Paytm Crisis: जानें क्यों बढ़ता जा रहा है दिवालिया होने की कगार पर?
Paytm Crisis: पेटीएम यानी पे थ्रू मोबाइल। साल 2011 में इस कंपनी की शुरुआत हुई और तेजी से इसके कस्टमर भी बढ़े। लेकिन पिछले 1 साल में पेटीएम लगातार घाटे में चल रहा है और इसे होने वाला नुकसान हर तीसरी तिमाही में बढ़ता जा रहा है।
Paytm Crisis: जानें क्यों बढ़ता जा रहा है दिवालिया होने की कगार पर?
मोना सिंह की रिपोर्ट
Paytm Crisis: पेटीएम यानी पे थ्रू मोबाइल। साल 2011 में इस कंपनी की शुरुआत हुई और तेजी से इसके कस्टमर भी बढ़े। लेकिन पिछले 1 साल में पेटीएम लगातार घाटे में चल रहा है और इसे होने वाला नुकसान हर तीसरी तिमाही में बढ़ता जा रहा है। आखिर इस घाटे की वजह क्या है? और क्या यह दिवालिया होने की कगार पर है? जानते हैं इस रिपोर्ट से
पेटीएम के शेयर में अनिश्चितता का दौर लगातार जारी है।
हालांकि, लंबे समय से घाटे में चलने के बाद पेटीएम कंपनी के शेयर में उछाल आने का भी दावा किया गया है। लेकिन फिर भी अनिश्चितता के हालात बने हैं क्योंकि पेटीएम के यूजर्स की संख्या में तेजी से कमी आई है। इस बीच, ब्रोकरेज फॉर्म के दावे के अनुसार, कंपनी के शेयर जो अब तक घाटे में चल रहे थे अब उनकी कीमत 2090 तक जा सकती है। पेटीएम की पैरंट कंपनी One97 कम्युनिकेशंस ने हाल में ही अपनी तीसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा की थी। उसके बाद ही गोल्डमैन सैक्स ने पेटीएम के शेयर्स की रेटिंग न्यूट्रल से अपग्रेड करके बाए (bye) कर दी है। मतलब अब शेयर में इन्वेस्ट किया जा सकता है। फिर भी उतार-चढ़ाव तेजी से जारी है। पिछले कई महीनों से कंपनी के शेयर घाटे में जा रहे थे। जिसके चलते निवेशक अपनी मूलराशि निकलना चाहते थे, लेकिन लगातार गिरते प्राइस की वजह से ये संभव नहीं हो पा रहा था।
गोल्डमैन सैक्स ने रेटिंग तो बढ़ाई लेकिन पेटीएम का प्राइस टारगेट घटाकर 1460 कर दिया है। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, पेटीएम के शेयरों का प्राइस अभी भी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। मार्केट में तेजी रही तो कंपनी का शेयर 2090 रुपयों तक जा सकता है। वहीं अनिश्चितता की स्थिति में 820 रुपए पर भी आ सकता है।
पेटीएम यूजर्स हुए कम
विशेषज्ञों के अनुसार, पेटीएम का टेक रेट 2021 में 0.79 फीसदी पर आ गया है, जबकि यह टेक रेट 2017 में 2.18 फ़ीसदी था। इसका मतलब यह है कि पेटीएम यूजर्स की संख्या में कमी आई है।इसके अलावा पेटीएम के शेयरों की लिस्टिंग 2150 रुपए में हुई थी। लेकिन कुछ दिनों बाद दिसंबर 2021 में यह कीमत गिरकर 1271 रुपए पर आ गई ।पेटीएम के शेयर इस समय 1271 पर ट्रेंड करने लगे।
नुकसान उठा रहा है पेटीएम
विश्लेषकों के अनुसार, कंपनी के टॉप मैनेजमेंट द्वारा दिए गए बयान की वजह से भी पेटीएम के शेयर्स की कीमत पर असर पड़ा है। शेयर्स की लिस्टिंग के पहले ही विश्लेषकों का अनुमान था कि शेयर्स की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है। और यह 'बाई और होल्ड' वाला निवेश साबित नहीं हो पाएगा। पेटीएम का आईपीओ नवंबर 2021 में आया था, जो की भारत का सबसे बड़ा आईपीओ था। और कंपनी का शेयर 22 नवंबर 2021 को लिस्ट हुआ था। लेकिन पहले ही दिन यह 27 फीसदी गिर गया। यह अपने प्राइस बैंड, जो 2080 से 2150 रुपए था, उसे भी अभी तक नहीं छू पाया है। यानी निवेशक प्रति शेयर लगभग 1000 रुपए का नुकसान उठा रहे हैं। पेटीएम ने देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ लॉन्च किया था, इसके जरिए कंपनी ने मार्केट से 18300 करोड रुपए जुटाए थे। वैल्यूएशन ज्यादा होने की वजह से निवेशकों ने इसे भाव नहीं दिया था और इसे दोगुना से भी कम की बोली मिली थी।
2021 -2022 में 30 फ़ीसदी तक गिरे कंपनी के शेयर
दिसंबर 2021 में खत्म हुई तिमाही में पेटीएम का घाटा पिछली तिमाही के मुकाबले बढ़कर 778.5 और परिचालन राजस्व 1,456 करोड रुपए हो गया है। वहीं पिछले वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में घाटा 535.5 करोड रुपए था, और परिचालन राजस्व 772 करोड रुपए था। इससे पहले सितंबर में खत्म होने वाली तिमाही में घाटा 481.70 करोड़ था। जबकि जून तिमाही में यह घाटा 376 करोड रुपए का था। इसका मतलब ये है कि कंपनी की हर तिमाही में होने वाला घाटा घटने की बजाय बढ़ता ही जा रहा है।
अभी 11 फरवरी को पेटीएम का शेयर रेट 952.90 रुपए था लेकिन अगले ही दिन 12 फरवरी को यह रेट 925 हो गया। इस तरह शेयर की कीमत इश्यू प्राइस के मुकाबले आधी हो चुकी है। और मार्केट कैप 60,089 करोड रुपए था। लेकिन कंपनी लगातार अपना मर्चेंट बेस बढ़ा रही है। यही वजह है कि कंपनी मार्केट में अभी तक टिकी हुई है। इस समय पेटीएम के 35 करोड़ उपभोक्ता और मर्चेंट बेस भी दो करोड़ से बढ़कर ढाई करोड़ हो गए हैं।
मैक्वायरी ने घटाया पेटीएम का टारगेट प्राइस
पेटीएम के तिमाही के घाटे में हर बार बढ़त के चलते ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक मैक्वायरी ने पेटीएम का टारगेट प्राइस 1200रुपए से घटाकर 700 रूपए कर दिया है।
क्या कहते हैं विजय शेखर शर्मा
कंपनी के फाउंडर विजय शेखर शर्मा ने फ्लॉप लिस्टिंग के लिए खराब समय को जिम्मेदार बताया है। उनके अनुसार, पेटीएम का आईपीओ जब बाजार में आया उस समय बाजार कई वजहों से प्रभावित था। इस वजह से पेटीएम के शेयर घाटे में चले गए।
मुनाफे में कब आएगा पेटीएम
अमेरिका के फाइनेंस प्रोफेसर अस्वथ दामोदरन जिन्हें 'डीन ऑफ वैल्यूएशन ' भी कहा जाता है, ने अपने ब्लॉग में यह बात लिखी है कि "यह बताना मुश्किल है कि बाजार किसी कंपनी के साथ कम अवधि में कैसा व्यवहार करता है। मुझे लगता है कि पेटीएम के संस्थापक और प्रवक्ता को आईपीओ से पहले बहुत कम बढ़ा चढ़ा कर बात करनी चाहिए थी"। दामोदरन ने यह भी लिखा है कि विजय शेखर शर्मा ने कई बार कहा है कि पेटीएम का कारोबार जल्द मुनाफे में आ सकता है। लेकिन अब पेटीएम को मुनाफे में लाने की उनकी क्षमता पर संदेह पैदा होने लगा है। प्रोफेसर दामोदरन ने अपने ब्लॉग में यह भी लिखा है कि कंपनी के फाउंडर और अधिकारियों को कंपनी को मुनाफे में लाने की ओर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। शेयर बाजार में पेटीएम के शेयर्स में उतार-चढ़ाव वैल्यूएशन मुनाफे में आने की संभावना की वजह से कंपनी लगातार चर्चा में बनी हुई है। आरबीआई द्वारा शेड्यूल बैंक का दर्जा का दिए जाने के बावजूद कंपनी खुद को घाटे से बाहर नहीं ला पा रही है, यदि यही स्थिति लगातार बनी रही तो पेटीएम जल्द ही दिवालिया होने की कगार पर जा सकता है।