मर्जी से बना यौन संबंध और पार्टनर ने शादी से कर दिया मना तो उसे नहीं माना जायेगा रेप - हाईकोर्ट
एक महिला वकील ने नवनीत एन नाथ पर आरोप लगाया था कि चार साल तक शादी का झांसा देकर उसके साथ रेप किया और शादी किसी और से कर ली।
पर्सनल लॉ की आड़ में नाबालिग से संबंध बनाकर बच निकलना मुश्किल, ऐसा करना पॉक्सों के दायरे से बाहर नहीं : केरल हाईकोर्ट
नई दिल्ली। केरल हाइकोर्ट ( Kerala High court ) ने शुक्रवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि दो लोगों के बीच सहमति से बने संबंध ( Willful Sex ) बालात्कार ( Rape ) की कैटेगरी में नहीं आते। इसे आईपीसी की धारा 376 के तहत रेप नहीं माना जा सकता। अगर सहमति धोखे से या जबरदस्ती ली गई थी तो ही आरोपी के खिलाफ बलात्कार माना जा सकता है।
केरल हाईकोर्ट ( Kerala High court ) के जस्टिस बेचु कुरियन की बेंच ने पेशे से 29 वर्षीय वकील और याचिकाकर्ता नवनीत एन नाथ की याचिका पर सुनवाई के बाद ये फैसला दिया। नवनीत एन नाथ को 23 जून को आईपीसी की धारा 376 (2) (n) और 313 के तहत गिरफ्तार किया गया था। नवनीत पर आरोप था कि चार साल तक उन्होंने एक महिला वकील *( Lady advocate ) को शादी का झांसा देकर उसके साथ रेप ( Rape ) किया और शादी किसी और से कर ली। जब महिला को इसकी जानकारी मिली तो वह नाथ की मंगेतर से होटल में मिलने पहुंची। कथित तौर पर महिला ने नस काटकर आत्महत्या करने की कोशिश की।
अब इस मामले में केरल हाईकोर्ट के जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने नवनीत एन नाथ को जमानत देते हुए कहा कि भले ही दो लोगों के बीच सहमति से बने यौन संबंध ( Sex relation ) विवाह ( marriage ) में परिवर्तित नहीं होते हैं, फिर भी यह बलात्कार के अंदर नहीं आएंगे। बाद में शादी करने से इनकार करना या रिश्ते को शादी में ले जाने में विफलता ऐसे कारक नहीं हैं जो बलात्कार के श्रेणी में आते हों। भले ही साथी शारीरिक संबंध में शामिल हो।
बलात्कर कैसे होगा तय
केरल हाईकोर्ट ( Kerala High court ) ने कहा कि किसी की सहमति या इच्छा के बिना या बल प्रयोग से किया गया सेक्स ही बलात्कार की श्रेणी में आएगा। यहां पर अहम सवाल यह भी है कि क्या सेक्स के बाद शादी करने से इनकार करना बलात्कार है। इस पर अदालत ने आगे स्पष्ट किया कि जब वादा खराब विश्वास में दिया गया हो या सेक्स धोखाधड़ी से किया गया है या इसे बनाते समय वादा पालन करने का इरादा नहीं था, तभी ये बलात्कार की श्रेणी में आएगा।
केरल हाईकोर्ट ( Kerala High court ) के जस्टिस ने कहा कि शादी के वादे का पालन करने में विफलता के कारण एक पुरुष और एक महिला के बीच शारीरिक संबंध को बलात्कार में बदलने के लिए यह आवश्यक है कि महिला का सेक्सुअल एक्ट में शामिल होने का निर्णय शादी के वादे पर आधारित हो। एक झूठा वादा स्थापित करने के लिए, वादा करने वाले को इसे बनाते समय अपनी बात को कायम रखने का कोई इरादा नहीं होना चाहिए था। उक्त वादे ने महिला को शारीरिक संबंध के लिए प्रेरित किया होगा। शारीरिक मिलन और शादी के वादे के बीच सीधा संबंध होना चाहिए।