Pegasus Spyware Scandal: पेगासस पर यूरोपियन पार्लियामेंट की जांच
Pegasus Spyware Scandal: पेगासस (Pegasus) पर भारत सरकार भले ही अपने देश के लोगों को और सर्वोच्च न्यायालय को लगातार गुमराह करती रहे, पर दूसरे अनेक देशों में यह एक जीवंत मुद्दा है|
वाईएसआर कांग्रेस ने पेगासस स्पाइवेयर पर तूल दिया तो चंद्रबाबू नायडू की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
महेंद्र पाण्डेय की रिपोर्ट
Pegasus Spyware Scandal: पेगासस (Pegasus) पर भारत सरकार भले ही अपने देश के लोगों को और सर्वोच्च न्यायालय को लगातार गुमराह करती रहे, पर दूसरे अनेक देशों में यह एक जीवंत मुद्दा है| यूरोपियन डाटा प्रोटेक्शन (European Data Protection Supervisor) ऑफिस की तरफ से एक बयान में कहा गया है कि अपने नागरिकों के मौलिक अधिकार और व्यक्तिगत आजादी बचाने के लिए यूरोपियन यूनियन के सभी सदस्य देशों को पेगासस के विकास और तैनाती को प्रतिबंधित करना ही होगा| कुछ दिनों पहले ही यूरोपियन पार्लियामेंट (European Parliament) ने पेगासस के उपयोग से सम्बंधित जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय कमेटी का गठन किया है, जिसमें सभी पार्टियों के सदस्य हैं| यह कमेटी जांच करेगी कि क्या किसी सदस्य देश की सरकार ने इसके द्वारा नागरिकों, पत्रकारों, विपक्षी नेताओं या मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी की है? इस कमेटी के निशाने पर सबसे पहले हंगरी और पोलैंड की सरकारें हैं, जहां ऐसी जासूसी की खबरें कुछ समय से चर्चा में हैं|
हंगरी (Hungary) में घोषित निरंकुश सरकार है और अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार वहां कुल 6 लोगों का मोबाइल फोन की जासूसी पेगासस से की गयी थी, इसमें चार पत्रकार थे| हंगरी की सिविल लिबर्टीज यूनियन (Civil Liberties Union) नामक संस्था इस 6 पीड़ितों की तरफ से हंगरी सरकार के विरुद्ध कानूनी लड़ाई की तैयारी कर रही है| सिविल लिबर्टीज यूनियन इजराइल में भी एक इस्राईली मानवाधिकार मामलों के विशेषज्ञ वकील एइतय मैक (Eitay Mack) की मदद से एनएसओ ग्रुप के विरुद्ध मुक़दमा दायर करने की तैयारी कर रही है|
पोलैंड (Poland) में पेगासस मामले का खुलासा होते ही विपक्षी सांसद जनता की ऐसी जासूसी रोकने के लिए एक नया क़ानून की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं| वहां हालां कि गठबंधन सरकार के सबसे बड़े दल लॉ एंड जस्टिस ने अपने आप को इस पूरे मामले से अलग रखा है फिर भी पूरे मामले की जांच के लिए सांसदों की एक कमेटी का गठन किया है और सरकार ने स्वीकार भी किया है कि पेगासस स्पाईवेयर को खरीदा गया है|
यूरोपियन पार्लियामेंट द्वारा कमेटी का गठन एक दुर्लभ घटना है, शायद ही किसी और मामले की जांच के लिए कमेटी बनाई गयी हो| इस कमेटी को अत्यधिक अधिकार दिए गए हैं और यह देशों की सरकारों से, ख़ुफ़िया एजेंसियों से, प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से और जिनपर इससे जासूसी की आशंका है, उनसे सीधे बात करेगी, और रिपोर्ट अगले वर्ष प्रस्तुत करेगी|
इजराइल (Israel) में सरकार जांच कर रही है कि क्या वहां की पुलिस ने आम नागरिकों की जासूसी पेगासस से की है| वहां की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस ने 26 नागरिकों की जासूसी पेगासस की मदद से की थी, इसमें कुछ ऐसे भी थे जो पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू के खिलाफ गवाह थे| इजराइल के क़ानून के अनुसार पुलिस किसी की भी जासूसी न्यायालय के आदेश के बिना नहीं कर सकती है, और पुलिस ने पेगासस को खरीदने के लिए सरकार से अनुमति नहीं ली है| जांच के बीच में ही इजराइल पुलिस के मुखिया ने बयान दिया है कि उनके संस्थान में पेगासस है ही नहीं| जांच के बाद बताया गया है कि इजराइल पुलिस ने न्यायालय के आदेश के बाद 26 में से केवल 3 लीगों की जासूसी की थी, और इसमें पेगासस का इस्तेमाल नहीं किया गया था| इसके बाद की स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह जांच रिपोर्ट पुलिस को क्लीन चिट देने की तैयारी है और इसके बाद पुलिस सामान्य नागरिकों की जासूसी पेगासस की मदद से धड़ल्ले से करेगी|
पेगासस के सन्दर्भ में कुछ विचित्र तथ्य हैं – कोई भी देश स्वीकार नहीं करता कि उसके पास पेगासस है, एनएसओ ग्रुप इसके बारे में कुछ नहीं बताता, किसी भी देश में कोई ऐसा उदाहरण नहीं मिलता कि इसका उपयोग किसी आतंकवादी या अपराधियों की जासूसी के लिए किया गया हो, पर दूसरी तरफ दुनिया के तमाम पत्रकारों, वकीलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं की जासूसी के प्रमाव मीडिया संस्थानों ने दुनिया के सामने रखे हैं| इससे इतना तो जाहिर है कि दुनिया में इस समय ऐसी सरकारों की बहुलता है जो अपने ही सामान्य नागरिकों से सबसे अधिक डरती हैं|
संभवतः अमेरिका की जांच एजेंसी, फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टीगेशन (Federal Bureau of Investigation) ऍफ़बीआई, दुनिया ने अकेली संस्था होगी जिसने स्वीकार किया है कि उसके पास पेगासस है| ऍफ़बीआई ने साथ ही कहा है कि उसने आज तक इससे किसी की जासूसी नहीं की है और ना ही भविष्य में ऐसा करने का कोई इरादा है| इसके अनुसार उसने पेगासस को महज परीक्षण के लिए खरीदा है| न्यूयॉर्क टाइम्स ने वर्ष 2019 में ही ऍफ़बीआई के पास पेगासस होने का खुलासा किया था| इसी रिपोर्ट में ऍफ़बीआई के सूत्रों से बताया गया था कि पेगासस में ऐसे सेंसर लगाए गए हैं जिससे इजराइल में स्थित एनएसओ कार्यालय से भी इसकी मोनिटरिंग की जा सकती है, इसे कहाँ स्थापित किया गया है इसका पता लगाया जा सकता है| यदि यह तथ्य सही है तो जाहिर है पेगासस भले ही सरकारें अपने देशों में जासूसी के लिए महंगी कीमतों पर खरीदती हों, पर उन सभी देशों की जासूसी एनएसओ कंपनी भी कर सकती है|
अमेरिका के ही दूसरे समाचारपत्र वाशिंगटन पोस्ट (Washington Post) ने दावा किया है कि भीमा कोरेगांव मामले में जेल में डाले गए रोना विल्सन (Rona Wilson) के लैपटॉप को हैक करने में दो हैकर शामिल थे| कुछ समय पहली ही इसी समाचारपत्र ने दावा किया था कि गिरफ्तारी से तीन महीनों पहले से रोना विल्सन के फोन की और उनकी जासूसी पेगासस द्वारा की जा रही थी| रोना विल्सन के वकीलों द्वारा एमनेस्टी इन्टरनेशनल के सिक्यूरिटी लैब (Security Lab of Amnesty International) को उनके आई-फोन के 2 बैक-अप उपलब्ध कराये गए थे, जिसके गहन फिरेंसिक विश्लेषण का निष्कर्ष है कि जुलाई 2017 में और फिर फरवरी-मार्च 2018 में पेगासस की मदद से रोना विल्सन की जासूसी की गयी है| इस जासूसी सॉफ्टवेयर को फोन में 15 एसएमएस द्वारा डाला गया था| इनमें से किसी भी एसएमएस को खोलने पर यह सॉफ्टवेयर स्वयं फ़ोन में इंस्टाल हो सकता था| जिन दो हैकरों ने रोना विल्सन की जासूसी की थी, उनमें एक का नाम "मॉडिफाइड एलीफैंट" है जो भारत सरकार के इशारे पर काम करती है, और इसके द्वारा देश में और विदेश में बड़े अनेक मोदी आलोचकों की जासूसी की गयी है|
पेगासस पर चर्चा भारत छोड़कर दुनियाभर में चल रही है| यहाँ यह राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न है – शायद ही कभी कोई न्यायालय यह पूछने की हिम्मत करे कि जिस देश के नागरिक ही अपनी सरकार से सुरक्षित नहीं है वहां राष्ट्रीय सुरक्षा के क्या मायने हैं?