म्यांमार – आन्दोलनों से उपजी कवितायें | Witness Writings from Myanmar |

Witness Writings from Myanmar | म्यांमार के विद्रोही युवा कवियों और लेखकों की कविताओं और लेखों का संग्रह (Anthology) हाल में ही प्रकाशित किया गया है| 1 फरवरी, 2021 को सेना द्वारा तख्तापलट के बाद से म्यांमार के कवियों और लेखकों की पहली साहित्यिक पुस्तक है|

Update: 2022-02-18 06:43 GMT

म्यांमार – आन्दोलनों से उपजी कवितायें | Witness Writings from Myanmar |

महेंद्र पाण्डेय की रिपोर्ट

Witness Writings from Myanmar | म्यांमार के विद्रोही युवा कवियों और लेखकों की कविताओं और लेखों का संग्रह (Anthology) हाल में ही प्रकाशित किया गया है| 1 फरवरी, 2021 को सेना द्वारा तख्तापलट के बाद से म्यांमार के कवियों और लेखकों की पहली साहित्यिक पुस्तक है| इसे यूनाइटेड किंगडम के बलेस्तिएर प्रेस (Balestier Press, United Kingdom) ने प्रकाशित किया है और इसके सम्पादक को को थेट और ब्रायन हामान (Editors – Ko Ko Thett & Brian Haman) ने किया है| इस पुस्तक का नाम है – Picking off New Shoots will not Stop the Spring| इसमें उन कविताओं, लेखों, नोट्स और कुछ नारों का संकलन है जो म्यांमार में 1988 के छात्र आन्दोलन से लेकर 2021 के आन्दोलनों के दौरान लिखी गयी हैं|

युवा कवियों की लेखनी का यह संग्रह वर्ष 2021 के लोकतांत्रिक आन्दोलनों के एक वर्ष बाद प्रकाशित किया गया है| इसे संपादकों ने आन्दोलन कविता नहीं बल्कि दर्शक कविता बताया है| सह-सम्पादक को को थेट के अनुसार गवाह कविता (witness poems) और आंदोलन कविता (protest poems) में कुछ अंतर है| सभी गवाह कविता आन्दोलन कविता होती है, पर सभी आन्दोलन कविता गवाह कविता हो, यह आवश्यक नहीं है| गवाह कविता घटनाओं का विस्तार से वर्णन करती है, जबकि विशुद्ध आन्दोलन कविता में उपमा-अलंकार का उपयोग सामान्य है| गवाह कविता वह होती है, जिसे कवि या लेखक किसी परिस्थिति को देखकर, भुगत कर या सुनकर लिखने को बाध्य होता है|

दक्षिण एशिया से सम्बंधित विशेषज्ञ पैनी एडवर्ड्स के अनुसार यह संग्रह गवाह कविता से भी आगे के जानकारी देती है| इसमें कवितायें कविता की सामान्य परिभाषा से परे हैं और यह एक तरीके से कवियों और लेखकों का घोषणापत्र तैयार करती हैं और तख्तापलट करने वाली मानसिक विकलांग सेना के अस्तित्व को नकारती हैं|

म्यांमार में 1 फरवरी, 2021 के तख्तापलट के बाद से सेना ने बहुत सारे कवियों और लेखकों को प्रताड़ित किया, उनके विरुद्ध मुकदमे दायर किया, जेल में बंद किया और अनेक लोकप्रिय सशक्त कवियों को मार डाला| मार्च, 2021 में ही सेना ने म्यिंत म्यिंत जिन और के जा विन की ह्त्या कर डी थी, दोनों ही सशक्त और लोकप्रिय कवि थे| पुस्तक के परिचय में संपादकों ने लिखा है कि सेना ने तख्तापलट के बाद से सबसे पहले लेखकों और कवियों पर ही निशाना साधा| अनेक कवियों को जेल में डाला गया, कुछ को मार डाला गया, पर हमने इस संकलन में उन सभी की कवितायें शामिल करने का प्रयास किया है, इसमें लोकप्रिय युवा कवि खेट थी भी शामिल है जिनकी ह्त्या सेना ने 8 मई 2021 को की| इन संपादकों के अनुसार 1 फरवरी, 2021 के तख्तापलट के बाद जब प्रिंट मीडिया पूरी तरह से खामोश कर दिया गया, तब कवियों और लेखकों ने सोशल मीडिया का सहारा लिया और रातों-रात लोकप्रियता के शिखर पर पहुँच गए| सोशल मीडिया ही कविताओं, लेखों और आन्दोलनों का प्रबल माध्यम बन गया| इन कविताओं में साहस और लोकतंत्र खोने का दुःख दोनों अभिव्यक्ति शामिल हैं|

इसके संपादकों के अनुसार तख्तापलट के बाद जब इन लोगों ने देखा कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की बाढ़ आ गई है, तभी यह निर्णय लिया गया कि यह सब लेखनी समय का बहुमूल्य दस्तावेज है और इन्हें सुरक्षित करना चाहिए, तभी इस पुस्तक को प्रकाशित करने का विचार आया| संपादकों के अनुसार ये कवितायें महज गवाह कवितायें नहीं हैं, सेना के विरुद्ध आक्रोश नहीं है, महज लोकतंत्र की आकांक्षा नहीं है बल्कि समकालीन म्यांमार के युवा कवियों का साहित्य भी है और इस काल का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज भी है| 

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