यूपी के मिर्जापुर जिले में गरीबों-आदिवासियों की पुश्तैनी जमीनों पर बुलडोजर कार्रवाई कर बेदखल करने की कोशिश के खिलाफ उठी आवाज

Update: 2026-01-15 15:31 GMT

लखनऊ। 'मिर्जापुर जिले में गरीबों-आदिवासियों की पुश्तैनी जमीनों पर बुलडोजर कार्रवाई कर बेदखल करने की कोशिश की जा रही है। उनके भूमि व वनाधिकार के आंदोलन पर दमन हुआ और आंदोलन के नेताओं को फर्जी मुकदमे लगाकर जेल भेजा गया। तेंदुआ खुर्द गांव में बुलडोजर चलना कोई अलग-थलग घटना नहीं है। बुलडोजर पूरे प्रदेश में गरीबों के खिलाफ चल रहा है। मुस्लिमों के धार्मिक-शैक्षिक संस्थाओं, मजारों पर भी बुलडोजर चल रहा है। बुलडोजर राज के खिलाफ सभी लोकतांत्रिक शक्तियों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।'

यह बात आज 15 जनवरी को हजरतगंज स्थित यूपी प्रेस क्लब के सभागार में दमन-विरोधी कन्वेंशन की अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और भाकपा (माले) के वरिष्ठ नेता जयप्रकाश नारायण ने कही। भूमि व वनाधिकार के लिए बुलडोजर राज के खिलाफ कन्वेंशन का आयोजन भाकपा (माले) की राज्य इकाई ने किया था।

मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और दलित बुद्धिजीवी रविकांत चंदन ने कहा कि जिन शब्दावलियों के जरिए सांप्रदायिक फासीवाद अपने को छुपाने की कोशिश कर रहा उसे अब जनता जान चुकी है। तमाम विषमताओं के बावजूद जनता अपने सवालों पर एकजुट हो रही है। सरकारी संस्थाओं का दुरूपयोग करके यह प्रतिरोध की हर आवाज को दबाना चाह रही है। इसके खिलाफ व्यापक जनता को हमें जागरूक करना होगा।

भाकपा (माले) के पोलित ब्यूरो सदस्य रामजी राय ने कहा कि मोदी-योगी सरकार विकास की बात करते हुए विनाश का विकास कर रही है।जंगल-पहाड़ की रक्षा करने वाले आदिवासी व पहाड़ी समुदायों का विनाश पर्यावरण व जलवायु संरक्षण के लिए भी खतरा है।

ऐपवा प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी ने कहा कि कृष्णा अधिकारी ने कहा कि संविधान बचाने के लिए संघर्षरत शक्तियों पर बुल्डोजर कार्रवाई हो रही है। जिन लोगों ने आजादी के आन्दोलन में भागेदारी नहीं की मोदी उनकी मूर्तियां स्थापित कर रहे हैं। योगी सरकार तराई में संक्रमणीय किसानों की भूमि छीन रही है।

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जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कौशल किशोर ने कहा कि जन आंदोलनों को अपराध और विकास-विरोध के रूप में पेश किया जाता है। उन्होंने सांस्कृतिक और वैचारिक प्रतिरोध की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

कन्वेंशन को भाकपा राज्य काउंसिल के सदस्य परमानंद और फॉरवर्ड ब्लॉक की राज्य सचिव डॉ. आरती ने भी संबोधित किया। संचालन भाकपा (माले) के लखनऊ जिला प्रभारी रमेश सेंगर ने किया। कन्वेंशन में लखनऊ के अलावा सीतापुर, लखीमपुर खीरी, कानपुर, जालौन, अयोध्या, बस्ती, गोंडा, उन्नाव, हरदोई व हमीरपुर जिलों से आये लोगों ने भाग लिया।

कन्वेंशन से चार प्रस्ताव पारित किए गए। एक प्रस्ताव में वन व भूमाफिया को संरक्षण और गरीबों पर बुलडोजर नीति का विरोध किया गया। वनाधिकार कानून पर अमल करने और जंगल, जमीन व वनोपज पर आदिवासियों-वनवासियों को अधिकार देने की मांग की गई। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में ग्राम समाज, बंजर, परती की भूमि पर आबाद गरीबों को उजाड़ने की कार्रवाई तत्काल रोकने, ऐसी जमीनों को उन्हें विनियमित करने और नागरिकों के आश्रय व आजीविका के अधिकार की रक्षा करने की मांग भी की गई। अल्पसंख्यकों की धार्मिक व शैक्षिक संस्थाओं, मजारों आदि पर बुलडोजर कार्रवाई का विरोध किया गया।

दूसरे प्रस्ताव में भाकपा (माले) के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव सुधाकर यादव और पार्टी की मिर्जापुर जिला सचिव जीरा भारती को, गरीबों-आदिवासियों के भूमि व वनाधिकार की रक्षा के लिए आंदोलन का नेतृत्व करने के कारण, हत्या के प्रयास जैसी संगीन आपराधिक धाराओं में फर्जी मुकदमा दर्ज कर मिर्जापुर जेल भेजने को प्रदेश सरकार की अलोकतांत्रिक व दमनकारी कार्रवाई बताते हुए कड़े शब्दों में निंदा करता है।

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प्रस्ताव में मिर्जापुर के लालगंज थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 04/2026, दिनांक 3-1-2026, जिसमें भाकपा (माले) नेताओं और ग्रामीणों की गिरफ्तारियां हुईं, निरस्त करने और सभी की रिहाई की मांग की गई।

तीसरे प्रस्ताव में मिर्जापुर में तेंदुआ खुर्द गांव में 2/3 जनवरी की रात दो बजे सैंकड़ों वनकर्मियों द्वारा जेसीबी के साथ हमला करने और घरों में घुसकर महिलाओं से बदसलूकी व मारपीट करने की घटना में घायल महिलाओं व ग्रामीणों की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर वनकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। इसी के साथ, महिला नेता व जिला सचिव जीरा भारती को गत तीन जनवरी को गिरफ्तार करने के बाद उन्हें मारने-पीटने व अपमानित करने वाले पुरूष पुलिसकर्मियों को दंडित करने की मांग भी की गई।

चौथे व अंतिम प्रस्ताव में मिर्जापुर में भाकपा (माले) व वाम दलों के नेताओं-कार्यकर्ताओं को उनके घरों पर पुलिस भेजकर कई दिनों तक नजरबंद (हाउस अरेस्ट) करने, कार्यकर्ताओं के परिवार वालों को परेशान करने और भय व आतंक का माहौल बनाने को लोकतंत्र का हरण और तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई बताया गया। प्रस्ताव में नजरबंदियों पर रोक लगाने, व्यक्ति की निजी स्वतंत्रता का सम्मान करने और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक गतिविधियों के लिए सामान्य माहौल बनाने की मांग की गई।

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