बिकरू की बेगुनाह : खुशी दुबे को न्याय दिलाने के लिए 'मैं ब्राहमण हूँ' महासभा ने चलाया पोस्टकार्ड अभियान

न्यायिक हिरासत में रह रही खुशी अब जिंदगी और मौत से लड़ रही है। बाराबंकी संवासिनी गृह में उसे बीते 8 महीनो से खून की उल्टियां होने की शिकायत बनी हुई थी, जिसके बाद उसे लखनऊ आरएमएल में इलाज के लिए रेफर किया गया था...

Update: 2021-06-02 05:57 GMT

बिकरू कांड के बाद पुलिस हिरासत में जेल भेजी गई खुशी अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ रही है. photo - social media

जनज्वार, कानपुर। कानपुर के बहुचर्चित बिकरू कांड के बाद एनकाउंटर में मारे गए अपराधी अमर दुबे की विधवा जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। अपने नाम के उलट खुशी की जिंदगी नरक में बदल गई है। तीन दिन की विवाहिता खुशी के लिए पहले दिन से कई संस्थाएं न्याय की मांग कर रही हैं, ब्राहमण महासभा भी उनमें से एक है। 

कानपुर की 'मैं ब्राहमण हूँ' महासभा ने खुशी दुबे को न्याय दिलाने के लिए वकील से लेकर पैरवी तक सब कुछ किया है। अब इस संस्था ने राष्ट्रपति सहित चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को हाथ से लिखे पोस्टकार्ड भेजकर बेगुनाह खुशी दुबे के लिए न्याय की गुहार लगाई है। 

गौरतलब है कि कानपुर में 2 जुलाई की रात बिकरू कांड को अंजाम दिया गया था। इस कांड को यूपी में सबसे बड़े कांड का दर्जा दिया गया है, जिसमें एक साथ 8 पुलिसवाले मार दिए गए थे। कांड के बाद एक-एक कर सभी बदमाशों को मार गिराया गया। इसी कांड के बाद अमर दुबे को पुलिस ने हमीरपुर में ढ़ेर कर दिया था, जिसकी दुल्हन थी खुशी दुबे।


खुशी की शादी बिकरू कांड के ठीक तीन दिन पहले हुई थी। और शादी के बाद वह बिकरू गई थी। कांड के बाद वह अपने मां-बाप के घर पनकी रतनपुर आ गई थी, जहां से पुलिस उसे उठा ले गई थी। तब से लेकर अब तक खुशी की जिंदगी में गम इस कदर घुसा की वह न्यायिक प्रक्रिया का घुन बन गई और पिस रही है।

खुशी को न्याय दिलाने के लिए अब तक तमाम संस्थाओं और लोगों ने हाथ पैर मारे लेकिन सिस्टम के आगे सब फेल रहा। न्यायिक हिरासत में रह रही खुशी अब जिंदगी और मौत से लड़ रही है। बाराबंकी संवासिनी गृह में उसे बीते 8 महीनो से खून की उल्टियां होने की शिकायत बनी हुई थी, जिसके बाद उसे लखनऊ आरएमएल में इलाज के लिए रेफर किया गया था।

'मैं ब्राहमण हूँ' महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष दुर्गेश मणि त्रिपाठी जनज्वार से बात करते हुए कहते हैं 'उसके साथ हुआ तो अमानवीय है,ऐसी दुर्घटना किसी के भी साथ हो सकती है पर इसका मतलब ये तो नही की एक महिला की रक्षा ही न हो। आखिर उसके साथ ऐसा क्या हुआ है जिसे छिपाने के लिए पूरा तंत्र लगा है? अगर किसी ने आज आवाज नही उठाई तो शायद ही उस बच्ची की जान बचे।'


दुर्गेश मणि कहते हैं 'जिन हरामियों को ब्राह्मण बालिका खुशी दुबे में एक अपराधी दिखता है वो अपनी बहनों का पीछा करना चालू कर दें, एक अपराधी उनके घर मे भी पल रहा है फिर धिक्कार है ऐसे समाज पर जो सच के साथ नहीं। हम लोग राष्ट्रपति और मुख्य न्यायाधीश भारत को पत्र लिख रहे खुशी दुबे की रक्षा के लिए। अब आप को सोचना है कि एक निरीह बिटिया की आवाज बनेंगे की राजनैतिक चाटुकारिता करेंगे।'

महासभा के प्रेजिडेंट दुर्गेश हमसे बताते हैं कि 'खुशी दुबे की रक्षा के लिए हमने अब तक महामहिम राष्ट्रपति जी और भारत के मुख्य न्यायाधीश को 1000 पोस्टकार्ड लिखवा कर भेजे हैं। आगे एक मुहिम बनाकर पोस्ट कार्ड दोनो पतों पर भिजवाएंगे। जल्दी जी हम कैम्प लगाकर इस बात को आम जनता से भी जोड़ेंगे और सब को बताएंगे की उसके साथ जो अन्याय हो रहा वह हमारे समाज को गलत मैसेज दे रहा है।'

Tags:    

Similar News