Bheema-Koregaon Violence : 'सरकार आम आदमी के हितों की रक्षा नहीं कर सकी' कहने वाले शरद पवार फिर तलब किए गए, 5 मई को होगी पूछताछ; जानिए पूरा मामला

Bheema-Koregaon Violence : हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस जेएन पटेल की अगुवाई वाला दो सदस्यीय कमीशन एक1 जनवरी 2018 को कोरेगांव भीमा इलाके में हुई हिंसा की जांच कर रहा है। आपको बता दे कि घटना में एक शख्स की मौत गयी थी जबकि कई लोग जख्मी हो गए थे...

Update: 2022-04-28 09:15 GMT

Bheema-Koregaon Violence : 'सरकार आम आदमी के हितों की रक्षा नहीं कर सकी' कहने वाले शरद पवार फिर तलब किए गए, जानिए पूरा मामला, 5 मई को होगी पूछताछ

Bheema-Koregaon Violence : भीमा-कोरेगांव (Bheema-Koregaon) इन्‍क्‍वायरी कमीशन (Enquiry Commission) की ओर से एनसीपी चीफ (NCP Chief) शरद पवार (Sharad Pawar) को समन भेजा गया है। उन्हें आगामी 5 और 6 मई को कमीशन के सामने पेश होने के लिए कहा गया है। हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस जेएन पटेल (Justice JN Patel) की अगुवाई वाला दो सदस्यीय कमीशन एक जनवरी 2018 को कोरेगांव भीमा इलाके में हुई हिंसा की जांच कर रहा है। आपको बता दे कि घटना में एक शख्स की मौत गयी थी जबकि कई लोग जख्मी हो गए थे।

गौरतलब है कि कमीशन ने इससे पहले 23 व 24 फरवरी को शरद पवार को पूछताछ के लिए बुलाया था। उस दौरान पवार ने 21 फरवरी को कमीशन के दफ्तर जाकर सुनवाई को स्थगित करने की मांग की थी।

उनका कहना था कि अपना जवाब दाखिल करने के लिए उन्हें कुछ और वक्त की जरूरत है। कमीशन के सचिव ने कहा कि पवार ने कुछ दिनों पहले अपना अतिरिक्त हलफनामा दाखिल कर दिया था। फिलहाल हमने उन्हें लैटर ऑफ रिक्वेस्ट भेजा है, जिसमें कहा गया है कि वो 5 और 6 मई को कमीशन के सामने उपस्थित होकर अपना जवाब दाखिल करें।

आपको बता दें कि पवार ने 2018 में भी आयोग के समक्ष अपना हलफनामा दाखिल किया था। भीमा कोरेगांव हिंसा को लेकर उनका कहना था कि हिंदुत्व ग्रुप की इसमें भूमिका संदिग्ध है। लेकिन अपने हलफनामे में उनका कहना था कि वो इस स्थिति में नहीं हैं कि दावे के साथ कह सकें कि कौन से संगठन का हिंसा में हाथ था। पवार का कहना था कि ये दुख की बात है कि सरकार आम आदमी के हितों की रक्षा नहीं कर सकी।

वहीं दूसरी ओर बीते बुधवार 27 अप्रैल को कमीशन ने उस पुलिस अधिकारी गणेश मोरे से दोबारा पूछताछ की जिन्होंने हिंदुत्ववादी नेता मिलिंद एकबोते औक संभाजी भिंडे के मामले की जांच की थी। आपको बता दें कि घटना के दौरान गणेश मोरे पुणे ग्रामीण पुलिस में तैनात थे। घटना के समय वो धौड में बतौर सब डिवीजनल अफसर नियुक्त किए थे। मोरे दिसंबर 2018 में रिटायर हो चुके हैं। उन्हें एडवोकेट बीजी बानसोदे ने क्रास एग्जामिन किया जो दलित गवाहों की ओर से पैरवी कर रहे हैं।

आपको बता दें कि इस मामले में दलित कार्यकर्ता अनिता ने भिडें और एकबोते के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में एकबोते की गिरफ्तारी भी हुई थी। फिलहाल वो जमानत पर हैं। जबकि भिंडे को न तो गिरफ्तार किया गया और न ही पुलिस ने उसके खिलाफ कोई चार्जशीट दाखिल की है। 

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