Independence Day 2022: स्वतंत्रता दिवस खत्म होने के बाद तिरंगे को इधर उधर फेंकने से पहले जान लें ये नियम - कानून, अगर आप भी कर रहे हैं ये गलती तो हो सकती है जेल

Independence Day 2022: तिरंगा फहराने के सही तरीकों और इसके अपमान पर आपको सजा भी मिल सकती है। फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 में इसका जिक्र किया गया है...

Update: 2022-08-15 13:23 GMT

स्वतंत्रता दिवस खत्म होने के बाद तिरंगे को इधर उधर फेंकने से पहले जान लें ये नियम - कानून, अगर आप भी कर रहे हैं ये गलती तो हो सकती है जेल 

Independence Day 2022: भारत की आजादी के अमृत महोत्सव पर पीएम मोदी द्वारा हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है। जिसके चलते सभी देशवासी अपने घरों की छतों पर तिरंगा लगा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार अकेले डाक विभाग 10 दिन के अंदर एक करोड़ से ज्यादा तिरंगों की बिक्री कर चुका है। इसके अलावा दुकानों और संस्थानों की तरफ से भी लोगों को तिरंगे दिए गए हैं।

ध्वजारोहण और तिरंगा फहराना

15 अगस्त को ध्वजारोहण किया जाता है और 26 जनवरी को तिरंगा फहराया जाता है। ध्वजारोहण और झंडा फहराने के बीच एक बड़ा अंतर है। जब तिरंगे को नीचे से रस्सी के माध्यम से खींचकर फहराया जाता है, तो इसे ध्वजारोहण कहते हैं। लेकिन 26 जनवरी में तिरंगा ऊपर ही बंधा होता है, जिसे पूरा खोलकर फहराया जाता है। इसे झंडा फहराना कहते हैं।

फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 में इसका जिक्र

तिरंगा फहराने के सही तरीकों और इसके अपमान पर आपको सजा भी मिल सकती है। फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 में इसका जिक्र किया गया है। इसके अपमान से जुड़ी कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 कानून के तहत की जाती हैं। 26 जनवरी 2002 के फ्लैग कोड के नियम 2.2 के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति, संस्था, शैक्षिणिक संस्थान और निजी-सरकारी संस्थान तिरंगा झंडा को सम्मान के साथ किसी भी दिन या किसी भी अवसर पर फहरा सकते हैं।

पॉलिस्टर से बने ध्वज के उपयोग की अनुमति नहीं

भारतीय झंडा हाथ से काते गए, हाथ से बुने गए ऊनी, सूती, सिल्क, पॉलिस्टर या खादी के कपड़े से बना होना चाहिए। झंडे की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 ही होना चाहिए। यानी भारतीय झंडा एक वर्ग के आकार में न होकर आयत होना चाहिए। इससे पहले मशीन से बने और पॉलिस्टर से बने राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग की अनुमति नहीं थी।

तिरंगे के साथ किसी भी तरह की छेड़खानी नहीं

सभी नियमों के मुताबिक राष्ट्रीय ध्वज में किसी भी तरह की तस्वीर पेंटिंग या फोटोग्राफी का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। फटा हुआ और मेला झंडा नहीं लगाया जा सकता। ध्वज के साथ किसी भी प्रकार की छेड़खानी नहीं होनी चाहिए। वह अपने वास्तविक आकार लंबाई और रंग का ही होना चाहिए। तिरंगे को कभी भी झुका कर नहीं रखना चाहिए। जहां आपको तिरंगा फहराना है वहां यह सब से ऊंचा होना चाहिए अर्थात इसके साथ कोई और झंडा इससे ऊंचा नहीं होना चाहिए। जिस भी खंबे या स्तंभ पर झंडा लगा हो उस पर किसी तरह का कोई भी विज्ञापन ना हो यानी राष्ट्रध्वज का प्रयोग व्यवसायिक प्रयोजनों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

तीन साल की जेल और जुर्माना

भारतीय ध्वज संहिता, 2002 को 20 जुलाई 2022 के संशोधन के बाद जहां ध्वज खुले में प्रदर्शित किया जाता है या किसी नागरिक के घर पर प्रदर्शित किया जाता है, वहां इसे दिन-रात फहराया जा सकता है। जबकि पहले तिरंगे को सूर्योदय से सूर्यास्त तक लगाने की अनुमति थी। देश में लोग ज्यादातर कागज के झंडे को फहराते हैं लेकिन इस तरह के झंडे बाद में लोग इधर-उधर फेंक देते हैं। फिर वह झंडे या तो लोगों के पैरों में आते हैं या तो वह कूड़ेदान में पाए जाते हैं। यह सरासर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है। तिरंगे का इस्तेमाल होने के बाद उसे मर्यादा पूर्वक अपने घर में संभाल कर रखा जाना चाहिए। फ्लैग कोड के मुताबिक देश के झंडे का संपर्क किसी भी हालत में जमीन या पानी से नहीं होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करता है इसे जलाता है या फिर इसको दूषित करते हुए या पैरों में कुचलते हुए दिखाई देता है तो उसे 3 साल की जेल या जुर्माना देने का दंड मिल सकता है। व्यक्ति को जुर्माना भी भरना पड़ता है और उसे दंडित भी किया जाता है।

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