Hate Speech Case : दिल्ली हाईकोर्ट के जज बोले- अगर हंसते हुए कही जाए कोई बात तो अपराध नहीं

अदालत सीपीआई (एम) नेता वृंदा करात की निचली अदालत के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और सांसद परवेश वर्मा के खिलाफ उनके कथित अभद्र भाषा के लिए प्राथमिकी दर्ज करने के आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया था....

Update: 2022-03-26 13:50 GMT

Hate Speech Case : दिल्ली हाईकोर्ट के जज बोले- अगर हंसते हुए कही जाए कोई बात तो अपराध नहीं

Delhi High Court on Hate Speech : पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों से जुड़े कथित हेट स्पीच (Hate Speech) से संबंधित एक मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने शुक्रवार (25 March) को कहा है कि किसी चुनाव के समय दिया गया भाषण सामान्य दिनों में दिए ​गए भाषण से अलग होता है और बिना किसी इरादे के कभी-कभी सिर्फ 'माहौल' बनाने के लिए भी बातें कही जाती हैं। जस्टिस चंद्रधारी सिंह ने कहा कि अगर मुस्कराहट के साथ कुछ कहा जाता है, तो कोई अपराध नहीं है, लेकिन अगर कुछ आपत्तिजनक कहा जाता है, तो यह अपराध की श्रेणी में आ सकता हैं।

अदालत सीपीआई (एम) नेता वृंदा करात की निचली अदालत के आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और सांसद परवेश वर्मा के खिलाफ उनके कथित अभद्र भाषा के लिए प्राथमिकी दर्ज करने के आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया था। माकपा नेता वृंदा करात ने हाईकोर्ट में याचिका डालकर मोदी सरकार के मंत्री अनुराग ठाकुर पर केस दर्ज करने की मांग की थी।

जस्टिस चंद्र धारी सिंह ने अपनी टिप्पणी में ये भी कहा कि चुनाव के समय में दी गई स्पीच को आम समय में कही बात से नहीं जोड़ा जा सकता। चुनाव के समय अगर कोई बात कही जाती है तो वो माहौल बनाने के लिए होती है। लेकिन आम समय में ये चीज नहीं होती। उस दौरान माना जा सकता है कि आपत्तिजनक टिप्पणी माहौल को भड़काने के लिए की गई थी।

आपको बता दें कि साल 2020 में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान अनुराग ठाकुर ने आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए एक समुदाय विशेष के खिलाफ गोली मारो… जैसी टिप्पणी की थी। इस पर बवाल मचा था। बृंदा करात का कहना था कि केंद्रीय मंत्री का वक्तव्य एक समुदाय विशेष और उसके खिलाफ हिंसा के लिए लोगों को उकसाने जैसा कृत्य था। उन्होंने कोर्ट से इस मामले में आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज करके कार्रवाई करने की गुहार लगायी थी।

उधर इस खबर के मीडिया में आने के बाद राजनीतिक हलकों में यह बात चर्चा का ​विषय बन गयी है। इस मामले में हाईकोर्ट की ओर से की गयी टिप्पणी कुछ नेताओं को रास नहीं आयी है। इस मामले में एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस खबर को टैग करते हुए अपने ट्विटर हैंड पर लिखा है कि, तेरा मुस्कुराना गजब हो गया। वो नाजुक लबों से मोहब्बत की बातें, हम ही को सुनाना गजब हो गया। अपने इस लाईन के आगे उन्होंने कोष्ठक में लिखा है (गोली मारो…)।

हालांकि इस ट्वीट के बाद लोगों ने खुद औवैसी की भी ट्रोलिंग शुरू कर दी है। लोगों ने एआईएमआईएम नेता को निशाना बनाते हुए लिखा है कि जो नेता जिस समाज का है उसे ही ठग रहा है। आप भी उन्हीं में से एक हो। एक और यूजर ने लिखा कि आपने यह कैसे कर दिया? चलो अभी शायद आप और आपके भाई बच जाएंगे।

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