Alt news के फाउंडर जुबैर की पुलिस रिमांड आज हो रही खत्म, लेकिन राहत की नहीं कोई उम्मीद
दिल्ली हाईकोर्ट की एकल जज पीठ ने जुबैर की गिरफ्तारी और पुलिस रिमांड की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। पुलिस को सुने बगैर रिमांड से राहत देने से भी इनकार किया है...
Alt News के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर को मिली जमानत, सीतापुर वाले केस में सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत
नई दिल्ली। Alt न्यूज के को-फाउंडर और फैक्ट चेकर मोहम्म्द जुबैर ( Alt News co-founder Mohammad Zubair) को पुलिस रिमांड ( Police remand )से राहत मिलने की उम्मीद न के बराबर है। ऐसा इसलिए कि पुलिस रिमांड को चुनौती देने वाली अर्जी पर शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट ( Delhi High court ) की एकल जज पीठ में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने जुबैर ( Mohammad Zubair ) की गिरफ्तारी और पुलिस रिमांड की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर दिया है। HC ने पुलिस से 2 हफ्ते में जवाब मांगा है। वहीं जुबैर को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए भी 1 हफ्ते का वक्त मिल गया है। अब मामले में अब 27 जुलाई को सुनवाई होगी।
आप अपनी बात निचली अदालत में रखें
अब मोहम्मद जुबैर ( Mohammad Zubair ) की मामले में सुनवाई शनिवार दोपहर करीब 2 बजे पटियाला हाउस कोर्ट में होगी। दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव नरूला ने कहा कि पुलिस कस्टडी की अवधि पूरी होने के बाद चूंकि यह मामला शनिवार को निचली अदालत में सुना जाएगा तो आप उचित अदालत में अपनी बात क्यों नहीं रखते? उन्होंने ये भी कहा कि हम पुलिस का पक्ष सुने बगैर रिमांड से राहत नहीं दे सकते।
जस्टिस नरूला ने कहा कि चूंकि यह याचिका गुण-दोष के आधार पर है, इसलिए मुझे दूसरे पक्ष की सुनवाई करनी होगी। रिमांड कल खत्म हो रही है इसलिए यह मजिस्ट्रेट को तय करना है कि रिमांड बढ़ाई जाए या जमानत दी जाए।
जुबैर के वकील ने रिमांड का किया विरोध
मोहम्मद जुबैर ( Alt News co-founder Mohammad Zubair) की वकील वृंदा ग्रोवर ने अदालत को बताया कि यह मामला 2018 का है, लेकिन दिल्ली पुलिस ने मामले में अभी कार्रवाई की है। ग्रोवर ने दिल्ली पुलिस द्वारा जुबैर को बेंगलुरु ले जाने पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि उसे लाने ले जाने में पब्लिक का पैसा बेकार करने का क्या मतलब है जबकि यह बहुत अहम मामला नहीं है। ग्रोवर ने कोर्ट से कहा कि हम रिमांड ( Police remand ) का विरोध करते हैं।
छोटे मामले में एसजी के शामिल होने का मकसद क्या है?
वहीं दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि पुलिस और जांच एजेंसी सबूत जुटाने का प्रयास कर रही है। जुबैर के वकील ग्रोवर द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि अपराध कोई छोटा या बड़ा नहीं होता। इस पर ग्रोवर ने कहा कि इतने छोटे मामले में SG का शामिल होना बताता है कि इसके पीछे उद्देश्य क्या है।