Lokpal of India: बिना जांच और अभियोजन विंग के 3 साल से चल रहा लोकपाल, अभी तक एक भी मामले में नहीं मिली मुकदमा चलाने की अनुमति
Lokpal of India: ज्यादातर शिकायतों को शुरुआती जांच के बाद सीबीआई और सीवीसी को भेज दी जाती है, 23 मार्च को 2019 को देश के पहले लोकपाल को राष्ट्रपति ने दिलाई थी शपथ
Lokpal of India: बिना जांच और अभियोजन विंग के 3 साल से चल रहा लोकपाल, अभी तक एक भी मामले में नहीं मिली मुकदमा चलाने की अनुमति
Lokpal of India: देश के पहले लोकपाल के शपथ लिये तीन वर्ष बीत गए, लेकिन इन तीन वर्षों में लोकपाल के दो सबसे मत्वर्पूण विंग के प्रमुख को नियुक्त नहीं किया गया है। नतीजा लोकपाल में आने वाली शिकायतों और उस पर होने वाली कार्रवाई पर असर पड़ रहा है। पिछले तीन वर्ष में एक भी ऐसा मामला नहीं आया है जिसमें आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी जाए। लोकपाल के पास एक सरकारी चपरासी से लेकर कैबिनेट सचिव और एक सांसद से लेकर प्रधानमंत्री के उपर लगे आरोपों की जांच करने का अधिकार है।
लोकपाल की दो प्रमुख विंग इन्क्वायरी (जांच) और प्रॉसीक्यूशन (अभियोजन) के प्रमुख के पद खाली पड़े हैं। इसकी वजह से ज्यादातर शिकायतों को शुरूआती जांच के बाद आगे की जांच के लिए मामले को सीबीआई और सीवीसी को स्थानांतरित कर दी जाती है, हालांकि यह अधिकार लोकपाल के पास है कि वह चाहे तो स्वंय जांच करे या दूसरी जांच एजेंसी को जांच सुपुर्द कर दे।
जानकारी के मुताबिक जांच और अभियोजन विंग के प्रमुख के पद पर अतिरिक्त सचिव स्तर का अधिकारी होना चाहिए, लेकिन इस स्तर के एक भी अधिकारी की नियुक्ति पिछले तीन वर्ष में नहीं हुई है। हालांकि इस मामले में लोकपाल के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जांच विंग और अभियोजन विंग के खाली रहने से शिकायतों की जांच और कार्रवाई पर कोई असर नहीं पड़ रहा है, क्योंकि दूसरे अधिकारी को इस काम में लगाया गया है।
लोकपाल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में लोकपाल में एक भी ऐसा मामला ही सामने नहीं आया है जिसमें मुकदमा चलाने की अनुमति दी जाए। वहीं समूह ग और घ कर्मी के खिलाफ आने वाली शिकायतों की शुरूआती जांच के बाद आगे की जांच और कार्रवाई के लिए केन्द्रीय सतर्कता आयोग को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दी जाती है।
लोकपाल में चेयरमैन, चार न्यायिक सदस्यों और चार गैर-न्यायिक सदस्यों के अलावा दिसंबर 2021 तक अखिल भारतीय सेवाओं और सेंट्रल सर्विस ग्रुप ए के जिन अधिकारियों ने काम किया, उसमें से एक भी अधिकारी अतिरिक्त सचिव स्तर के नहीं रहे। सचिव और संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी ने लोकपाल में सेवा जरूर दे रहे हैं। बाकी जो अधिकारी रहे उनमें उप सचिव, अवर सचिव, सीनियर पीपीएस और पीपीएस रैंक के अधिकारी ही काम कर रहे हैं।
गौरतलब है कि 23 मार्च 2019 को देश के पहले लोकपाल के तौर पर जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष को राष्ट्रपति ने शपथ दिलाई थी। वर्ष-2013 में लोकपाल एक्ट बनने के बाद वित्त मंत्रालय की ओर से लोकपाल और डीओपीटी विभाग में लोकपाल डिवीजन के लिए 141 पद का प्रस्ताव आया। इसमें से 84 पद सृजित किए गए। 84 में से 70 पद लोकपाल में और 14 पद डीओपीटी की लोकपाल डिवीजन के लिए थे। इन 84 नियुक्त अधिकारियों और कर्मचारियों में से 48 कर्मचारी एमटीएस रैंक के थे। वर्ष-2019-20 में लोकपाल में 1427, वर्ष-2020-21 में 2355 और 2021-22 में 31 जनवरी 22 तक भ्रष्टाचार की 4280 शिकायतें आई।
प्राथमिक जांच के बाद शिकायतें सीबीआई और सीवीसी को भेज दी जाती हैं। हालांकि लोकपाल के पास यह अधिकार है कि वह केस स्थानांतरित कर सके। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के सर्वे के मुताबिक दुनिया के 180 देशों में भ्रष्टाचार के मामले में भारत 85वें स्थान पर है।
फॉर्मेट में शिकायतें नहीं होने पर भी अब होगी कार्रवाई
लोकपाल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहले फॉर्मेट में शिकायतें नहीं आती थी तो शिकायतों पर सुनवाई नहीं होती थी, लेकिन अब यह निर्णय लिया गया है कि यदि सही तरीके से शिकायतें नहीं भी आती हैं तब भी शिकायतकर्ता से बातचीत करके उसे सही फॉर्मेट में किया जाएगा और शिकायतों पर कार्रवाई होगी। पहले सही फॉर्मेट में शिकायतें नहीं आने पर सुनवाई नहीं होती थी।