अब सीआईडी अनुसंधान कर मामले का खुलासा करेगी और आरोपियों को चिन्हित कर गिरफ्तार करेगी। दूसरी ओर डीएम शीर्षत कपिल अशोक ने घटना को दुखदायी बताते हुए पूरी घटना की रिपोर्ट सरकार को भेजने की बात कही है।

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