BJP Foundation Day : क्या 1980 में बनी पार्टी BJP ने बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद देश में अपनी जड़ें मजबूत की? ये है बीजेपी के उतार-चढ़ाव की कहानी

BJP Foundation Day : एक लंबे उतार-चढ़ाव और असफलताओं के बीच पार्टी ने आज देश की राजनीति (Politics) में वह मुकाम हासिल कर लिया है जिसकी कभी पार्टी नेताओं ने कल्‍पना भी नहीं की थी...

Update: 2022-04-06 10:15 GMT

BJP Foundation Day : क्या 1980 में बनी पार्टी BJP ने बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद देश में अपनी जड़ें मजबूत की? ये है बीजेपी के उतार-चढ़ाव की कहानी

BJP Foundation Day : भारतीय जनता पार्टी (BJP) आज अपना 42वां स्‍थापना दिवस (Foundation Day) मना रही है। आज यह पार्टी देश की संसद में प्रतिनिधित्‍व और सबसे अधिक सदस्‍यता दोनों ही मापदंडों पर देश की सबसे बड़ी पार्टी है। सदस्‍यता के मामले में तो भाजपा ने दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी चीन की कम्‍यूनिस्‍ट पार्टी  (Communist Party of China) को भी पछाड़ दिया है। साल 1980 में पार्टी की स्‍थापना से आज तक भाजपा ने एक लंबा सफर तय किया है।

एक लंबे उतार-चढ़ाव और असफलताओं के बीच पार्टी ने आज देश की राजनीति (Politics) में वह मुकाम हासिल कर लिया है जिसकी कभी पार्टी नेताओं ने कल्‍पना भी नहीं की थी। इस पार्टी ने ना केवल अपनी विचारधारा (Ideology) की छाप अपने वोटरों पर छोड़ी है बल्‍कि आज तो देश की राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय नीतियां भी इस पा‌र्टी की विचारधारा से प्रभावित होकर बनायी जा रही है।

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने चार राज्यों में जीत दर्ज की है

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों  (Assembly Elections) में पार्टी ने पांच राज्‍यों में से चार राज्‍यों में सत्‍ता में वापसी कर एक बार फिर अपनी मजबूती का परिचय दिया है। आइए आज भाजपा के 42वें स्‍थापना दिवस के मौके पर दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा की सफलता और असफलताओं पर एक नजर डालते हैं।

ऐसे तो भारतीय जनता पार्टी की स्थापना 06 अप्रैल 1980 को किया गया था। पर भाजपा की विचारधारा का श्रीगणेश हो गया था साल 1951 में ही जब कांग्रेसी नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने पंडित जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व से असहमति के बाद के बाद उनके खिलाफ बिगुल फूंक दिया था। उसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंघ की नींव रखी थी।

भारतीय जनसंघ की स्थापना में श्यामा प्रसाद मुखर्जी (Shyama Prasad Mukherjee) को साथ मिला था देश की हिंदूवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का। इसे कांग्रेस (Congress) की नीतियों का मजबूती से विरोध करने के लिए स्थापित किया गया था। इस पार्टी की विचारधारा के मूल में यह था कि हिंदुओं की मूल पहचान और उसकी संस्कृति की रक्षा की जाए। भारजीय जनसंघ का उदय देश में ऐसे समय पर हुआ था जब ​कांग्रेस ही भारतीय राजनीति का एकमात्र चेहरा थी।

1952 के लोकसभा चुनावों में जनसंघ को मिली थीं केवल 3 सीटें

भारतीय जनसंघ 1952 के लोकसभा चुनावों (General Elections) में पहली बार कांग्रेस पार्टी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरी पर उसे ​सिर्फ मामूली सफलता ही हासिल हो पायी। 1952 में हुए देश के पहले लोकसभा चुनावों में भारतीय जनसंघ को केवल 3 सीटें ही जीत सका।

जब साल 1975 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल (Emergency) लगाने की घो​षणा कर दी जो भारतीय जनसंघ (BJS) के कांग्रेसी शासन का पुरजोर विरोध किया था। जब देश से इमरजेंसी हटायी गई तो भारतीय जनसंघ और देश की कई दूसरी पार्टियों ने मिलकर जनता पार्टी बनायी।

साल 1977 के आम चुनावों में जनता पार्टी को बहुमत मिला और कभी इंदिरा की सरकार (Indira Government) में वित्त मंत्री रहे मोरारजीदेसाई (Morarji Desai )देश के प्रधानमंत्री (Prime Minister) चुने गए। हालांकि जनता पार्टी के घटक दलों के बीच मनमुटाव के बीच मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद चौधरी चरण सिंह थोड़े समय के लिए पीएम चुने गए पर साल 1980 आते-आते उनकी सरकार भी गिर ​गई।

06 अप्रैल 1980 को रखी गयी थी भाजपा की नींव, 1984 में सिर्फ दो सांसद चुने गए

1980 में देश की सत्ता में इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी की वापसी हो गयी। वहीं दूसरी ओर जनता पार्टी पूरी तरह बिखड़ कर रह गयी। उसके बाद जनता पार्टी के वे नेता जो कभी भारतीय जनसंघ में भी रहे थे उन लोगों ने मिलकर 06 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की स्थापना की थी। हालांकि भाजपा को भी अपने पहले आम चुनावों में साल 1984 में लोकसभा की सिर्फ दो सीटों से ही संतोष करना पड़ा।

भाजपा की स्थापना की शुरूआत में जब अटल बिहार वाजपेयी (Atal Bihar Vajpayee) पहले अध्यक्ष चुने गए थे तो पार्टी का हिदुत्ववादी राष्ट्रवाद पर कोई खास जोर नहीं था। पार्टी उस समय गांधी के समाजवाद को ही अपना आदर्श मानकर रही थी। पर 1984 के लोकसभा चुनावों में केवल दो सीटें मिलने के बाद पार्टी ने अपनी रणनीति बदलनी शुरू की। इसी बीच 80 के दशक में देश में कई जगह हिन्दू-मुस्लिम दंगों की खबरें अखबारों की सुखियां बन रही थी। यहीं पार्टी को अपने राज​नीतिक उत्थान की राह दिखी।

राम मंदिर आंदोलन को भाजपा ने चुनावी मुद्दा बनाया

राम मंदिर का मामला उस समय खासा चर्चित था। भाजपा ने देश में अपनी राजनीतिक राह को आसान बनाने के लिए इस मुद्दे को लपक लिया। पार्टी में लाल कृष्ण आडवाणी का युग शुरू हुआ। फिर आया 06 दिसंबर 1992 का दिन जब अयोध्या में भाजपा और वीएचपी की ओर से आयोजित कारसेवकों की रैली के बाद 16वीं सदी में बनी बाबरी मस्जिद को कारसेवकों ने ध्वस्त कर दिया।

यही वह दिन था जब भाजपा भारतीय राजनीति में अपने आगे के रास्ते खोल चुकी थी। बाबरी विध्वंस के बाद देश खासकर उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर दंगे हुए। पर राम मंदिर आंदोलन की अगुआई पर भाजपा ने देश के बड़े वर्ग विश्वास जीत लिया था।

1996 के आम चुनावों में भी पार्टी की उम्मीदों पर फिरा पानी, 13 दिन में ही गिर गयी 'अटल' सरकार

पार्टी 1996 के आम चुनावों में सत्ता पाने की टकटकी लगाए हुई थी। पर 1996 के आम चुनावों में किसी पार्टी को बहुत नहीं मिला। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी तो बन गयी पर सत्ता में नहीं आ सकी। हालां​कि देश की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राष्ट्रपति ने भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया। अटल बिहारी वाजपेयी देश में भाजपा के पहले प्रधानमंत्री बने पर बहुमत सा​बित नहीं कर पाने के कारण उनकी सरकार 13 दिन में ही गिर गयी।

1998 से 2004 तक देश की सत्ता पर काबिज रही भाजपा

फिर भाजपा को सत्ता नसीब हुआ साल 1998 में। साल 1998 से 2004 तक तमाम राजनीतिक उतार-चढ़ावों के बीच भाजपा एनडीए गठबंधन के तहत सरकार चलाने में सफल रही। पर साल 2004 में कांग्रेस ने सत्ता में शानदार वापसी कर ली और मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री चुन लिए गए। अगले दस साल तक देश में फिर कांग्रेस का शासन रहा। इस बीच भाजपा में प्रधानमंत्री बनने का सपना पाले लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) धीरे-धीरे गौण होते चले गए।

2014 में भाजपा सत्ता में लौटी, नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने

साल 2014 के आम चुनावों के पहले भारतीय जनता पार्टी में उदय हुआ नरेंद्र मोदी का। नरेंद्र मोदी जब 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे उसके कुछ समय बाद ही वहां दंगे शुरू हो गए थे। इन दंगों के बाद नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति में एक हीरो की तरह उभरे थे। 2014 के आम चुनावों से पहले भाजपा ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को बनाया। उनके चेहरे पर भरोसा जताते हुए देश के लोगों ने उन्हें प्रधानमंत्री चुन लिया। भाजपा को 2014 के चुनावों मे पहली बार बहुमत मिला। पार्टी ने अकेले 282 सीटें जीतीं।

पांच साल बाद 2019 के आम चुनावों में भी पार्टी ने अपनी जीत का सिलसिला दुहराया। 2019 में पार्टी ने खुद को और मजबूत बनाते हुए 303 लोकसभा सीटों पर कब्जा कर लिया। 2014 के बाद भाजपा ने देश के कई राज्यों में अपनी सरकार बनायी। इसे मोदी लहर का नाम दिया गया।

नरेंद्र मोदी युग में भाजपा को कहा जाने लगा चुनाव जीतने की मशीन

मोदी युग में भाजपा ने खुद को इतना मजबूत बनाया कि उसे चुनाव जीतने की मशीन कहा जाने लगा। हालां​कि देश में भाजपा की विचारधारा को लेकर कुछ लोग हमेशा सवाल उठाते रहे हैं। भाजपा पर सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने का आरोप हमेशा लगते रहे हैं। पर देश की बहुसंख्यक आबादी में अपनी पैठ के कारण यह पार्टी चुनावों में सफल साबित हो रही है।

ऐसे में हम कह सकते हैं कि जो विचारधारा श्यामा प्रसाद मुखर्जी के समय में अस्तित्व में आया साल 1980 में भाजपा के बनने के बाद उसे सींचना शुरू किया गया और वह 2014 से 2022 के बीच के मोदी युग मे वटवृक्ष का रूप ले चुका है पर पार्टी के विरोधी अब भी यह कहते हैं कि पार्टी ने पूरे देश की छवि को ही बदल कर रख दिया है।

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