Gujarat Coal Scam : गुजरात में करीब 6 हजार करोड़ रुपए का बड़ा कोयला घोटाला, राहुल गांधी ने पूछा क्या इस पर प्रधान 'मित्र' मंत्री जी कुछ कहेंगे?
Gujarat Coal Scam : कोल इंडिया से जिन उद्योगों के नाम पर कोयला निकाल गया वह उन उद्योगों तक पहुंची ही नहीं, शिहोर के उद्योग में जय जगदीश एग्रो इंडस्ट्रीज को लाभार्थी दिखाया गया है जबकि इस इंडस्ट्रीज जगदीश चौहान ने बताया कि उन्हें तो यह भी नहीं पता कि सरकार से हमें कोई कोयला मिलता है....
( प्रतीकात्मक तस्वीर)
Gujarat Coal Scam : गुजरात में करीब छह हजार करोड़ रुपये का एक बड़ा कोयला घोटाला (Coal Scam) सामने आया है। कोल इंडिया की विभिन्न खदानों से निकाला गया कोयल उन उद्योगों तक नहीं पहुंचा है जिनके लिए उसे निकाला गया था। खबरों के मुताबिक गुजरात सरकार की कई एजेंसियों ने राज्य की स्मॉल और मीडियम स्तर की इंडस्ट्रीज को कोयला देने के बजाय इसे दूसरे राज्य के उद्योंगों को ज्यादा कीमत पर बेचकर पांच से छह हजार करोड़ रुपये का घोटाला किया है। वहीं इस मामले पर सरकारी विभाग के अधिकारियों, कोयला ट्रांसपोर्ट से जुड़े अधिकारी नो कमेंट कहकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
दरअसल दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि उसे दस्वावेज मिले हैं जिसके मुताबिक अबतक कोल इंडिया (Coal India) की खदानों से गुजरात के व्यापारियों, छोटे उद्योगों के नाम पर 60 लाख टन कोयला भेजा गया है। इसकी औसत कीमत 3 हजार रुपये प्रति टन के हिसाब से 1800 करोड़ रुपये होती है लेकिन इसे व्यापारियों और उद्योगों को बेचने के बजाय 8 से 10 हजार रुपये प्रति टन की कीमत पर अन्य राज्यों में बेचकर कालाबाजारी की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक इसमें कुछ डमी या लापता एजेंसियों व गुजरात सरकार के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत है। इस मामले पर केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय के सचिव अनिल जैन से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एजेंसियों को कोयला दिया जाता है। इसके बाद हमारी भूमिका पूरी हो जाती है।
वहीं कोल इंडिया के निदेशक सत्येंद्र तिवारी ने कहा कि एजेंसियों को नियुक्त करना राज्य सरकार के उद्योग विभाग की जिम्मेदारी है। इस संबंध में कोई भी मामला आए तो राज्य के गृह विभाग के ध्यान में लाया जाना चाहिए। इसमें जरूरी सबूत भी शामिल करने चाहिए।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोल इंडिया से जिन उद्योगों के नाम पर कोयला निकाल गया वह उन उद्योगों तक पहुंची ही नहीं। शिहोर के उद्योग में जय जगदीश एग्रो इंडस्ट्रीज को लाभार्थी दिखाया गया है जबकि इस इंडस्ट्रीज जगदीश चौहान ने बताया कि उन्हें तो यह भी नहीं पता कि सरकार से हमें कोई कोयला मिलता है। जगदीश ने कहा, अभी तक इस बारे में हमसे कोई संपर्क नहीं किया गया। हम तो स्थानीय बाजार से कोयला खरीदते हैं।
जगदीश चौहान की तरह ए एंड एफ डिहाइड्रेट फूड्स के शानू बादामी ने भी कहा कि ऐसा कोई कोयले का जत्था हमें कभी नहीं मिला है। हम अपनी जरूरत का ज्यादातर कोयला जीएमडीसी की खदानों से खरीदते हैं या हम आयातित कोयला खरीदते हैं। कोयला अब हमारे लिए महंगा पड़ता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कोल इंडिया को भेजी गई जानकारी पूरी तरह से झूठी निकली है। रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात सरकार द्वारा नियुक्त की गई एजेंसी गुजरात कोल कोक ट्रेड एसोसिएशन के निदेशक अली हसनैन दोसानी ने बताया कि हम अपने अधिकांश कोयले की आपूर्ति दक्षिण गुजरात के कपड़ा उद्योगों को करते हैं। लेकिन साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के जितेंद्र वखारिया ने कहा कि वह इस धंधे में 45 साल से हैं और उनके इस योजना के तहत कभी किसी भी प्रकार का कोयला नहीं मिला।
वहीं इस मुद्दे को लेकर अब विपक्षी भी हमलावर हो गया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में पूछा, 60 लाख टन कोयला "ग़ायब"! क्या इस कोयला घोटाले पर प्रधान 'मित्र' मंत्री जी कुछ कहेंगे?
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी इस मामले को लेकर ट्वीट किया और लिखा- गुजरात सरकार में ₹6,000 करोड़ का "कोयला घोटाला"! खदान से 60 लाख टन कोयला आया - हुआ ग़ायब। भाजपा सरकार ने 4 निजी कंपनियों को कोयला लाने को अधिकृत किया, 3 का पता ही नक़ली। शायद जबाब होगा - 'न कोई कोयला लाया, न कोयला आया', मामला बंद, पैसा हज्म !
कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने अपने ट्वीट में लिखा- गुजरात का कोयला घोटाला चारा घोटाला का बाप है। खदान से निकला 60 लाख टन कोयला। बीच रस्ते में गायब हो गया। 6000 करोड़ रुपये की लूट। लूट में कौन-कौन शामिल है,इसकी जाँच होनी जरूरी है।