भुखमरी सूचकांक में भारत की रैंक और गिरने पर मोदी सरकार ने आंकड़े को ही बता दिया झूठा, कहा छवि बिगाड़ने की कोशिश

जीएचआई 2022 ( GHI 2022 ) जारी होने के बाद केंद्र सरकार ने अपने एक बयान में कहा है कि कोरोना महामारी के दौरान सरकार के द्वारा किए गए प्रयासों को जान बूझकर नजरअंदाज किया गया है।

Update: 2022-10-16 04:13 GMT

भुखमरी सूचकांक में भारत की रैंक और गिरने पर मोदी सरकार ने आंकड़े को ही बता दिया झूठा, कहा छवि बिगाड़ने की कोशिश

नई दिल्ली। आयरलैंड व जर्मनी का गैर-सरकारी संगठन 'कंसर्न वर्ल्डवाइड और वेल्ट हंगर हिल्फ' ने एक दिन पहले ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2022 ( Global Hunger Index 2022 )  जारी किया था। अब इसको लेकर विवाद पैदा हो गया है। मोदी सरकार ( Modi Government ) ने जीएचआई ( GHI ) को स्वीकार करने से साफतौर से इनकार कर दिया है। साथ ही जीएचआई 2022 को भारत ( India ) की छवि खराब करने वाला करार दिया है।

गणना प्रणाली त्रुटिपूर्ण

ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या जीएचआई 2022 ( GHI 2022 ) सही तथ्यों पर आधारित नहीं है, या फिर सबकुछ जानते हुए भी केंद्र सरकार सच से मुंह मोड़ रही है। मोदी सरकार ( Modi government ) कहीं ये तो नहीं कहना चाह रही है कि जो देश दुनिया को खाद्य उत्पादों को बड़े पैमाने पर निर्यात करता है, भला वहीं की आबादी भुखमरी के साये में हो, ये कैसे हो सकता है।

दरअसल, 15 जुलाई को आयरलैंड व जर्मनी के गैर-सरकारी संगठन 'कंसर्न वर्ल्डवाइड और वेल्ट हंगर हिल्फ' ने वैश्विक भूख सूचकांक 2022 ( Global Hunger Index 2022 )  जारी किया था। जीएचआई में भारत को 121 देशों में 107वें नंबर पर रखा गया था, लेकिन केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि भारत को 107वें स्थान पर रखना देश की छवि ( एक राष्ट्र जो अपनी आबादी की खाद्य सुरक्षा और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता है ) को खराब किए जाने के निरंतर अभियानों का हिस्सा है। केंद्र ने कहा कि सूचकांक गंभीर गणना प्रणाली मुद्दों से ग्रस्त है और इसकी गणना त्रुटिपूर्ण है।

केंद्र सरकार की ओर से महिला और बाल विकास मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जुलाई 2022 में यह मामला एफआईईएस (खाद्य असुरक्षा अनुभव पैमाना) के सामने उठाया गया था। हमने कहा था कि एफआईईएस सर्वेक्षण मॉड्यूल डेटा के आधार पर इस तरह के अनुमानों का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि ऐसे सांख्यिकीय निष्कर्ष गुण-दोष पर आधारित नहीं होंगे।

भारत के ऐतराज पर एफएओ ने आश्वासन दिया था कि इस मुद्दे पर और भी काम किया जाएगा। इस तरह के तथ्यात्मक मुद्दों के बावजूद वैश्विक भूख सूचकांक रिपोर्ट का प्रकाशन खेदजनक है। इस बात को आधार बनाते हुए मोदी सरकार यह बताने में जुटी है कि इस रिपोर्ट के जरिए देश की छवि बिगाड़ने की कोशिश की गई है।

केंद्र का रुख सच से मुंह मोड़ने जैसा तो नहीं

दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि मोदी सरकार का यह रुख कहीं सच से मुंह मोड़ना जैसा तो नहीं है। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि भारत में गरीबी तो बड़े पैमाने पर है। इस बात से आप इनकार नहीं कर सकते, लेकिन केंद्र सरकार का कहना है कि सरकार की ओर से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसके बावजूद हर साल की तरह इस साल भी आयरलैंड व जर्मनी के गैर-सरकारी संगठन 'कंसर्न वर्ल्डवाइड और वेल्ट हंगर हिल्फ' ने गलत रिपोर्ट जारी की है।

रिपोर्ट को गलत बताने के पीछे ये है तर्क

केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि भुखमरी की यह रिपोर्ट गलत मापदंड और गंभीर कार्यप्रणाली मुद्दों से ग्रस्त है। इसके साथ ही इसको केवल 3 हजारों लोगों पर सर्वे करके तैयार किया गया है, जिसका सैंपल साइज बहुत ही छोटा है। इसके अलावा भारत सरकार ने कहा कि इस रिपोर्ट में न केवल जमीनी हकीकत से अलग है, बल्कि कोरोना महामारी के दौरान खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार के द्वारा किए गए प्रयाशों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया है।

भुखमरी के मामले में ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट में भारत को सभी पड़ोसी देशों से पीछे बताया गया है। इस रिपोर्ट में पाकिस्तान को 99वीं, श्रीलंका को 64वीं, नेपाल को 81वीं और बांग्लादेश को 84वीं रैंकिंग दी गई है। जीएचआई में बीते दिन शनिवार 15 अक्टूबर को साल 2022 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट में 121 को शामिल करते हुए भारत को 107 वीं रैकिंग दी गई है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स रिपोर्ट ने भारत को पड़ोसी देशों नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान से भी पीछे बताया है, जिसको लेकर भारत सरकार की ओर बयान सामने आया है। सरकार ने हर साल की तरह इस साल भी ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट को खारिज करते किया है।

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